बिहार विधान परिषद चुनाव: महागठबंधन ने बढाई एनडीए की चिंता, जानिए कैसे बदले समीकरण
बिहार में मचे सियासी घमासान के बीच विधान परिषद चुनाव परिणाम ने जदयू और भाजपा नेताओं को हैरतअंगेज़ कर दिया है।
पटना, 08 अप्रैल 2022। बिहार में मचे सियासी घमासान के बीच विधान परिषद चुनाव परिणाम ने जदयू और भाजपा नेताओं को हैरतअंगेज़ कर दिया है। एनडीए गठबंधन ने सभी 24 सीटों पर जीत दर्ज करने का दावा किया था लेकिन चुनावी परिणाम के बाद सभी नेताओं को सिर्फ़ मायूसी ही हाथ लगी। गुरुवार को विधान परिषद स्थानीय प्राधिकार चुनाव परिणाम की घोषणा होने के बाद तेजस्वी यादव में नई उर्जा देखने को मिल रही है। चुनाव परिणाम से आंक़ड़ों में ज़्यादा बदलाव तो नहीं हुआ है लेकिन राष्ट्रीय जनता दल की ताक़त ज़रूर बढ़ी है।

जदयू-भाजपा ने 12 सीट दर्ज की जीत
बिहार में 24 सीटों पर चुनाव हुआ है उसमे भाजपा और जदयू को मिलाकर कुल 12 सीटों पर ही जीत मिली है। पिछले बार इन 24 सीटों में से 21 सीटों पर एनडीए का क़ब्ज़ा था। दो सीटें राष्ट्रीय जनता दल और एक सीट कांग्रेस के पास थी। इस बार भाजपा ने 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जिसमें सात सीटों पर ही जीत मिली और पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। जनता दल यूनाइटेड ने 11 प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिसमें पांच सीटों पर ही कामयाबी मिल पाई और 6 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही एनडीए के दूसरे सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (पशुपति पारस) का खाता भी खुल गया। इनके उम्मीदवार भूषण राय वैशाली की सीट से जीतने में कामयाब रहे।

जनता दल यूनाइटेड को 4 सीटों का नुकसान
आंकड़ों की बात की जाए तो जनता दल यूनाइटेड ड के पास 32 विधान पार्षद थे। इसके बाद 9 सीटें खाली हुई थी लेकिन जदयू खाली हुई 9 सीटों में पांच सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई। इस तरह अब विधान परिषद में जनता दल यूनाइटेड के 31 सदस्यों में सिर्फ़ 28 सदस्य ही बचे । 4 सीटों के नुकसान के बाद भी विधान परिषद में पार्टी को सबसे बड़े दल का दर्जा बना हुआ है। वहीं भारतीय जनता पार्टी पहले 27 सदस्य थे। जिसमें से 12 सीटें खाली हुई थीं लेकिन खाली हुई 12 सीटों में से भाजपा को सिर्फ़ सात सीटों पर ही कामयाबी मिली। 27 सदस्यों में से 5 सीटों के नुकसान के बाद अब भाजपा के पास 22 सदस्य हो गए हैं। आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी विधान परिषद में अभी भी दूसरे नंबर पर है, पहले भी दूसरे नंबर पर ही थी।

विधान परिषद में राजद के 11 सदस्य
बिहार विधान परिषद में पहले राष्ट्रीय जनता दल के पास सात सदस्य थे। जिसमे पार्टी की दो सीटें खाली हुई थीं। जिसके बाद राजद के 5 विधान परिषद के सदस्य बचे थे। इस बार के चुनाव राजद को चारी सीटों का फ़ायदा हुआ औऱ पार्टी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की। अब विधान परिषद में राजद के 11 सदस्य हो गये हैं। वहीं कांग्रेस के सीटों में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है। कांग्रेस के पास चार सदस्य थे जिसमें एक सीट खाली हुई थी औऱ चुनाव में एक ही सीट पर पार्टी ने जीत दर्द की है। कांग्रेस के पास पहले भी 4 सीटें थीं और अब भी 4 सीटें ही हैं। इस बार सीपीआई के खाते में एक भी सीट नहीं आई है, पहले भी दो ही सीटें थीं अब भी दो ही सीटें हैं।

एनडीए के पास विधान परिषद में 52 सदस्य
मुकेश सहने की वीआईपी में भी की बदलाव देखने को नहीं मिला है। इस बार एक भी सीट उनके खाते में नहीं गई है। पहल के ही एक सदस्य पहले हैं। एनडीए के विधान परिषद में के अब कुल सदस्यों की तादाद 52 है। 75 सदस्यों में से 52 सदस्य एनडीए गठबंधन के हैं। आंकड़ों की बात की जाए तो जदयू के 28 सदस्य, भाजपा के 22 सदस्य, रालोजपा के एक सदस्य और हम के एक सदस्य। इस बार रालोजपा विधान परिषद में नई पार्टी होगी। इस तरह दो-तिहाई से ज़्यादा सदस्य एनडीए गठबंधने के हो गए हैं। इसका बड़ा सदस्य हो गये हैं। इससे एनडीए गठबंधन को काफ़ी फ़ायदा होगा, क्योंकि कोई भी विधेयक, बजट या अन्य प्रस्ताव पास कराने के लिए सदन में बहुमत की जरूरत होगी और एडीए के पास पहले ही 52 सदस्य हो चुके हैं। वही विपक्ष के पास राजद के 11 सदस्य, कांग्रेस के चार सदस्य, सीपीआई के दो सदस्य कुल 17 सदस्य हो गये हैं। वहीं विधान परिषद में निर्दलीय सदस्यों की तादाद पांच हो गई है।
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