कीर्ति आजाद ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को कहा अयोग्य, नोटबंदी पर मांगा इस्तीफा
निलंबित भाजपा नेता और सांंसद कीर्ति आजाद ने नोटबंदी के बाद लोगों की पेश आ रही मुश्किलों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना की।
दरभंगा। भाजपा के निलंबित नेता और सांसद कीर्ति आजाद ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को अयोग्य आदमी कहा और उनको डिमोनेटाइजेशन के बाद लोगों को हो रही परेशानियों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफा मांगा। वह बिहार के दरभंगा में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'अरुण जेटली की वजह से सरकार की किरकिरी हुई है। नोटबंदी के बाद लोग जिस कठिनाई से गुजर रहे हैं, उसके लिए वो जिम्मेदार हैं। वित्त मंत्री एक अयोग्य आदमी हैं और वह अर्थशास्त्री भी नहीं हैं। उनको इस्तीफा दे देना चाहिए।'

कीर्ति आजाद ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का फैसला लिया और बैंक, करोड़ों के काले धन के सफेद बनाने में लगी हुई है। भ्रष्टाचार में लिप्त ये बैंक फाइनांस मिनिस्ट्री के अंदर आते हैं। इस आधार पर वित्त मंत्री अरुण जेटली को जिम्मेवार ठहराते हुए कीर्ति आजाद ने इस्तीफे की मांग की। यह पहली बार नहीं है जब वित्त मंत्री के खिलाफ कीर्ति आजाद ने कोई बात कही है। वह उनके खिलाफ बोलते रहे हैं और इसी वजह से उनको पार्टी से सस्पेंड भी किया गया।
पूर्व क्रिकेटर ने 2015 में 13 साल तक डीडीसीए के प्रेसिडेंट रहे वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली पर अनियमितता करने के आरोप लगाए थे। इस तरह से सार्वजनिक तौर पर अरुण जेटली को टारगेट करने के लिए पार्टी चीफ अमित शाह ने 23 दिसंबर 2015 को कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित कर दिया था। दो महीने पहले भी कार्ति ने अरुण जेटली पर हमला बोलते हुए कहा था कि जिनको जनता ने चुनाव में रिजेक्ट कर दिया उनको मंत्री बनाया गया और वही सरकार व पार्टी में सर्वेसर्वा बनने बैठे हैं।
कीर्ति आजाद ने मोदी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद होनेवाली परेशानियों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी और इंतजाम नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार के नीति नियंता के पास व्यावहारिक ज्ञान नहीं है, उनके सारे मूल्यांकन वास्तविकता से बहुत दूर हैं। कीर्ति ने सवाल उठाया कि छापे मारकर जो काले धन अब पकड़े जा रहे हैं, वैसा कदम वित्त मंत्रालय ने पहले क्यों नहीं उठाया? उन्होंने कैशलेस ट्रांजेक्शन की सफलता पर भी शंका जताई और कहा कि ई पेमेंट शत प्रतिशत सेफ और सिक्योर नहीं है इसलिए प्रमोशन के बावजूद इस योजना का सफल होना मुश्किल है। नोटबंदी से किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों, ज्वैलर्स समेत अनेक लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए है, यहां तक कि सब्जी विक्रेताओं तक को सही दाम नहीं मिल रहे।












Click it and Unblock the Notifications