बिहारः कोरोना के चलते एक और मरीज की मौत, मृतकों का आंकड़ा पहुंचा 10
खगड़िया। बिहार के खगड़िया जिला में कोरोना संक्रमित 45 वर्षीय मरीज की मौत हो गई। इस मौत के बाद राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 10 हो गई है। युवक की मौ की पुष्टि जिलाधिकारी ने की है। युवक की मृत्यु बेगूसराय में हुई। वहीं बुधवार को पटना में एक साथ आठ कोरोना पॉजिटिव मिलने से हड़कंप मच गया। ये सभी प्रवासी श्रमिक हैं। इनमें पांच बाढ़ के जबकि मोकामा, बख्तियारपुर और नौबतपुर से एक-एक संक्रमित शामिल हैं। पटना जिले में अब सक्रमितों की कुल संख्या 175 हो गई है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बिहार में बुधवार को 86 नए मरीजों का पता चला। इनमें 60 के जिलों की जानकारी दी गई है जबकि 26 संक्रमित कहां के हैं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा नवादा जिले में सात नए संक्रमित मिले। इनमें एक डब्ल्यूएचओ कर्मी, एक एंबुलेंस कर्मी और पांच प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। जिले में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 47 हो गई है।
बिहार में कोरोना के चलते उन्हीं की मौत हो रही है, जो पहले ही किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। यही वजह है कि ऐसे संक्रमितों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाते वक्त विशेष सावधानी बरतने की सलाह विशेषज्ञों ने दी है। अबतक बिहार में जिन नौ लोगों की मौत हुई है, वे सभी पहले से किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। उनमें सभी लोग कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी अथवा अस्थमा आदि बीमारियों से ग्रसित थे।
बिहार में सबसे पहले कोरोना से मरनेवाले मो. कैफ से लेकर मंगलवार को मृत वैशाली की 75 वर्षीय वृद्धा भी ट्यूमर और कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित थीं। एम्स में इलाज के दौरान मरनेवाले कैफ और नवलकिशोर राय कैंसर, किडनी, लिवर आदि बीमारी से ग्रसित थे। मौत का कारण मल्टी ऑर्गन फेल्योर के साथ कोरोना रहा। उसी तरह पीएमसीएच में इलाज के दौरान मरनेवाले बेलछी के 60 वर्षीय बद्री राम अस्थमा से पीड़ित था। दिल्ली से लौटने के क्रम में वह गंभीर रूप से बीमार हो गया था। जिस समय पीएमसीएच में उसे भर्ती कराया गया था, उस समय उसको होश भी नहीं था।
सासाराम में भी कोरोना ने अस्थमा और कैंसर पीड़ित बुजुर्ग को ही अपना शिकार बनाया। एनएमसीएच में जिन चार कोरोना संक्रमितों की मौत हुई सभी कैंसर के एडवांस स्टेज के मरीज थे। एनएमसीएच में कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि मरनेवाले चारों मरीज कैंसर के एडवांस स्टेज से ग्रसित थे। उनकी स्थिति वैसी ही थी कि अगर कोरोना नहीं भी होता तो भी इनको बचाना मुश्किल होता है।












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