मोदी कैबिनेट छोड़ विधानसभा चुनाव लड़ेंगे चिराग पासवान, जानिए किस सीट से आजमाएंगे किस्मत?
Chirag Paswan Contests Bihar Assembly Election 2025: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बड़ा ऐलान करते हुए बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। रविवार ( 8 मई) को आरा (भोजपुर) में एक रैली के दौरान कहा कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव वे जरूर लड़ेंगे।
रैली में उन्होंने एलान करते हुए कहा, मैं बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ूंगा। लेकिन सिर्फ बिहार में नहीं, बल्कि बिहार के लिए और बिहार की जनता के लिए लड़ूंगा। मैं रामविलास पासवान का बेटा हूं। मैं अपने पिता के सपनों को साकार करूंगा और 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के अपने पुराने नारे को फिर से जीवंत करूंगा।'

किस सीट से लड़ेंगे चुनाव
चिराग पासवान ने आगे कहा कि, 'जो लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं किस सीट से चुनाव लड़ूंगा, उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और मैं खुद एनडीए उम्मीदवारों को जिताने और एनडीए गठबंधन को मजबूत करने के लिए सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। मेरा गठबंधन सिर्फ बिहार की जनता के साथ है और मेरा लक्ष्य है कि एनडीए बिहार में प्रचंड जीत की ओर बढ़े।'
कांग्रेस पार्टी पर साधा निशाना
चिराग पासवान ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि, 'जिस 'जंगल राज' की बात होती है, वो सिर्फ RJD की वजह से नहीं है, उसमें कांग्रेस भी बराबर की जिम्मेदार है। हमारी सरकार ने ही भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को दिया है।'
2020 में अकेले लड़े थे चुनाव
साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने पारंपरिक राजनीति से हटकर एक अलग राह चुनी। उन्होंने अपनी पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी), को औपचारिक रूप से एनडीए से अलग कर लिया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन जारी रखा। चिराग ने "बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट" का नारा देते हुए खुद को राज्य में परिवर्तन और युवा नेतृत्व का प्रतीक बताया। इस रणनीति के तहत एलजेपी ने करीब 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन चुनावी नतीजे निराशाजनक रहे। पार्टी केवल एक सीट पर जीत दर्ज कर सकी। विडंबना यह रही कि विजयी विधायक ने बाद में पार्टी का साथ भी छोड़ दिया। दिलचस्प यह था कि चिराग ने खुद कोई सीट से चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनका पूरा चुनावी अभियान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ केंद्रित रहा। एलजेपी के उम्मीदवारों ने जेडीयू के परंपरागत वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की, जिसका असर यह हुआ कि नीतीश कुमार की पार्टी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।












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