Maithili Thakur Net Worth: मैथिली ठाकुर के पास कितनी संपत्ति? कैसे करती हैं कमाई, सामने आई हर डिटेल
Maithili Thakur Net Worth 2025: लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर अब सिर्फ मंच की नहीं, बल्कि सियासत की भी सुरमई आवाज बन चुकी हैं। दरभंगा जिले की अलीनगर सीट से बीजेपी प्रत्याशी बनीं 25 वर्षीय मैथिली ने अपने चुनावी हलफनामे में करोड़ों की संपत्ति का ब्योरा दिया है।
जिन सुरों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई, उन्हीं के सहारे उन्होंने कम उम्र में आर्थिक मजबूती भी हासिल की। बिहार की मिट्टी से निकली यह बेटी अब लोकगायन से आगे बढ़कर जनता की आवाज बनने की राह पर है। आइए जानते हैं मैथिली ठाकुर संपत्ति, पढ़ाई, पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में।

Maithili Thakur Property: मैथिली ठाकुर के पास कितनी संपत्ति?
मैथिली ठाकुर के पास आज करीब 2.32 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 1.50 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। यानी कुल मिलाकर उनकी संपत्ति का अनुमान 3.8 करोड़ रुपये से ज्यादा है। हलफनामे में उन्होंने 1.80 लाख रुपये नकद, दो करोड़ से अधिक के वाहन और जेवर और 47 लाख रुपये की भूमि का विवरण दिया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता ने उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है। अब वे न सिर्फ नाम, बल्कि शान-शौकत की मिसाल भी बन चुकी हैं।
मेहनत और प्रतिभा से मैथिली ठाकुर ने कमाए करोड़ों रुपये
मैथिली ठाकुर ने अपने टैलेंट के दम पर एक लंबा सफर तय किया है। मधुबनी की इस बेटी ने यूट्यूब और फेसबुक पर लोकगीतों और भजनों को नए अंदाज में पेश कर करोड़ों लोगों का दिल जीता। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, मैथिली हर लाइव परफॉर्मेंस के लिए 5 से 7 लाख रुपये तक फीस लेती हैं। यही कारण है कि कुछ ही सालों में उन्होंने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली।
उनकी आय का ग्राफ भी लगातार बढ़ा है -
- 2023-24 में ₹28,67,350
- 2022-23 में ₹16,98,840
- 2021-22 में ₹15,93,730
- 2020-21 में ₹11,15,150
- 2019-20 में ₹12,02,960 रुपये की आमदनी रही।

कितनी पढ़ी-लिखी हैं मैथिली ठाकुर?
मैथिली ठाकुर की पढ़ाई भी उनके संगीत सफर जितनी प्रेरणादायक है। मधुबनी जिले के उरेन गांव से निकलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है। बचपन में उन्होंने पांचवीं तक घर पर ही पढ़ाई की थी। फिर एमसीडी स्कूल में दाखिला लिया और बाद में अपनी प्रतिभा के कारण उन्हें बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल में संगीत छात्रवृत्ति मिली। छोटी उम्र से ही उन्होंने संगीत को अपना जीवन मान लिया था।
आर्थिक तंगी से उठकर बनाया नाम
साल 2000 में जन्मीं मैथिली ठाकुर का बचपन संघर्षों से भरा रहा। जब परिवार दिल्ली के नजफगढ़ में बस गया, उस समय उनके पिता रमेश ठाकुर की नौकरी चली गई थी। परिवार आर्थिक संकट में था, लेकिन संगीत ने उन्हें सहारा दिया। पिता खुद शास्त्रीय संगीत के जानकार थे और उन्होंने ही मैथिली को संगीत की शिक्षा दी। उनकी मां पूजा ठाकुर ने घर की जिम्मेदारियां संभालीं, जबकि दो भाई अयाची और ऋषभ ठाकुर आज मैथिली के साथ मंच साझा करते हैं।
टीवी शो से सोशल मीडिया स्टार बनने तक
मैथिली ठाकुर का नाम तब पहली बार चर्चा में आया जब वे 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' और 'इंडियन आइडल जूनियर' जैसे शो में नजर आईं। हालांकि शुरुआती असफलताएं मिलीं, लेकिन 2017 में 'राइजिंग स्टार' के मंच पर उन्होंने पहली रनर-अप बनकर इतिहास रच दिया।
इसके बाद उन्होंने अपने गाने सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू किया। पारंपरिक लोकगीतों को नए सुर और भाव से प्रस्तुत करने की उनकी शैली ने उन्हें सोशल मीडिया सेंसेशन बना दिया।

बॉलीवुड से दूरी, लेकिन नाम दुनिया भर में
मैथिली ने कभी भी बॉलीवुड के पीछे भागने का रास्ता नहीं चुना। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में न गाने का फैसला लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में "अनुचित संस्कृति" हावी है। हालांकि 2024 में उन्होंने फिल्म 'औरों में कहां दम था' के लिए एमएम कीरवानी के संगीत में "किसी रोज" गाना गाया, जिसे लोगों ने खूब सराहा।
पुरस्कार और सम्मान
उनकी कला को कई राष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिला है। 2021 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी ने 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' से नवाजा। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने भी उन्हें बिहार का स्टेट आइकन घोषित किया। अब वे राजनीति में उतरकर अपने गृह राज्य के लिए काम करने की तैयारी में हैं।
अब राजनीति में नई पारी
संगीत के बाद अब मैथिली ठाकुर ने राजनीति का सुर छेड़ा है। बीजेपी ने उन्हें दरभंगा की अलीनगर सीट से टिकट दिया है। यह कदम उनके जीवन का एक नया अध्याय है, जहां वे न सिर्फ अपनी आवाज, बल्कि अपने विचारों से भी लोगों का दिल जीतना चाहती हैं।









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