लालू परिवार पर कल ‘फैसले की घड़ी’, लैंड फॉर जॉब केस में सजा या राहत? चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे लालू-तेजस्वी
Land For Jobs Scam: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सबकी नजरें लालू प्रसाद यादव परिवार पर टिकी हैं। लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट सोमवार यानी 13 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाने जा रही है। इससे पहले रविवार (12 अक्टूबर) को लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव दिल्ली पहुंच चुके हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, "हम दिल्ली इसलिए आए हैं क्योंकि कोर्ट ने बुलाया है।"
सीबीआई की विशेष अदालत ने 25 अगस्त 2025 को इस केस में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। विशेष जज विशाल गोगने ने सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों की समीक्षा करने के बाद 13 अक्टूबर की तारीख तय की। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस दिन सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें। इसी आदेश के चलते लालू, राबड़ी और तेजस्वी रविवार को ही दिल्ली पहुंच गए। इस केस में आरजेडी के कई करीबी सहयोगी और कथित बिचौलिये भी आरोपी हैं।

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला? (What is Land For Jobs Scam)
लैंड फॉर जॉब घोटाला का यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई की जांच के मुताबिक उस दौरान रेलवे में ग्रुप डी नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन या संपत्ति बेहद कम कीमतों पर लालू परिवार के नाम ट्रांसफर करवाई गई थी।
जांच एजेंसी ने दावा किया कि लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और उनकी बेटी मिशा भारती समेत 16 लोगों ने इस योजना के तहत लोगों को नौकरी दी और बदले में उनकी जमीन हासिल की।
मई 2022 में सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में कई संपत्तियां, खासकर पटना और आस-पास की, लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर पाई गईं।
बीजेपी का हमला, वंशवाद और भ्रष्टाचार का प्रतीक
इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार आरजेडी और लालू परिवार पर हमलावर है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह मामला "वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार" का सबसे बड़ा उदाहरण है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि जिस परिवार ने गरीबों के नाम पर राजनीति की, उसने नौकरियों के बदले उनकी जमीनें हड़प लीं।
वहीं आरजेडी इस केस को राजनीतिक साजिश बता रही है। तेजस्वी यादव पहले भी कई बार कह चुके हैं कि "सीबीआई का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने के लिए किया जा रहा है।"
क्या हो सकता है 13 अक्टूबर को?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर्ट का फैसला क्या होगा? अगर लालू, राबड़ी और तेजस्वी दोषी करार दिए जाते हैं, तो अदालत उसी दिन या बाद में सजा का ऐलान कर सकती है। वहीं, अगर सभी बरी होते हैं, तो यह न सिर्फ लालू परिवार बल्कि आरजेडी के लिए राजनीतिक राहत की बड़ी खबर होगी-क्योंकि फैसला ठीक बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आ रहा है।
फैसले के मद्देनजर राउज एवेन्यू कोर्ट के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मीडिया और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कोर्ट परिसर में अतिरिक्त बल तैनात किया है। 13 अक्टूबर को सुबह से ही इस केस पर देशभर की निगाहें टिकी होंगी क्योंकि फैसला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि बिहार की सियासी दिशा का भी संकेत दे सकता है।
बिहार चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
बिहार में चुनावी माहौल पहले से ही गरम है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची और रणनीति तय करने में जुटे हैं। ऐसे में लालू परिवार पर आने वाला फैसला चुनावी समीकरणों को हिला सकता है। अगर कोर्ट का फैसला आरजेडी के पक्ष में जाता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा मोरल बूस्ट होगा। लेकिन अगर फैसला खिलाफ जाता है, तो इसका सीधा असर तेजस्वी यादव की चुनावी छवि पर पड़ेगा।












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