Bihar Politics: कांग्रेस में बड़ा धमाका, 7 नेताओं को किया बाहर—क्या पार्टी में नया विद्रोह शुरू होने वाला है?
Bihar Politics Congress: बिहार कांग्रेस इन दिनों सबसे बड़े अंदरूनी राजनीतिक भूचाल से गुजर रही है। टिकट बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर विस्फोट की शक्ल ले चुका है। प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने एक साथ सात नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।फैसला आते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई और बागी गुट अचानक सक्रिय होकर दिल्ली कूच कर गया।
बिहार कांग्रेस का विवाद अब दिल्ली पहुंच गया है। टिकट बंटवारे से नाराज आधा दर्जन असंतुष्ट नेता-जिनमें कांग्रेस कमेटी सदस्य आनंद माधव और पूर्व विधायक छत्रपति यादव शामिल हैं-राहुल गांधी से मुलाकात की तैयारी में हैं। ये आज मंगलवार (25 नवंबर) समय मांगा है। बागी गुट प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को हटाने की मांग करेगा, जिन पर टिकट बेचने के आरोप लगाए गए हैं। सवाल यह है कि आखिर इन सात नेताओं पर इतनी कड़ी कार्रवाई क्यों हुई और क्या यह कांग्रेस के भीतर किसी बड़े 'विद्रोह' की शुरुआत है।

🔵 सात नेताओं पर गिरी कार्रवाई की गाज
कांग्रेस ने अपने सात वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं आदित्य पासवान, शकीलुर रहमान, राज कुमार शर्मा, राज कुमार राजन, कुंदन गुप्ता, कंचना कुमारी और रवि गोल्डेन को प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए बाहर कर दिया है। सभी नेताओं ने टिकट बंटवारे पर खुले मंचों से पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें टिकट खरीद-फरोख्त, पारदर्शिता की कमी और हाईकमान तक बात न पहुंचने जैसे मुद्दे प्रमुख थे।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने स्पष्ट किया कि इन नेताओं ने बार-बार पार्टी के अनुशासन की अनदेखी की और संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन किया। प्रिंट और सोशल मीडिया पर जारी बयानों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद अनुशासन समिति ने कठोर कदम उठाया।
🔵 स्पष्टीकरण समिति को नहीं लगा संतोषजनक
अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिल देव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि संबंधित नेताओं से प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं थे। जांच में पाया गया कि नेताओं के कार्य अनुशासन उल्लंघन के पांच मानकों में से तीन पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। समिति ने यह भी बताया कि नेताओं ने लगातार पार्टी मंचों से बाहर बयान दिए, सक्षम अधिकारियों की अनदेखी की और टिकट बंटवारे के दौरान भ्रामक आरोप लगाकर दुष्प्रचार फैलाया।
समिति के मुताबिक जिन मुद्दों पर नेताओं ने आरोप लगाए, उन सभी पर पार्टी ने प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी रखा था। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, जनसंपर्क कार्यक्रम, चुनाव समिति की बैठकें और एआईसीसी की समीक्षा के बाद ही प्रत्याशियों की घोषणा की गई थी। इसके बावजूद नेतृत्व के फैसलों की अनदेखी कर संगठन में भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
🔵 निष्कासन के बाद बागी गुट एक्टिव, दिल्ली मार्च से बढ़ी बेचैनी
कार्रवाई के बाद हालात शांत होने की जगह और बिगड़ गए। निष्कासित नेता और उनके समर्थन में खड़े अन्य बागी नेता तुरंत सक्रिय हो गए। सूचनाओं के अनुसार एक दर्जन से अधिक नेता दिल्ली रवाना हो गए हैं ताकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकें। सूत्र बताते हैं कि यह गुट औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग उठा सकता है।
यह 'दिल्ली मार्च' बिहार कांग्रेस के भीतर असंतोष की गहराई को दिखाता है। कई वरिष्ठ चेहरे, पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भी इस गुट के साथ खड़े दिख रहे हैं, जिससे सियासी तापमान और बढ़ गया है।
🔵 क्या कांग्रेस में एक नए विद्रोह की पटकथा लिखी जा रही है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा विवाद सिर्फ निष्कासन तक सीमित नहीं रहेगा। पिछले कुछ महीनों से बिहार कांग्रेस दो धड़ों में बंटती दिख रही थी। टिकट वितरण के दौरान यह टकराव और गहरा हुआ और अब कार्रवाई ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।
निष्कासित नेताओं में भले ही कोई बड़ा चुनावी चेहरा न हो, लेकिन वे सभी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय और प्रभावशाली माने जाते हैं। यदि दिल्ली में इन नेताओं को हाईकमान से थोड़ी भी सुनवाई मिल गई, तो यह लड़ाई और बड़ी हो सकती है। दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस का दावा है कि संगठन को मजबूत करने के लिए अनुशासन जरूरी है और यह कार्रवाई उसी दिशा में उठाया गया कदम है।
बिहार कांग्रेस में जारी यह तनाव महज एक विधायक या जिला स्तर के विवाद का मसला नहीं रहा। अब स्थिति पार्टी की एकता और भविष्य को प्रभावित करने की ओर बढ़ रही है। सात नेताओं का निष्कासन और बागियों का खुला विद्रोह यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।












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