ना कोई देता है ना कोई मांगता है दहेज, यहां 100 रुपए में होती है शादी
नीतीश कुमार शराबबंदी के बाद दहेज बंदी कानून लागू करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं इस गांव की अनोखी शादी उनके सपने को हकीकत में बदलती दिख रही है।
पटना। दहेज लालचियों को भी कभी बिहार के इस अरवल जिले घूमके आना चाहिए। शादी के ख्याल पर दहेज गिनने वालों के लिए यहां के गांव में बड़ा सबक छिपा है। महज 100 रुपए खर्च करने के बाद यहां दूल्हा-दुल्हन सात जन्मों के लिए एक दूसरे के हो जाते हैं। जहां एक तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी के बाद दहेज बंदी कानून लागू करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं इस गांव की अनोखी शादी उनके सपने को हकीकत में बदलती दिख रही है। इस गांव में शादी के लिए ना तो दहेज लिया जाता है और ना ही दिया जाता है।

इसी की वजह से यहां शादी के लिए गांव का एक पौराणिक मंदिर तय किया जाता है जहां लोगों की शादी होती है और मात्र 100 रुपए के फीस में मंदिर के पंडित उनकी शादी करवा देते हैं। इस मंदिर में शादी करने के लिए स्थानीय लोगों को पैसे से लेकर अन्य सभी सुविधाओं में राहत महसूस होती है। आपको बता दें कि महज 100 रुपए में शादी करने का अनोखा अंदाज बिहार के अरवल जिले में देखने को मिला। बिहार के अरवल जिले में कई ऐसे मंदिर हैं जहां इस तरह की शादी बड़े पैमाने पर होती है। हर मंदिर में गांव के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।
जिले के कुछ मंदिर देवकुंड, किंजर, मोथा और मधुसरवां स्थित मंदिरों में शादी के मौसम में काफी भीड़ लगी रहती है और लोग 100 रुपए की फीस जमा करते हुए सात फेरे लेते हैं। ये 100 रुपए मंदिर में पूजा कराने वाले पुजारी और शादी में आए दोनों पक्षों के लोगों को ठहरने की व्यवस्था के लिए देना होता है। वहीं लोग 100 रुपए की फीस जमा कर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शादियां कराने के बाद राहत महसूस करते हैं।
मंदिर में शादी करने वाले दूल्हे का कहना है कि जहां आज-कल शादी में लाखों खर्च किए जाते हैं वहीं मंदिर में कम खर्च में शादी हो जाती है। खासकर गरीबी से परेशान लोग यहां आकर शादी करते हैं। आपको बता दें कि बिहार का अरवल जिला सभी जिलों में सबसे पिछड़ा है। फिर भी दहेज को लेकर एक दम सख्त है ऐसा नहीं है कि यहां लोग अभाव में ही इस रीति को अपनाते हैं बल्कि भव्य शादियों में जाते तक नहीं।
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