Bihar Politics: CM नीतीश के लिए ये 3 बड़े ‘वोट बैंक’ बन सकते हैं परेशानी का सबब, जानिए कैसे?
Bihar Politics, CM Nitish Kumar: बिहार में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव की भी सुगबुगाट शुरू हो चुकी है। राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के सियासी वादे कर रहे हैं। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भाजपा के ख़िलाफ़ रणनीति बनाते हुए अपनी सियासी पकड़ मज़बूत करने में जुटे हुए हैं।
चुनावी मौसम में नीतीश कुमार भाजपा के ख़िलाफ़ माहौल तो बना रहे हैं, लेकिन खुद अपने ही प्रदेश में उनसे मास वोटर ख़फ़ा चल रहे हैं, जो कि आगामी चुनाव में नीतीश कुमार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। 3 मास वोटर्स नीतीश कुमार से नाराज़ चल रहे हैं। (1) प्रदेश के गांवों के पंचायत प्रमुख (मुखिया संघ) नीतीश सरकार से ख़फ़ा हैं।

सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले से रद्द हुई परीक्षा और बेरोज़गारी की मार झेल रहे युवा प्रदेश सरकार के काफी नाराज़ चल रहे हैं। वहीं तीसरे नंबर पर नियुक्ति परीक्षा के बावजूद बहाली नहीं होने से शिक्षक अभ्यर्थी नाराज़ हैं। शिक्षक अभ्यर्थियों की नाराज़गी इस वजह से और भी ज्यादा बढ़ गई है कि एलिजिबिलिटी एग्ज़ाम पास करना ज़रूरी है। इसके लिए मौक़े भी सिर्फ़ 3 बार मिलेंगे।
21 हजार 391 पदों पर निकली सिपाही बहाली के लिए पहले दिन 6 लाख के करीब परीक्षार्थियों ने एग्ज़ाम दिया था। परीक्षा केंद्र पर 2 मिनट की देरी से पहुंचने पर एग्ज़ाम देने से वंचित रहे छात्र नाराज़ थे। वहीं जो 6 लाख के करीब परीक्षार्थी जिसने एग्ज़ाम दिया, उनकी परीक्षा रद्द होने पर कितनी नाराज़गी है, यह तो आप भी समझ सकते हैं।
प्रदेश में कुल पंचायतों की तादा 8 हज़ार 471 है, इस आंकड़े के मुताबिक पंचायत प्रमुख (मुखिया) की तादाद 8471 है। प्रदेश सराकर ने उनके कार्यक्षेत्र में पाबंदी लगा दी है, जिससे प्रदेश मुखिया संघ नाराज़ चल रहे हैं। मुखिया संघ ने अपनी मांगों के मद्देनज़र नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है।
मुखिया संघ के अध्यक्ष मिथिलेश राय ने कहा कि प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को मनवाने की कोशिश की जा रही है। अगर प्रदेश सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो मुखिया संघ प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन करेगा। इतना ही नहीं आगामी चुनाव में नीतीश सरकार को इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ेगा।












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