Hajipur News: ‘13 जून 2021 कि वह रात, जब मेरे पैरों तले से जमीन खींच ली गई’, भावुक हुए चिराग ने बयां किया दर्द

Chirag Paswan Nomination Hajipur: लोजपा (र) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आज अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने के बाद हाजीपुर के मतदाताओं से रूबरू होते हुए चिराग पासवान ने कहा कि नेता नहीं बल्कि हाजीपुर का बेटा बनकर आपकी सेवा करूंगा।

परिवार और पार्टी के टूटने के बाद हाजीपुर की जनता ने ही मुझे हिम्मत दी है। जिसका मैं शूक्रगुजार हूं। आज मैं जो कुछ भी हूं आप लोगों के आशीर्वाद से ही हूं। चिराग पासवान ने कहा कि आज तक हाजीपुर अपने पिता के साथ ही आया हूं। पिता के साथ ही अपना नामांकन करने गया था।

Chirag Paswan Filled Nomination At Hajipur Lok Sabha Seat Tell Voters about rambilas paswan history

पिता जी की तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद वह अपनी फिक्र किये बग़ैर मेरे साथ चलते थे। आज पहली बार अपने पिता की गैरहाजिरी में आपके साथ हूं, उनके साथ हाजीपुर आता था तो यही नारा लगता था कि हाजीपुर का सांसद कैसा हो रामविलास पासवान जैसा हो।

आज जब अपना नाम सुनता हूं तो एक अलग एहसास होता है, और साथ-साथ एक साथ कई जिम्मेदारियों को महसूस करता हूं। आज पिता जी इस दुनिया में नहीं होते हुए भी मेरे साथ हैं। भले ही आज मैंने नामांकन किया लेकिन मुझे अभी भी वही शक्ति देते हैं। मैं उनके अधूरे सपनों को पूरा कर सकूं यही सोचकर मैं हाजीपुर आया हूं।

हाजीपुर का नेता नहीं बल्कि हाजीपुर का बेटा बनकर आया हूं। जब राजनीतिक का रा मुझे समझ में नहीं आता था। हाजीपुर के लोगों से वह परिचय कराते थे, मेरे पास कोई जवाब नहीं है। हाजीपुर में आप लोगो का मैं बेटा था आप लोगों का भाई था। वही रिश्ता आज भी बनाने आया हूं।

मेरे पिता के सब जानने वाले लोगों को साथ लेकर हाजीपुर बनाने के संकल्प के साथ हाजीपुर निकला हूं। हाजीपुर की वजह से अगर कोई किसी को पहचानता है, तो वे लोग मेरे नेता को जानते हैं। आप लोगो के अपार आशीर्वाद से आप लोगो के द्वारा उनका नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉड में दर्ज किया गया।

अपने जीवन की अंतिम सांस तक कैसे आप लोगों के सपने को पूरा कर सके आप लोगों की उम्मीद पर खड़ा उतर सकूं। अपने जीवन के अंतिम दिनों तक भी उनको इसी बात की चिंता रहती थी। इसीलिए यह मेरा उत्तरदायित्व हैं। मैं उस विरासत को संभालू। कई लोगों ने कई तरीके की राजनीतिक लड़ाई लड़ी। कई तरीके के एक लंबा संघर्ष पिछले 3 सालों में मैं झेल कर आया हूं।

पिछले ढाई तीन सालों में व्यक्तिगत तौर पर राजनीतिक तौर पर कई उतार-चढ़ाव मैंने मेरे परिवार ने देखें पर उतार चढ़ाव में एक चीज जो हमेशा स्थाई रूप से रही वह आप लोगों का साथ था, आप लोगों का प्यार था, आप लोगों का आशीर्वाद था।

मुझे याद है वो दिन जब मेरे साथ मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी घटना घटी। जब मेरा परिवार टूटा, मेरी पार्टी टूटी 13 जून 2021 कि वह रात थी जब रातों-रात मेरे पैरों तले जमीन खींच ली गई थी। जब मुझे नहीं पता था कि मेरे भविष्य में क्या है। मैं यह तक भी नहीं जानता था कि आने वाले दिनों में मेरा कोई राजनीतिक वजूद बचेगा।

मुझसे जिस तरीके से सब कुछ छीन लिया गया था, मेरी पार्टी, मेरा मेरे तमाम सांसद, मेरा परिवार, मेरी पार्टी का वह चुनाव चिन्ह, जो मेरे पिता ने बहुत मेहनत से संजोकर उसको आगे बढ़ाने का काम किया था। जिस घर में मैं 34 साल से रहता था रातों-रात उस घर तक को हम लोगों को खाली करना पड़ा।

यह तमाम परिस्थितियों से जूझते हुए जब मैं पटना सबसे पहली बार आया, तो सीधा यहां हाजीपुर आया और उसके बाद जिस तरीके से आपने मुझे पिता की कमी महसूस नहीं होने दी, ना मुझे मेरी परिवार की कमी आप लोगों ने महसूस होने दी यह आप लोगो के साथ मेरा परिवारिक रिश्ता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+