Bihar Politics: JDU के विवादित विधायक Gopal Mandal के 5 विवाद, जिन्होंने सोशल मीडिया पर बटोरीं खूब सुर्खियां
Bihar Politics, MLA Gopal Mandal Viral Vivad: वो नाम, जो कभी अपने बयानों से तो कभी अपने बर्ताव से, राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन जाता है। जदयू के पूर्व विधायक और अब राजनीतिक रूप से "फ्री एजेंट" कहे जाने वाले गोपाल मंडल की कहानी उतनी ही रोचक है, जितनी विवादों से भरी।
ट्रेन में 'अंडरगारमेंट' विवाद, सबसे पहला वायरल किस्सा
गोपाल मंडल को चर्चा में लाने वाली पहली बड़ी घटना वह थी जब वे ट्रेन के एसी कोच में केवल बनियान और अंडरगारमेंट्स में घूमते हुए दिखे। यात्रियों ने वीडियो बना लिया और वह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया।

इस घटना के बाद पूरे देश में उनकी छवि 'अलग तरह के नेता' के रूप में उभरी। मंडल ने सफाई दी "मुझे पेट में तकलीफ़ थी, इसलिए बाथरूम जा रहा था।" लेकिन तब तक मीडिया में उन्हें "अंडरवियर वाले विधायक" का तमगा मिल चुका था।
पिस्तौल लहराने का वीडियो - कानून और राजनीति दोनों में हलचल
इस विवाद के कुछ समय बाद एक और वीडियो सामने आया, जिसमें गोपाल मंडल हाथ में पिस्तौल लिए अस्पताल परिसर में घूमते दिखे। पत्रकारों ने जब सवाल किए, तो उन्होंने गुस्से में अपशब्द कह दिए।इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाया, "क्या यही सुशासन है?" हालाँकि मंडल ने कहा कि उन्होंने किसी को धमकाया नहीं, बल्कि "अपनी सुरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार" रखा था।
शिक्षक से विवाद और FIR - धमकी का नया आरोप
फरवरी 2025 में दरभंगा जिले में एक शिक्षक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि गोपाल मंडल और उनके सहयोगियों ने उसे घर खाली करने का दबाव बनाया और धमकी दी। पुलिस ने FIR दर्ज की, और मामला फिर से मीडिया में छा गया। यह घटना उनकी छवि पर नया दाग लेकर आई - राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत टकराव का मिला-जुला मामला।
'डांस प्रोग्राम' का क्लिप - विपक्ष का नया हथियार
एक पुराने कार्यक्रम का वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें मंडल को नृत्य कार्यक्रम के दौरान मंच पर डांसर के गाल पर नोट लगाते हुए दिखाया गया। वीडियो वायरल होते ही विपक्ष ने इसे "नीतीश कुमार की पार्टी का असली चेहरा" बताकर निशाना साधा। जदयू को एक बार फिर सफाई देनी पड़ी कि "व्यक्तिगत व्यवहार को पार्टी की नीति से न जोड़ा जाए।"
समर्थक बनाम आलोचक - 'बिंदास' या 'बेख़ौफ़'?
गोपाल मंडल का समर्थन करने वाले लोग उन्हें "साफगोई और बिंदास स्वभाव" के लिए पसंद करते हैं। उनका कहना है कि मंडल "जनता के बीच से उठे नेता हैं, जो दिखावा नहीं करते।" वहीं आलोचक मानते हैं कि "उनकी बेबाकी अब गुंडागर्दी की सीमा छू चुकी है।" यानी मंडल की राजनीति अब सिर्फ वोट बैंक की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।
विवादों में लिपटा करिश्माई नेता
गोपाल मंडल का राजनीतिक सफर एक "रोलरकोस्टर राइड" की तरह रहा है। जहाँ लोकप्रियता और विवाद दोनों साथ चलते हैं। वो बिहार के उन नेताओं में से हैं जो जितना बोलते हैं, उतना सुर्खियाँ बटोरते हैं। 2025 के चुनाव से पहले उनका हर बयान, हर कदम, बिहार की सियासत में नए समीकरण बना सकता है।












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