लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम की तर्ज़ पर पटना में पहला BMW तैयार, नामचीन हस्तियों के लगेंगे मोम के स्टैच्यू
आपको जानकर यह खुशी होगी की अब बिहार की राजधानी में पटना में भी बिहार म्यूजियम ऑफ वैक्स (बीएसडब्ल्यू) के निर्माण की क़वायद तेज़ हो चुकी है।
पटना, 5 मई 2022। बिहार में इन दिनों पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार नए-नए प्रयोग कर रही है। टाइगर रिज़र्व, साइक्लोपीयन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की तैयारी, ग्लास ब्रिज और जू सफारी के बाद राजगीर में 8.7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड बनाने के फैसले के बाद अब पटना में बिहार म्यूजियम ऑफ वैक्स की शुरूआत की जा रही है। ग़ौरतलब है कि यह वैक्स म्यूज़ियम बिहार का पहला ऐसा म्यूज़ियम होगा जहां नामचीन हस्तियों की हुबहू आदम कद प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। आपको बता दें कि लंदन के मैडम तुसाद म्यूज़ियम की तर्ज़ पर यहां भी वैक्स की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी।

नामचीन हस्तियों की लगेंगी मूर्तियां
लंडन स्थित मैडम तुसाद म्यूज़ियम में कई भारतीय हस्तियों की हूबहू वैक्स की मूर्तियां लगने की ख़बरें आपने पढ़ी होंगी। आपको जानकर यह खुशी होगी की अब बिहार की राजधानी में पटना में भी बिहार म्यूजियम ऑफ वैक्स (बीएसडब्ल्यू) के निर्माण की क़वायद तेज़ हो चुकी है। न्यू पुलिस लाइन के पास बन रहा वैक्स म्यूज़ियम लगभग तैयार हो चुका है। बिहार के इस वैक्स म्यूज़ियम में कई नामचीन हस्तियों की मुर्तियां लगाई जाएंगी। मिली जानकारी के मुताबिक इस महीने की 16 तारीख़ को म्यूज़ियम का उद्घाटन किया जा सकता है।

लंदन के म्यूज़ियम की तर्ज़ पर हो रहा निर्माण
पटना में अंबुजा नियोतिया मॉल में इस म्यूज़ियम को बनाया जा रहा है। फिलहाल मॉल में अभी निर्माण कार्य जारी है। इतिहासकारों की मानें तो बिहार से कई नामचीन हस्तियों का ताल्लुक रहा है, इस म्यूज़ियम के निर्माण से बिहार की दिग्गज हस्तियों के बारे में युवा पीढ़ी जान पाएंगे। इसके साथ ही पूरे देश के लोगों की दिलचस्पी इस मियूज़ियम को लेकर बढ़ेगी क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय मैडम तुसाद म्यूज़ियम (लंदन) की तर्ज़ पर बीएमडब्ल्यू का निर्माण किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 16 मई से आम लोगों के लिए यह म्यूज़ियम खोल दिया जाएगा।

साइक्लोपीयन वॉल को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान
नालंदा जिले के राजगीर स्थित साइक्लोपीयन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की तैयारी की जी रही है। बिहार सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को एक प्रस्ताव भेजा है। जिसमें साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने की मांग की गई है। आपको बता दें कि यह वॉल राजगीर में 2,500 सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है। ग़ौरतलब है कि साइक्लोपियन दीवार पत्थर की 40 किलोमीटर लंबी है। बुज़ुर्गों की मानें तो साइक्लोपियन दीवार को तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहले बनाया गया था। ताकि बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से लोगों को बचाया जा सके। दीपक आनंद ने (निदेशक, पुरातत्व निदेशालय ) कहा कि साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने की पूरी कोशिश की जा रही है। साइक्लोपीन दीवार के ऐतिहासिक महत्व और विशेषताओं पर ज़ोर देते हुए एएसआई को एक नया प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में साइक्लोपियन चिनाई के सबसे पुराने दीवारों में से एक है। इसलिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में इसे शामिल किया जाना चाहिए।
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