Bihar Politics: क्या डमी सीएम बनकर रह गए हैं नीतीश कुमार? बिहार में बुलडोजर एक्शन के बाद उठ रहे सवाल
Bihar Politics: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से ही विभिन्न मंत्रियों को उनके संबंधित विभाग सौंपे गए हैं। बिहार में नई एनडीए सरकार में सीएम नीतीश कुमार के बजाय इस बार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय सौंपा गया है। गृह मंत्री बनते ही कानून-व्यवस्था और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान शुरू हो गया है।
योगी सरकार के बुलडोजर मॉडल की तर्ज पर बिहार भर में अवैध कब्जों के खिलाफ 'बुलडोजर' कार्रवाई तेज कर दी गई है। राजधानी पटना सहित कई अन्य जिलों में भी अतिक्रमण विरोधी अभियान लगातार जारी है। इस अभियान के तहत, अवैध रूप से निर्मित संरचनाओं और मकानों को गिराने का काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जा सके।

इस कार्रवाई के साथ ही डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आदेश पर प्रशासन ने शहर के सभी अतिक्रमणकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट अल्टीमेटम जारी किया है कि लोग स्वेच्छा से अपने अतिक्रमण हटा लें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो प्रशासन का बुलडोजर इसी तरह चलता रहेगा और जबरन अतिक्रमण हटाया जाएगा, जिसका हर्जाना भी वसूला जा सकता है। डिप्टी सीएम के आदेश पर बिहार में हो रहे इस बुलडोजर एक्शन के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार डमी सीएम बन कर रह गए हैं? असल में बिहार की सत्ता भाजपा के हाथ में हैं।
दरअसल, ऐसा ही दावा बिहार के वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी ने एनडीटीवी की डिबेट में किया है, भेलारी से पूछा गया कि क्या डमी सीएम बनकर रह गए हैं नीतीश कुमार? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा हां बिलकुल। बिहार में बुलडोजर एक्शन के बाद ये ऐसा ही प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा बिहार में बीते कई दशक से अवैध कब्जा है और नीतीश सरकार है तब तो कोई बुलडोजर नहीं चला।
वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी ने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार राज्य में नीतीश कुमार की नहीं, बल्कि एनडीए की सरकार की सरकार है, सच कहे तो भाजपा सरकार है। इसके साथ ही भेलारी ने दावा किया कि बिहार चुनाव परिणामों के बाद से ही नीतीश कुमार को यह बात खल रही है कि उनकी पार्टी बिहार में सर्वाधिक सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी क्यों नहीं बन पाई।
भेलारी ने आगे दावा किया कि अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए नीतीश सरकार अब अन्य दलों के विधायकों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसमें बसपा और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी विधायक भी शामिल हैं। उनका मानना है कि यह कवायद सरकार के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।












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