बिहार में हेल्थकेयर की नई तस्वीर: आशा कार्यकर्ताओं ने लिखी सफलता की कहानी, जानें कैसे?
Bihar Healthcare Revolution: कभी सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं और ऊंची मातृ मृत्यु दर के लिए चर्चित रहा बिहार, अब हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक साइलेंट क्रांति का गवाह बन चुका है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा हाथ उन महिलाओं का है, जिन्हें हम "आशा कार्यकर्ता" कहते हैं। दो दशकों में इन्होंने गांव-गांव जाकर जो मेहनत की है, उसका असर अब हर आंकड़े और हर गांव की कहानी में नजर आने लगा है।

कैसे बदली बिहार की हेल्थ व्यवस्था?
2005 के आसपास बिहार की स्वास्थ्य स्थिति बेहद खराब थी। बहुत कम महिलाएं गर्भावस्था में जांच करवाती थीं, संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बहुत ही कम था और बच्चों का टीकाकरण अधूरा रह जाता था। लेकिन अब हालात काफी बदल चुके हैं।
आज की तारीख में 97% महिलाएं गर्भावस्था में पंजीकरण करवा रही हैं। 85% महिलाएं कम से कम चार बार एएनसी (prenatal check-up) करवा रही हैं। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत जो कभी 19.9% था, अब 76.2% तक पहुंच गया है। यानी अब ज्यादातर महिलाएं अस्पतालों में सुरक्षित डिलीवरी करवा रही हैं।
आशा कार्यकर्ताओं का रोल
बिहार में इस समय 91,281 आशा कार्यकर्ता, 4,361 आशा फैसिलिटेटर और 5,111 ममता कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ घर-घर जाकर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देती हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों का समय पर टीकाकरण करवाने और न्यूट्रिशन से जुड़ी सलाह देने में भी मदद करती हैं।
सरकार अब इस नेटवर्क को और मजबूत करने जा रही है। अगले तीन महीनों में 27,375 नई नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें से 21,009 ग्रामीण इलाकों में, 5,316 शहरी क्षेत्रों में और 1,050 आशा फैसिलिटेटर के पदों पर होंगी। ये नियुक्तियां ग्राम सभा और नगर निकाय स्तर पर होंगी, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार सही लोगों का चयन हो।
सरकार की रणनीति
बिहार सरकार का फोकस अब हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने पर है। सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं होता, उन्हें जमीन पर लागू करना ज्यादा अहम है। और इसमें आशा कार्यकर्ता एक तरह से पुल का काम करती हैं-सरकारी स्कीम्स को लोगों तक पहुंचाने में।
अगर कोई पूछे कि बिहार में हेल्थकेयर सेक्टर में असली चेंजमेकर्स कौन हैं, तो जवाब साफ है-आशा कार्यकर्ता। ये महिलाएं ही हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से हजारों परिवारों की जिंदगी बदली है। और अब सरकार की नई पहल के साथ ये बदलाव और भी तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
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