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घूस के पैसे होते तो मनोज तिवारी बनते दरोगा, मां ने खोले बेटे की जिंदगी के राज

दरोगा बनने के लिए घूस की मांग को मनोज तिवारी पूरी नहीं कर पाए वरना वो बिहार पुलिस में होते। मां ने सुनाई, अपने बेटे मनोज तिवारी की जिंदगी की कहानी।

पटना। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष सह सांसद मनोज तिवारी की मां अपने बेटे से काफी उम्मीद लगाई बैठी है। भोजपुरी एक्टर व संगीतकार मनोज तिवारी की मां ललिता तिवारी को पूरा विश्वास है कि एक दिन उनका बेटा दिल्ली का राजा होगा। मां का यह विश्वास उस वक्त पक्का हो गया जब मनोज तिवारी के नेतृत्व में एमसीडी चुनाव मे बड़ी उपलब्धि हासिल हुई और दिल्ली में बीजेपी की जीत हुई। जीत के बाद जहां लोगों के द्वारा मनोज तिवारी को बधाई देने का तांता लगा रहा वहीं उनके पैतृक आवास पर भी धूमधाम से जीत की खुशी मनाई गई और यह सिलसिला अब तक चल रहा है।

'एक दिन दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा बेटा'

'एक दिन दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा बेटा'

कैमूर जिले के मोहनिया प्रखंड के अतरवलिया गांव मे मनोज तिवारी की मां ललिता देवी को बेटे की उपलब्धि पर बधाई देने के लिए लोगों के आने-जाने का सिलसिला अब भी चल रहा है। दिल्ली नगर निगम चुनाव में बम्पर जीत हासिल करने के बाद ललिता देवी ने गांव में जीत की खुशी में मिठाई बांटी और अपने बेटे को राजनीति में कामयाब होने के लिए दुआएं भी की। उनका कहना था कि मनोज बचपन से ही होनहार लड़का था आज तक उसने जिस काम को हाथ लगाया उसे पूरा किया और उसमें उसे भरपूर सफलता मिली। अब हमें उम्मीद है कि राजनीति में उसे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा और एक दिन दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा।

पढ़ने में तेज थे मनोज तिवारी

पढ़ने में तेज थे मनोज तिवारी

अपने पुराने दिनों को याद करते हुए मनोज तिवारी की मां ललिता देवी कहती है कि अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद मनोज ने नौकरी के लिए अप्लाई किया था पर। उस वक्त हमारे परिवार के हालात कुछ ठीक नहीं थे और लालू की सरकार थी। बिना घूस दिए नौकरी पाना काफी मुश्किल होता था। नौकरी के लिए एक घूस मांगी गई जिसे देने में हम लोग असमर्थ थे जिसकी वजह से वह दरोगा नहीं बन सका। दरोगा नहीं बनने के बाद मनोज गाना-बजाना करने लगा और उसी रास्ते से चलकर आज इस मुकाम पर पहुंचा है। बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी तेज था। हाई स्कूल की पढ़ाई मोहनिया के सेवा निकेतन स्कूल से पूरा करने के बाद 1985 में मैट्रिक पास किया और आगे की पढ़ाई के लिए आदर्श कमलाकर चौबे इंटर कॉलेज बनारसी में नामांकन कराया जहां से 1987 में इंटर और बीएचयू वाराणसी से बीपीएड और एमपीएड की पढ़ाई पूरी की।

पिता से सीखा था संगीत

पिता से सीखा था संगीत

शास्त्रीय संगीत का ज्ञान उसे उसके पिता से मिला था। वह अपने पिता के साथ शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग लेता था। उसके पिता शास्त्रीय संगीत के नामी गायक थे। बचपन से ही उसे पढ़ने-लिखने के साथ-साथ गाने का भी शौक था जहां पढ़ाई में वह अपनी क्लास में सबसे ज्यादा नंबर लाता था तो स्कूल के प्रोग्राम में गाने और क्रिकेट खेलने का वह काफी दीवाना था। सरकारी नौकरी में असफलता पाने के बाद पहली बार उसने 1992 में फिल्मी करियर की शुरुआत की जिसे लोगों ने काफी सराहा। इसी का नतीजा है कि आज वह जिस मुकाम पर है उसे पूरा गांव महसूस करता है।

राजनीति की व्यस्तता से समय निकालकर आते हैं गांंव

राजनीति की व्यस्तता से समय निकालकर आते हैं गांंव

आपको बताते चलें कि मनोज तिवारी की मां ललिता तिवारी अपने तीन बेटे के साथ गांव में रहती है। उनके तीनों बेटे साधु शरण तिवारी, दुर्गा शंकर तिवारी और अशोक तिवारी भी अपने बच्चे और पत्नी के साथ गांव में ही रहकर कारोबार करते हैं। मनोज तिवारी के भाई अशोक तिवारी का कहना है कि वह दिल्ली की राजनीति में कितना भी व्यस्त रहे, फिर भी वक्त निकालकर गांव जरूर आते हैं। खासकर दुर्गा पूजा के मौके में वे गांव आते हैं और यहीं पूजा करते हैं। जैसे ही गांव वालों को यह पता चलता है कि मनोज गांव आए हैं लोग उनकी जुबान से निमिया के डाल मैया झुलेली गाना सुनना नहीं भूलते।

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