MPLAD Controversy: बिहार के इस सांसद ने इंदौर के विकास पर लुटाए 15 लाख, कांग्रेस ने सबूतों के साथ घेरा
Vivek Thakur MPLAD fund controversy: सांसद निधि (MPLADS) के खर्च को लेकर बिहार और राजस्थान की सियासत में जबरदस्त उबाल है। राजस्थान कांग्रेस के प्रवक्ता आरसी चौधरी ने भाजपा पर 'दोहरे चरित्र' का आरोप लगाते हुए नवादा (बिहार) के भाजपा सांसद विवेक ठाकुर को निशाने पर लिया है।
विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा ने कांग्रेस सांसदों पर फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया, जिसके जवाब में कांग्रेस ने सबूत पेश किया कि भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने अपने संसदीय क्षेत्र नवादा के बजाय मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। यह बहस अब 'क्षेत्रीय नैतिकता' और विकास निधि के नियमों पर टिक गई है।

Vivek Thakur: विरासत से संसद तक का सफर
नवादा से BJP सांसद विवेक ठाकुर बिहार के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. ठाकुर के पुत्र हैं। नवंबर 1969 में पटना में जन्मे विवेक ठाकुर को राजनीति विरासत में मिली है। मात्र 24 साल की उम्र में भाजपा की सदस्यता लेने वाले विवेक ने पटना महानगर से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। युवा मोर्चा से लेकर राज्यसभा और अब लोकसभा के सदस्य है।
ये भी पढे़ं: MP Report Card: ममता की Mahua Moitra का सांसदी में क्या स्कोर? आंकड़े चौंकाने वाले- क्या कुर्सी पर खतरा?
इंदौर को 15 लाख: कांग्रेस का तीखा पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता आरसी चौधरी ने भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के आरोपों पर पलटवार करते हुए विवेक ठाकुर का उदाहरण पेश किया है। कांग्रेस का सवाल है कि यदि कांग्रेस सांसदों द्वारा फंड का वितरण 'लूट' है, तो एक बिहार के सांसद द्वारा मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को 15 लाख रुपये देना क्या है? कांग्रेस ने इसे नवादा की जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए पूछा है कि क्या भाजपा के लिए नियम और नैतिकता के पैमाने अलग-अलग हैं?
MPLADS फंड और 'बाहरी' विकास का विवाद
सांसद निधि के नियमों के तहत एक सांसद को अपने क्षेत्र के विकास के लिए सालाना एक निश्चित राशि मिलती है, जिसे वे जनहित के कार्यों में खर्च कर सकते हैं। हालांकि, तकनीकी रूप से सांसद अपने क्षेत्र के बाहर भी कुछ राशि दे सकते हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से यह हमेशा विवाद का विषय रहता है। विवेक ठाकुर द्वारा इंदौर को फंड देना नवादा की स्थानीय जरूरतों की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे विपक्षी दलों को भाजपा को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है।
ये भी पढे़ं: MP Report Card: 'ड्रीम गर्ल' ने तोड़े ब्रजवासियों के सपने! धूल फांक रहा सांसदी का पैसा, आंकड़ों ने खोली पोल
सियासी घमासान: भाजपा की साख पर सवाल
यह मुद्दा अब केवल विवेक ठाकुर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व और गृहमंत्री को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। राजस्थान से लेकर बिहार तक कांग्रेस इस मुद्दे को 'क्षेत्रवाद' और 'जनता के पैसे की बर्बादी' के तौर पर भुना रही है। भाजपा के लिए यह स्थिति बचाव की मुद्रा वाली हो गई है, क्योंकि एक ओर वह 'सांसद रिपोर्ट कार्ड' की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसके अपने सांसद दूसरे राज्यों में फंड बांट रहे हैं।
कई दिग्गज सांसदों ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया
MPLADS पोर्टल के ताजा आंकड़ों ने बिहार के सांसदो की पोल खोल कर रख दी है। (6 जनवरी 2026 तक) के अनुसार, राज्य के 6 दिग्गज सांसदों ने अपने फंड से एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री ललन सिंह और अनुभवी नेता राजीव प्रताप रूडी जैसे नाम शामिल हैं। इन सांसदों ने न केवल शून्य खर्च किया, बल्कि किसी नए कार्य की सिफारिश तक नहीं की है। वहीं पाटलिपुत्र से राजद की मीसा भारती, समस्तीपुर से सबसे युवा सांसद शांभवी चौधरी, पश्चिम चंपारण से संजय जायसवाल के नाम इस लिस्ट में दर्ज हैं।












Click it and Unblock the Notifications