Bihar Final Voter List: बिहार मतदाता सूची पर नहीं थम रहा विवाद, महागठबंधन ने शुरू किया वैरिफिकेशन कैंपेन

Bihar Final Voter List 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। 30 सितंबर को चुनाव आयोग ने फाइनल मतदाता सूची जारी कर दिया है।

विपक्षी INDIA Bloc के दलों ने जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर बूथ लेवल वोटर वेरिफिकेशन (BLAS) अभियान शुरू कर दिया है। RJD से लेकर CPI-ML तक सभी दल अपने बूथ लेवल एजेंट्स के जरिए मतदाता सूची की जांच में जुट गए हैं।

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विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और लाखों लोगों के नाम कट गए हैं। साथ ही, चुनाव आयोग पर डेटा पारदर्शिता न बरतने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

RJD ने बक्सर से किया अभियान शुरू

RJD ने अपनी जांच की शुरुआत बक्सर से की। सांसद सुधाकर सिंह की निगरानी में 30 सितंबर की रात से ही BLAS को मतदाता सूची सौंप दी गई। बुधवार सुबह से रिपोर्ट्स आने लगीं। सुधाकर सिंह का दावा है कि कई परिवारों में पुरुष सदस्यों के नाम कट गए जबकि महिला सदस्य सूची में मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक मतदाता का नाम दो विधानसभा क्षेत्रों रामगढ़ और बक्सर में दर्ज है, जिससे वह दोहरी वोटिंग का पात्र बन जाता है।

RJD का कहना है कि वोटर लिस्ट मशीन रीडेबल नहीं है। यदि डेटा मशीन रीडेबल होता, तो डबल एंट्री, EPIC नंबर के आधार पर जोड़-घटाव और 100 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के नाम की छंटनी करना आसान होता। सुधाकर सिंह ने बताया कि पार्टी ने पिछले तीन महीनों में BLAS को ट्रेनिंग दी थी और अब वे अगले 48 घंटों में आपत्तियां दाखिल करेंगे।

CPI-ML ने भी उठाए सवाल

CPI-ML ने अपने गढ़ वाले इलाकों में BLAS को लगाया है। महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि मैक्रो डेटा हकीकत छिपा रहा है। उनका कहना है कि महिलाओं के नाम असमानुपातिक रूप से कटे हैं और Form 6 का इस्तेमाल अब उन मतदाताओं के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे।

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि इतने बड़े अभ्यास के लिए चुनाव आयोग ने सिर्फ सर्कुलर और प्रेस रिलीज जारी की, किसी राजनीतिक दल से चर्चा नहीं की। उन्होंने त्योहारों के समय डेटा जारी करने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि BLAS और कार्यकर्ता इस दौरान व्यस्त होते हैं, जिससे सीमित समय में डेटा की जांच और आपत्तियां दाखिल करना कठिन है। भट्टाचार्य ने बताया कि 65 लाख नाम काटे गए, लेकिन यह साफ नहीं कि इनमें से कितने दोबारा जोड़े गए।

विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल

चुनावी विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कहा कि SIR प्रक्रिया के मूल स्वरूप में बिहार के 1.5 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव आयोग ने अपनी गाइडलाइन बदली और वंशावली क्लॉज के तहत लगभग 77% मतदाताओं को छूट दी।

यादव ने Form 6 के जरिए नए नाम जुड़ने पर भी संदेह जताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में नए मतदाताओं की संख्या 16 लाख से बढ़कर 21 लाख हो गई, यानी 5 लाख अतिरिक्त नाम कहां से आए, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने विदेशी मतदाताओं के नाम पर भी चुनाव आयोग के दावों को चुनौती दी। पूरे बिहार में सिर्फ 987 आपत्तियां विदेशी आधार पर दाखिल हुईं, जिनमें से लगभग 70% हिंदू मतदाता थे।

BJP ने किया बचाव

वहीं, BJP के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने SIR प्रक्रिया का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ करना है। नकवी ने बताया कि यह प्रक्रिया वास्तविक मतदाताओं की सुरक्षा करती है और फर्जी मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने में मदद करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत से ही मतदाता सूचियों की कई बार समीक्षा की जाती रही है और जरूरत के अनुसार बदलाव किए जाते रहे हैं।

Bihar की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। INDIA Bloc की योजना है कि अगले 72 घंटों में वेरिफिकेशन और डेटा विश्लेषण पूरा कर आपत्तियां दाखिल की जाएं।

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