बिहार में गवर्नर और नीतीश सरकार में घमासान, यूनिवर्सिटी में बैंक खाते फ्रीज करने पर बढ़ा टकराव
यूनिवर्सिटी में दखल देने के मामले पर अब बिहार सरकार और राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के बीच एक बार फिर से टकराव बढ़ता दिख रहा है। दोनों तरफ से जुबानी जंग शुरू हो गई है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) केके पाठक को राजभवन की तरफ से कानून की जानकारी तक दे दी गई।
दरअसल, इस टकराव की शुरुआत तब हुई जब बिहार सरकार द्वारा मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी वीसी और प्रो-वीसी के वेतन को रोक दिया गया और वित्तीय शक्तियों और बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद फिर राजभवन ने सरकार के फैसले को पलट दिया। जिसके बाद से दोनों तरफ से तकरार और बढ़ गई है।

राजभवन ने बिहार सरकार का फैसला पलटा, दिया करारा जवाब
जैसे ही राजभवन को जानकारी लगी कि बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) के प्रभारी वीसी और प्रो-वीसी के वेतन को रोक दिया गया और वित्तीय शक्तियों और बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, तुरंत राज्यपाल ने राज्य सरकार के फैसले को पलट दिया। फिर कानून की जानकारी देते हुए कहा गया कि आपके पास इसका पावर है क्या?
राजभवन ने क्या कहा?
राजभवन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी का प्रमुख चांसलर होते हैं और वीसी या प्रो वीसी का वेतन रोकना राज्य सरकार के अधिकार में नहीं है। ये चांसलर के अधिकार क्षेत्र में घुसना हुआ, इसलिए आदेश वापस लें सचिव और इस तरह से यूनिवर्सिटी के काम में दखलअंदाजी ना करें।
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) केके पाठक ने समीक्षा बैठक बुलाई थी, जिसमें वीसी और प्रो वीसी शामिल नहीं हुए थे। जिसके बाद पाठक के निर्देश पर शिक्षा सचिव वैजनाथ यादव ने वेतन रोकने और वित्तीय अधिकार निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।












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