Dog Babu Certificate:RTPS सिस्टम का कुत्ते वाला मज़ाक बना गंभीर अपराध,‘डॉग बाबू’ केस में इन लोगों पर गिरी गाज
'Dog Babu' Certificate News Update: बिहार के मसौढ़ी से सामने आए "डॉग बाबू" आवासीय प्रमाण-पत्र प्रकरण ने जहां सरकारी व्यवस्था का मज़ाक बना दिया था, वहीं अब इस पर प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। शुरुआती हंसी-मज़ाक और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला अब गंभीर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट उल्लंघन की शक्ल ले चुका है।
जाँच में दोषी पाए गए अधिकारी और कर्मचारी पर कार्रवाई हो चुकी है, जबकि फर्जी आधार कार्ड लगाने वाले आवेदक के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है। मामला सामने आने के बाद मसौढ़ी अनुमंडल पदाधिकारी को जांच का निर्देश दिया गया था। जांच रिपोर्ट अब प्रशासन को मिल चुकी है।

महिला के आधार कार्ड का दुरुपयोग:
रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि एक दिल्ली निवासी महिला के आधार कार्ड का दुरुपयोग करते हुए किसी अज्ञात व्यक्ति ने ''डॉग बाबू'' के नाम से आवेदन दायर किया था। आवेदन में मां का नाम 'कुतिया बाबू' और पिता का नाम 'कुत्ता बाबू' दर्ज था, और फोटो में एक कुत्ते की तस्वीर भी लगी थी।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस फर्जी दस्तावेज़ पर राजस्व अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद थे, जिससे इसकी असलियत साबित होती है।
प्रशासनिक कार्रवाई:
राजस्व पदाधिकारी ने बिना किसी विस्तृत सत्यापन के फर्जी साक्ष्यों के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी कर दिया। अब उनके खिलाफ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से निलंबन की अनुशंसा कर दी गई है। आईटी सहायक, जिसने बिना जांच के इस आवेदन को आरओ लॉगिन पर अग्रसारित किया, उसे तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है।
फर्जी दस्तावेज़ लगाकर आवेदन देने वाले आवेदक पर भी FIR दर्ज की गई है और पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।साथ ही, फर्जी प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया है।
प्रशासन की चेतावनी:
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह की हरकतें केवल मज़ाक नहीं, बल्कि विधिक अपराध हैं। ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति सिस्टम के साथ ऐसा खिलवाड़ न कर सके।
सोशल मीडिया पर अब बदला सुर:
जहां पहले "डॉग बाबू" को लेकर मीम्स और व्यंग्य वायरल हो रहे थे, अब लोग पूछ रहे हैं - "क्या हमारी डिजिटल सेवाएं इतनी असुरक्षित हैं कि कोई भी मज़ाक में भी प्रमाणपत्र बनवा सकता है?" कई यूज़र्स ने कहा कि अब RTPS को मज़ाक से निकालकर सुधार की दिशा में कड़ा कदम उठाना होगा।
"डॉग बाबू" जैसा मामला सिर्फ हास्यास्पद नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की कमजोर कड़ी को उजागर करने वाला उदाहरण बन गया है। इस घटना से सीख लेते हुए प्रशासन ने कार्रवाई का जो सिलसिला शुरू किया है, वो आने वाले समय में डिजिटल धोखाधड़ी पर नकेल कसने का संकेत है।












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