बिहार में कोरोना फैलने को लेकर केंद्रीय टीम ने नीतीश सरकार को किया सावधान, दी टेस्टिंग बढ़ाने की सलाह

पटना। बिहार में तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस के हालात के बारे में नीतीश सरकार को केंद्रीय टीम ने आगाह किया है। हाल में पटना और गया का दौरा करने के बाद केंद्रीय टीम ने नीतीश सरकार को सावधान करते हुए कहा है कि देश मे हो रही औसत टेस्टिंग के मुकाबले प्रदेश में बहुत कम कोरोना टेस्टिंग हो रही हैं जिससे संक्रमण और तेजी से फैल सकता है। मरीजों में संक्रमण के देर से पता चलने पर होने वाली मौतों के आंकड़े (CFR) भी बढ़ सकते हैं।

Central team told Nitish govt to increase testing of coronavirus

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    बिहार में प्रति दस लाख की आबादी पर सिर्फ 3,423 लोगों की टेस्टिंग की जा रही है जबकि अभी मृत्यु दर 0.69 प्रतिशत है। तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने बिहार में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने पर चिंता व्यक्त की है। नीतीश सरकार को सावधान करते हुए केंद्रीय टीम ने कहा कि कम लोगों की टेस्टिंग से इस बीमारी की वजह से होनों वाली मौतों के सीएफआर (CFR-case fatality rate) पर प्रभाव पड़ सकता है। एक खास अवधि में वायरस से संक्रमित पाए गए कुल मरीजों की तुलना में उस महामारी से होने वाली मौतों के अनुपात को सीएफआर कहते हैं। सीएफआर से बीमारी की भयावहता का पता लगाया जाता है।

    केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉक्टर एसके सिंह और एम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर नीरज निश्चल इस केंद्रीय टीम के सदस्य हैं जिन्होंने बिहार में बढ़ती कोरोना महामारी के हालात का जायजा लेने के लिए 19-20 जुलाई को दौरा किया। बुधवार को लव अग्रवाल ने बिहार सरकार को रोजाना हो रही कोरोना की आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाने की सलाह दी है। प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग के लिए आईसीएमआर ने 6 सरकारी और तीन निजी प्रयोगशालाओं को आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की अनुमति दी है।

    केंद्रीय टीम ने नीतीश सरकार को प्रदेश के कंटेनमेंट जोन में रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट (RAD) करने की भी सलाह दी है। साथ ही आरएडी टेस्ट के निगेटिव रिजल्ट की निगरानी आरटी-पीसीआर टेस्ट के जरिए करने को कहा है। केंद्रीय टीम ने प्रदेश सरकार से अस्थायी फील्ड हॉस्पिटल बनाने को भी कहा है क्योंकि जो अस्पताल अभी हैं वो महामारी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। केंद्रीय टीम ने नीतीश सरकार से कोविड अस्पताल बनाने को भी कहा है जिसमें संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था हो। मरीज के पॉजिटिव पाए जाने पर उसके संपर्क में आए सभी लोगों का पता 72 घंटे के अंदर लगाना चाहिए। टीम ने सरकार से कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार ट्रेनिंग, महामारी रोकने के लिए विभिन्न उपाय, कंटेनमेंट जोन की निगरानी करने, घर-घर सर्वे करने समेत अन्य प्रभावी कदम उठाने को कहा है।

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