Land for Job Scam मामले में फिर फंस लालू यादव, राष्ट्रपति ने ED को दी मुकदमें चलाने की मंजूरी

Land for Job Scam: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ सकती हैं। लॉन्ड फॉर जॉब स्कैम मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ घोटाले में अभियोजन की स्वीकृति दे दी है।

यह अनुमति आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197(1) और भारतीय न्याय संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218 के तहत दी गई है।

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अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह अनुमति प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर आरोपपत्र के तहत दी गई है, जिसमें लालू प्रसाद यादव, उनके पुत्र और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तथा अन्य पारिवारिक सदस्यों को आरोपी बनाया गया है।

Land for Job Scam: क्या है लॉन्ड फॉर जॉब मामला?

यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप डी की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ।

आरोप है कि रेलवे में नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। इन जमीनों को नाम मात्र की कीमतों पर या बिना किसी उचित भुगतान के लालू यादव के परिवार के नाम ट्रांसफर कराया गया।

सीबीआई का कहना है कि ये नियुक्तियाँ किसी भी वैध प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थीं, बल्कि यह पूरी योजना "जमीन के बदले नौकरी" की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। इस मामले में सीबीआई अब तक तीन आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

Land for Job Scam में ED की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करते हुए अगस्त 2023 में एक आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें यह कहा गया था कि यह पूरा लेन-देन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आता है क्योंकि इन जमीनों का प्रयोग बाद में अघोषित संपत्तियों में बदलने और काले धन को सफेद करने के लिए किया गया।

ईडी का कहना है कि इस घोटाले में लालू यादव के परिवार के कई सदस्य-जिनमें तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और अन्य-लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं। कुछ जमीनें सीधे उनके नाम पर थीं, जबकि कुछ रिश्तेदारों या शेल कंपनियों के जरिए खरीदी गई थीं।

इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद अब अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया तेज हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इससे लालू यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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