Bihar News: नीतीश के मंत्री को दारोगा के कुचलने का नहीं है मलाल, बालू तस्कर कर रहे तांडव
Bihar News, Sand Mafia Jamui: बिहार के सीएम नीतीश बाबू की ज़ुबान ही नहीं फिसलने लगी है, बल्कि ऐसा लगता है कानून व्यवस्था पर पकड़ भी छूट गई है। सुशासन बाबू की उपमा अब नीतीश बाबू पर फिट नहीं बैठ रही है।
आज यानी कि मंगलवार को जब बालू माफियाओं ने ट्रैक्टर की टक्कर पुलिस वाहन को उड़ाने की हिमाकत की और एक दारोगा कुचल कर मार डाला। उस पर नीतीश के शिक्षा मंत्री और लालू की पार्टी के नेता का बयान और भी बेशर्मी भरा था। दारोगा के बेरहम क़त्ल पर मंत्री बोले- 'ऐसा तो होते ही रहता है'।

दरअसल बिहार में सुबह-सुबह बालू माफियाओं के तांडव की एक ऐसी घटना सामने आई, जिससे प्रदेश में कानून व्यवस्था का क्या हाल है यह साफ हो गया। बालू माफियाओं ने अपनी मनमानी के आड़े आने पर पुलिस वाहन में ट्रैक्टर से तेज़ टक्कर मार दी। इसके बाद वाहन से कूदकर बहादुरी के साथ बालु माफियाओं से लोहा लेने वाले जांबाज़ दारोगा प्रभात रंजन को कुचल डाला।
असमय मौत की चिर निंद्रा में गए दारोगा की शहादत ने पूरे बिहार को हिला दिया है। आम जन में दहशत का माहौल है, लोगों का कहना है कि जिस प्रदेश में एक दारोगा को कुचल कर मार डाला जाए वहां कौन सुरक्षित रह सकता है।
इस पूरी घटना पर सीएम नीतीश कुमार से सवाल करने का मौक़ा मीडिया को नहीं मिला क्योंकि वह हाथ जोड़कर निकल लिए, लेकिन बिहार के शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर जब मीडिया मुख़ातिब हुए तो कहा डाला कि ऐसा तो होता ही रहता है। यानी नाम से प्रोफेसर और डॉक्टर मंत्री की भी मानवीय संवेदनाएं सुन्न हो गईं हैं। क्या दारोगा कि जघन्य हत्या मंत्री जी को कोई मलाल नहीं है।
उधर लोजपा (R) सुप्रीमो और जमुई सांसद चिराग पासवान ने नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला है। 'मुख्यमंत्री जी, राज्य में बालू तस्करों का तांडव सिर चढ़ कर बोल रहा है।ऐसे में सवाल आपके नेतृत्व पर भी उठते हैं की क्या ये सब आपके संरक्षण में हो रहा है? और नहीं तो अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। अवैध बालू खनन से कहीं नदी में डूबने से मौत हो रही है तो कहीं अनियंत्रित वाहन सुरक्षाबलों को कुचल रहे हैं। ज़रूरी है कोई ठोस कदम उठाकर बिहारियों की जान बचाई जाए'।
चिराग पासवान के एक्स हैंडल (ट्वीटर) पोस्ट के बाद बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है। देखना होगा कि 75 फीसद आरक्षण के मास्टरस्ट्रोक के दंभ में तो सरकार नहीं है। क्या सरकार बालू माफियाओं के ख़िलाफ़ निष्पक्ष कड़ी कार्रवाई करेगी। क्या दारोगा प्रभात रंजन की शहादत के बाद उनके परिवार को न्याय मिलेगा।












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