क्या भ्रष्टाचार से समझौता कर रहे हैं 'सुशासन बाबू'! हटाये जा रहे आर्थिक अपराध शाखा से अधिकारी

Bihar News: बिहार में जहां चुनावी चर्चा तेज़ है, वहीं अब तबादलों को लेकर भी नई बहस छिड़ गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि जब बिहार में NDA गठबंधन की सरकार थी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टोलरेंस की नीति अपनाए हुए थे। अब महागठबंधन की सरकार में CM Nitish Kumar का नज़रिया बदल गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अभियान में आर्थिक अपराध इकाई अहम किरदार में था, लेकिन अब अधिकारियों पर राजनीतिक दवाब बनाया जा रहा है। 2021-2022 में जांच एजेंसी ने दिग्गज़ों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी, वैसी कार्रवाई अब नहीं हो रही है।

Is CM Nitish Kumar compromising with corruption?

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही आर्थिक अपराध इकाई की ताक़त को कम करने पर तुल गए हैं। जहां जांच एजेंसी में ज्यादा से ज्यादा अधिकारियों को ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए थी, वहीं EOU के अधिकारियों को हटाकर विभाग की नींव को ही कमज़ोर किया जा रहा है।

आंकड़ों की बात की जाए तो 'नीतीश सरकार' ने मई से लेकर आज तक आर्थिक अपराध इकाई से 6 DSP हटाये हैं। 13 सितंबर को पहली अधिसूचना जारी हुई, जिसमें EOU से 2 DSP हटाये गए। बुधवार की शाम में जारी हुई DSP ट्रांसफर की दूसरी सूची में आर्थिक अपराध इकाई में दो DSP लगाए गए।

आर्थिक अपराध अधिकारी के तौर पर पदस्थापित दो पुलिस अधिकारियों में कुमार वीर धीरेंद्र (बेगूसराय के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी) को पुलिस उपाधीक्षक की ज़िम्मेदारी दी गई। वहीं कुमार इंद्र प्रकाश (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सुपौल) को भी आर्थिक अपराध इकाई में बतौर डीएसपी पोस्टिंग दी गई।

13 सिंतबर को गृह विभाग की तरफ़ से जारी ट्रासफ़र-पोस्टिंग की पहली लिस्ट में कुल 33 DSP का तबादला हुआ। वहीं आर्थिक अपराध इकाई में पोस्टेड दो डीएसपी का भी तबादला करते हुए SDPO की ज़िम्मेदारी दी गई। दिलीप कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, EOU) को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सासाराम की ज़िम्मेदारी दी गई। वहीं नवल किशोर (आर्थिक अपराध इकाई) को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सोनपुर की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।

ग़ौरतलब है कि गृह विभाग की तरफ से जारी दो दो अधिसूचना में आर्थिक अपराध इकाई में पोस्टेड 3 डीएसपी विभाग से हटाया गया, लेकिन उनकी जगह पर किसी दूसरे को ज़िम्मेदारी नहीं दी गई। अगर आंकड़ों की बात की जाए को मई से लेकर 13 सिंतबर तक आर्थिक अपराध इकाइ से 6 डीएसपी हटाए गए, लेकिन विभाग को सिर्फ 1 DSP मिला।

6 अगस्त को गृह विभाग ने 5 DSP का तबादला किया था, उस दौरान भी आर्थिक अपराध इकाई से पुलिस उपाधीक्षक प्रीतम कुमार का ट्रांसफर कर पालीगंज अनुमंडल का SDPO की ज़िम्मेदारी मिली थी। इससे पहले 24 मई आर्थिक अपराध विभाग से 3 डीएसपी को हटाए गए थे। 3 की जगह पर EOU में सिर्फ एक नए DSP को लगाया गया था। उस दौराना आर्थिक अपराध इकाई से कौशल किशोर कमल का तबादला कर पुलिस उपाधीक्षक यातायात पूर्णिया की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

राज किशोर कुमार को EOU से हटाकर पुलिस उपाधीक्षक यातायात दरभंगा की ज़िम्मेदारी दी गई थी। वहीं EOU डीएसपी मुकेश कुमार ठाकुर का तबादला कर पमहानिरीक्षक कार्यालय बेगूसराय की ज़िम्मेदारी दी गई थी। आपको बता दें, आर्थिक अपराध इकाई या निगरानी ब्यूरो (EOU) की तरफ़ से ही आय से अधिक संपत्ति मामले नें जांच के लिए डीएसपी ही नियुक्त किए जाते हैं।

DSP रैंक से नीचे के अधिकारी DA मामले में जांच अधिकारी नहीं बनाए जाते हैं। अब यह तो सभी लोग जानते हैं कि जांच एजेंसियों के DSP की तादाद कम होगी तो, भ्रष्टाचारी अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कैसे कसा जा सकेगा। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर नीतीश कुमार की कार्यशैली पर जनता ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

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