बिहार: 2005 के बाद पहली बार 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही लोजपा, 2015 में थे 42 प्रत्याशी
पटना। बिहार के विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) न तो एनडीए में रहकर जोर-आजमाइश कर रही है और न ही महागठबंधन के साथ है। वर्ष 2005 के बाद इस बार पहला मौका है जब यह पार्टी 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। पिछले चुनाव में लोजपा 42 सीटों पर और उससे भी पिछले चुनाव यानी कि वर्ष 2010 में 75 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।
2020 के विधानसभा चुनाव के लिए लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने ऐलान किया था कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। जिसके लिए उन्होंने 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी की। हालांकि, अभी वह कितने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी, ये अभी तय नहीं हुआ। इतना जरूर साफ हो गया है कि पार्टी इस बार 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जिसके लिए पार्टी को प्रत्याशियों के चयन को लेकर इन दिनों काफी मंथन चल रहा है।
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लोजपा ने पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन सूची दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर को प्रत्याशियों के नाम जारी किए थे। जिसके अनुसार पहले चरण में उसके 42 उम्मीदवार मैदान में हैं। अब ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने में उसे कितनी सफलता मिलेगी यह तो चुनाव परिणाम से ही पता चलेगा। वैसे पिछला रिकॉर्ड देखा जाए तो अकले लड़कर ही लोजपा ज्यादा सीटें जीती थी।
वर्ष 2000 में पार्टी के गठन के बाद राम विलास पासवान की अगुवाई में यह पहली बार फरवरी 2005 में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ी थी। उस चुनाव में लोजपा का किसी दल से गठबंधन नहीं था, पर कांग्रेस से उसका तालमेल जरूर था। तब 178 सीटों में से वह 29 सीटें जीती। उसके बाद इतनी सीटें लोजपा को अब-तक प्राप्त नहीं हुईं।

वर्ष 2010 में लोजपा का राजद से गठबंधन था, जिसमें उसे 75 सीटें मिलीं। इस चुनाव में लोजपा के 3 उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंचे सके थे। वहीं, 2015 में एनडीए के साथ लोजपा थी और वह 42 सीटों पर लड़ी, जिसमें उसे 2 पर ही जीत मिली। वहीं, उससे पहले 2005 अक्टूबर-नवंबर में हुए चुनाव की बात करें तो लोजपा को 10 सीटों पर सफलता मिली थी। तब वह 203 सीटों पर उम्मीदवार उतारी थी।












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