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Government School: 1 भवन, 3 रूम और 5 स्कूलों का संचालन, शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति!

Government School: बिहार के विभिन्न ज़िलों की बात तो छोड़िए बिहार की राजधानी पटना के कन्या मध्य विद्यालय करबिगहिया (मीठापुर) का नज़ारा आप देख लेंगे तो खुद ही कहेंगे शिक्षा के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति हो रही है।

Government School : बिहार में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे तो ज़रूर होते हैं लेकिन ज़मीन पर हक़ीक़क कुछ औऱ ही है। बिहार के कई ज़िलों में स्कूल के पास बिल्डिंग नहीं है, झोपड़ी में स्कूल का संचालन हो रहा है, तो कहीं बिल्डिंग है तो जर्जर होने की कगार पर है। जहां बिल्डिंग के हालात ठीक हैं तो वहां एक साथ कई स्कूलों का संचालन हो रहा है। इतनी ही नहीं लचर शिक्षा व्यवस्था का ये आलम है कि एक ही क्लास रूम में तीन अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को तालीम दी जाती है।

शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति!

शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति!

बिहार के विभिन्न ज़िलों की बात तो छोड़िए बिहार की राजधानी पटना के कन्या मध्य विद्यालय करबिगहिया (मीठापुर) का नज़ारा आप देख लेंगे तो खुद ही कहेंगे शिक्षा के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति हो रही है। विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है, कुर्सियां, बेंच, डेस्क सड़ रहे हैं। विभिन्न कक्षा में रखी हुए लकड़ी की अलमारी सड़ रही है। बिल्डिंग की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि भवन पर घास उग चुके हैं। बच्चियों के लिए शौचालय तो है लेकिन ताला लगा हुआ रहता है। स्कूल में पढ़ाई 12 बजे के बाद शुरू होती है।

1 भवन में 5 स्कूलों का संचालन

1 भवन में 5 स्कूलों का संचालन

कन्या मध्य विद्यालय करबिगहिया में शिक्षकों के नाम पर सिर्फ प्रधानाध्यापक धनंजय कुमार की होते हैं जो बच्चों को पढ़ाते हैं। इस तीन कमरे के भवन में पांच स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इस स्कूल के भवन में प्राथमिक विद्यालय जयप्रकाश नगर, प्राथमिक विद्यालय चांदपुर बेला, न्यू सिन्हा मॉर्डन मध्य विद्यालय पुरनदरपुर, बालक मध्य विद्यालय करबिगहिया और कन्या मध्य विद्यालय के बच्चे पढ़ते हैं। ग़ौरतलब है कि एक भवन में तीन क्लास रूम उसमें पांच स्कूलों का संचालन। इसके बावजूद स्कूल में छात्रों की मौजूदगी ना के बराबर है।

2 शिफ्टों में पांच स्कूलों का संचालन

2 शिफ्टों में पांच स्कूलों का संचालन

कन्या मध्य विद्यालय में 2 शिफ्टों में पांच स्कूलों का संचालन होता है लेकिन दोनों शिफ्टों में बच्चे नदारद रहते हैं। वहीं पांचों स्कूल के बच्चो के लिए मिड डे मील भी बनता है। एक छात्र ने बताया कि जो भी बच्चे स्कूल आते हैं वह खिचड़ी खाकर वापस चले जाते हैं। पढ़ने के लिए स्कूल में कोई नहीं रुकता है। यह तो हुई बिहार की राजधानी पटना की बात। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा के जिले का भी हाल सुन लीजिए जो कि पिछले दिनों काफी चर्चा का विषय रहा था।

शिक्षक की ज्यादती का वीडियो वायरल

शिक्षक की ज्यादती का वीडियो वायरल

राजगीर अनुमंडलीय क्षेत्र गोवडीहा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों द्वारा बच्चों से पंखा झलवाने और और पैर दबवाने का मामला सामने आया था। एक बच्चे ने अपने परिजन से इस बात की शिकायत की थी। शिक्षक का छात्रों के साथ ज्यादती करने वाला वीडियो बना कर किसी ने सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरक़त में आया और जांच के आदेश भी जारी कर दिए थे। वायरल वीडियो पर ज़िला शिक्षा पदाधिकारी केशव प्रसाद ने कहा था कि मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

झोपड़ीनुमा भवन में स्कूल संचालित

झोपड़ीनुमा भवन में स्कूल संचालित

नालंदा के बेन प्रखंड से भी बदहाल शिक्षा व्यवस्था की खबर सामन आई थी। बुल्ला बीघा गांव में बीते 8 वर्षों से फूस से बने झोपड़ीनुमा भवन में स्कूल संचालित किया जा रहा है। गौरतलब है कि बिहार के मुखिया नीतीश कुमार का गृह ज़िला होने के साथ ही बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का यह गृह प्रखंड है। यही वजह है कि यहां की शिक्षा व्यवस्था का हाल अब सुर्खियों में बन गया है। राजकीय प्राथमिक स्कूल के भवन के लिए जमीन आवंटित की जा चुकी है। लेकिन अभी तक स्कूल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है।

स्कूल में नहीं है शौचलय की व्यवस्था

स्कूल में नहीं है शौचलय की व्यवस्था

स्कूल भवन नहीं होने के बावजूद छात्र झोपड़ी से बने स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आ रहे हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो इस स्कूल में लगभग 70 से भी ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन जगह की कमी होने से बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का ये आलम है कि बच्चे पानी पीने के लिए गांव के चापाकल का इस्तेमाल करते हैं वही शौचालय के लिए खेत में जाते हैं। झोपड़ी में पढ़ाई होने की वजह से बारिश के दिनों में बच्चों का काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

बिहार के मुख्यमंत्री का गृह जिला और ग्रामीण विकास मंत्री का गृह प्रखंड होने के बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। सरकार के बेरुखी का नतीजा है कि बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। मीडिया में बात आने के बाद आनन-फानन में जिला शिक्षा पदाधिकारी केशव प्रसाद के द्वारा शिफ्टिंग का लेटर जारी कर दिया गया। पत्र में जानाकारी दी गई कि नव प्राथमिक विद्यालय बुल्ला विगहा का अपना भवन नहीं रहने के कारण अब अगले आदेश तक इसे उत्क्रमित मध्य विद्यालय अमिया में शिफ्ट किया जाता है। अब यहां पठन पाठन किया जाएगा। पूरे विश्व में ज्ञान देने के लिए जानी जाने वाली नालंदा की धरती आज खुद झोपड़ी से शिक्षा ग्रहण करवाने पर मजबूर है।

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