Bihar Politics: चिराग और मांझी की नाराजगी के बावजूद बिहार में इसलिए नहीं होगा तख्ता-पलट
Bihar Political News: 17 महीने में नीतीश कुमार (Nitish Kumar)ने आरजेडी के साथ महागठबंधन की सरकार को खत्म करते हुए फिर से बिहार में एनडीए की सरकार बनाई है। अपने इस बार के कार्यकाल में नीतीश कुमार ने तीसरा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
ऐसे में एनडीए में बीजेपी के अलावा नीतीश को जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) HAM और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा को भी समर्थन हासिल है, हालांकि चिराग और मांझी की नाराजगी के बावजूद बिहार में तख्ता-पलट नहीं होगा सकता, इसके पीछे के क्या कारण है, प्वाइंटर में जानिए?

बिहार की राजनीति के नीतीश कुमार मंझे हुए खिलाड़ी हैं। इसमें कोई शक नहीं कि उनके पास विधायकों की पूर्ण संख्या ना भी हो तो सीएम के पद पर वो ही काबिज होते हैं। इसलिए अब तक नीतीश कुमार बिहार के सीएम पद की 9 बार शपथ ले चुके हैं।
हाालंकि एनडीए में शामिल दलों में मांझी की पार्टी और चिराग पासवान का दल, वो दो खेमे हैं, जो नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। हाल ही में भरी विधानसभा में नीतीश कुमार ने मांझी को अपमानित किया था, लेकिन राजनीति में सब जायज है। इसलिए दो एनडीए में आने के बाद नीतीश के साथ सभी दल एक हैं। ऐसे में उन सभी खबरों पर भी विराम लग जाता है कि बिहार में मांझी और चिराग सत्ता बदल सकते हैं, क्योंकि...
- चिराग/लोजपा का कोई विधायक नहीं है तो उनकी नाराजगी से विधान सभा के गणित पर कोई प्रभाव नहीं है। चिराग नीतीश के खिलाफ बोलते रहेंगे लेकिन रहेंगे मोदी के साथ ही।
- मांझी मंझे हुए खिलाडी हैं, मुख्यमंत्री पद का प्रलोभन के बावजूद वो महागठबंधन में इसलिए नहीं गए क्योंकि वो जानते हैं कि भाजपा के पास उन्हें देने के लिए (राज्य सभा, केंद्रीय कैबिनेट, राज्यपाल) बहुत कुछ है। चार विधायक के दम पर वो महागठबंधन में मुख्यमंत्री बन भी गए तो डमी बनकर ही रहेंगे। अभी कुछ दिनों पूर्व मांझी को यह कहते हुए भी सुना गया था कि नीतीश ने उन्हें (उनके अपमान के लिए) सॉरी बोला तो उन्होने माफ कर दिया।
- बिहार में नीतीश को एनडीए में लाने के लिए जदयू से अधिक बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व / पीएम मोदी की दिलचस्पी थी। ऐसे में लोक सभा चुनाव के ऐन पहले भाजपा केंद्रीय नेतृत्त्व ऐसा कोई रिस्क नहीं लेगी, जिससे इंडी अलायंस सांकेतिक रूप से भी मजबूत हो। भाजपा अपने कोटे से मांझी को एक और मंत्रालय दे सकती है। भाजपा महाराष्ट्र में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर चुकी है। स्मरण रहे कि 2019 में भाजपा ने जदयू को गठबंधन के वास्ते 2014 में अपनी जीती हुई 5 सीटें दे दी थी।
- यदि मांझी किसी प्रलोभन/परिस्थिति में राजद के साथ जाने का निश्चय करते हैं तो भाजपा मांझी परिवार को छोडकर दो अन्य हम विधायक को मंत्रिपद का प्रलोभन दे सकती है।
- यदि मांझी अपने 4 विधायकों के साथ इंडी अलायंस में चले भी जाते हैं तब भी राजग सरकार 124 के मामूली बहुमत से चलती रहेगी।
- बिहार में राजग सरकार को गिराने के लिए भाजपा/जदयू के वर्तमान विधायकों को तोड़ना होगा। भाजपा विधायकों के टूटने की कोई संभावना नहीं है। जिस तरह से नीतीश कुमार ने एक महीना पहले कमान अपने हाथों में ली है, उसके बाद जदयू विधायकों के टूटने के आसार कम हो गए हैं। यदि नीतीश कुमार को आप कुर्सी कुमार भी कहते हैं तो कुर्सी बचाने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
- यदि तमाम एहतियात के बाद नीतीश कुमार/भाजपा को यह लग गया कि बहुमत उनके पास नहीं है सरकार गिर जाएगी, तो नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंप कर सरकार भंग करने की सिफारिश कर देंगे। राज्यपाल इस पक्ष का होने के कारण यहां राजग को अपरहैंड रहेगा।
- अगर विधान सभा भंग हुआ तो राज्य में लोक सभा चुनाव राष्ट्रपति शासन में होगा। राजग को टिकट बंटवारे में कम माथापच्ची करनी होगी।












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