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‘ग्रेजुएट चायवाली’ के बाद चर्चा में ‘चटकधाम’ टी स्टॉल, जानिए क्या है पूरा मामला ?

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पटना, 12 मई 2022। पूर्णिया की रहने वाली प्रियंका गुप्ता (ग्रेजुएट चायवाली) के बाद अब पूर्णिया के चटकधाम टी स्टॉल की चर्चा शुरू हो गई है। उपान्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु सरज़मीन कहे जाने वाले पूर्णिया में चाय की दुकान पर कवियों की महफिल सज रही है। शनिवार और रविवार को चटकधाम टी स्टॉल पर अनोखा नज़ारा देखने को मिलता है। ग़ौरतलब है कि इस चटकधाम टी स्टॉल को चलाने वाले राम रक्षा चौधरी भी ग्रैज्युएट हैं। शायरों और साहित्याकारों की महफिल में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

    Patna: Graduate Chaiwali प्रियंका गुप्ता से Exclusive बातचीत, | वनइंडिया हिंदी
    साहित्य को नई पहचान दिलवाने की कोशिश

    साहित्य को नई पहचान दिलवाने की कोशिश

    चटकधाम टी स्टॉल पर कवियों की महफिल के बारे में जब स्थानीय लोगों से बात की तो वह कहते हैं कि चाय की दुकान से साहित्य को नई पहचान दिलवाने की कोशिश की जा रही है। आज कल के युवा और नए कवियों को यहां से प्रेरणा भी मिल रही है। शनिवार और रविवार की शाम को शायरों और उपान्यासकारों की महफिल में नज़्म सुनाने के कौ दौर के साथ-साथ कभी अलग-अलग साहित्यकारों की नई किताब का विमोचन भी हो जाता है। सन 1990 से यहां कवियों की चौपल लगते रही है। चौपाल की शोभा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कई नामचीन साहित्यकार भी बढ़ाते रहे हैं।

    पूर्णिया के रजनी चौक पर है चाय की दुकान

    पूर्णिया के रजनी चौक पर है चाय की दुकान

    पूर्णिया के रजनी चौक पर राम रक्षा चौधरी का चटकधाम टी स्टॉल है। कवियों की महफिल में बैठने वाले लोगों की मानें तो साहित्यिक गलियारों के लिए यह दुकान किसी मंदिर से कम नहीं है। चटकधाम टी स्टॉल की महफिल में शामिल रहे कई साहित्यकार आज एक अलग मुकाम पर पहुंच चुके हैं और अपनी लेखनी से एक अलग पहचान बना रहे हैं।

    पहले थी मामू की चाय दुकान

    पहले थी मामू की चाय दुकान

    पूर्णिया के रजनी चौक पर काफी सालों से साहित्यकारों की महफिल जमती रही है। सन 1990 के करीब दिनेश प्रसाद चौधरी उर्फ मामू की चाय दुकान से इसकी शुरुआत हुई थी। दिनेश प्रसाद चौधरी के निधन के बाद प्रवीण कुमार की चाय दुकान पर साहित्यकारों की महफिल लगती थी। इसके बाद अर्थशास्त्र से ग्रैज्युएट राम रक्षा चौधरी ने दुकान की कमान संभाली और फिर सभी लोगों की रायशुमारी से महफिल को चटकधाम का नाम दिया गया, जिसके बाद से यह चटकधाम टी स्टॉल हो गया। हर सप्ताह शनिवार और रविवार को साहित्यकारों की महफिल जमने लगी जिसका सिलसिला आज तक जारी है।

    चटकधाम ही नाम क्यों रखा गया ?

    चटकधाम ही नाम क्यों रखा गया ?

    साहित्यकारों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के गांवों में चटकधाम लफ़्ज़ का खूब इस्तेमाल होता है, इसका सही मतलब गप्पशाला है। इसलिए स्थानीय साहित्यकारों के द्वारा लगाई जा रही चौपाल को चटकधाम नाम दे दिया गया। इस महफिल का मकसद एक प्राचीन धारा को नया स्वरूप देना है। साहित्यकार भरत यायावर, देवेंद्र देवेश(साहित्य अकादमी), चंद्रकिशोर जयसवाल, अरुण अभिषेक, चंद्रकांत राय, मदन मोहन मर्मज्ञ, कलाधर जैसी नामचीन साहित्यकार इस महफिल में शिरकत कर चुके हैं। एक पत्र में हंस के संपादक राजेंद्र यादव ने इस महफिल की खूब तारीफ़ की थी।

    सप्ताह में दो दिन सजती है साहित्यकारों की महफिल

    सप्ताह में दो दिन सजती है साहित्यकारों की महफिल

    शनिवार और रविवार को शाम में तय वक़्त में करीब 24 से भी ज्यादा साहित्कारों की महफिल जमती है। सभी के बैठने का इतेज़ाम चटकधाम टी स्टॉल के मालिक राम रक्षा चौधरी बड़े ही शौक से करते हैं। ग़ौरतलब है कि साहित्यकारों की महफिल जमाने का सबसे अहम मक़सद है कि वह नए साहित्यकारों को सही मार्गदर्शन दे सकें। यही वजह है कि सालों से यहां महफिल सजाई जाती रही है। साहित्कारों का मानना है कि रेणु की सरजमीन से एक बार फिर साहित्यिक चलन जारी रहे, इसलिए वह लोग लगातार महफिल सजाकर इस प्रथा को आगे बढाने की कोशिश कर रहे हैं।

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    English summary
    Chattakdham tea stall in discussion after graduate chaiwali priyanka gupta
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