Bihar Election 2025: Tejashwi ने ही सजाकर दी Owaisi को 5 सीटों पर 'जीत की थाली'! 5 कारणों में समझें 'खेला'!
Bihar Election 2025 Results- Owaisi Factors: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने सीमांचल में धमाकेदार वापसी की। 25 सीटों पर लड़कर 5 पर जीत हासिल की ठीक 2020 जैसी। लेकिन इस बार जीत का 'स्वाद' अलग है। सूत्र बता रहे हैं कि तेजस्वी यादव की रणनीति ही ओवैसी के लिए 'लड्डू' बन गई।
मुस्लिम वोटों का बंटवारा तो हुआ ही, साथ में नॉन-मुस्लिम वोट भी ओवैसी की झोली में गिरे। आखिर तेजस्वी ने खुद ही ओवैसी को 5 सीटों की थाली सजाकर क्यों दी? आइए 5 ठोस कारणों में समझते हैं ये पूरा 'खेला'...

कारण 1: तेजस्वी का 'चरमपंथी' तमगा ओवैसी बने 'मजलूम हीरो'
- तेजस्वी यादव ने चुनावी सभाओं में ओवैसी को 'चरमपंथी', 'नफरत फैलाने वाला' करार दिया।
- कहा: 'नमाज, दाढ़ी, टोपी वाले लोग बिहार को बर्बाद करना चाहते हैं!'
- ओवैसी ने जवाब में इमोशनल अपील की: 'ये मेरे मजहब पर हमला है, मेरे वोटरों की पहचान पर हमला है!'
नतीजा?
- सीमांचल के मुस्लिम मतदाता एकजुट हो गए। ओवैसी की 'मजलूम' इमेज मजबूत हुई।
- फायदा:- मुस्लिम वोटों का 90%+ कंसोलिडेशन AIMIM के पक्ष में।
कारण 2: मुकेश सहनी को 'डिप्टी CM' बनाना ओवैसी को मिला 'बूस्टर'
तेजस्वी ने मुकेश सहनी (VIP) को संभावित डिप्टी CM घोषित किया। ओवैसी ने सभाओं में तंज कसा- 'M' का मतलब 'मुकेश' को लड्डू, 'मुस्लिम' को कद्दू! कब तक तेजस्वी की सभाओं में दरी बिछाते रहोगे?'
प्रभाव:
- मुस्लिम मतदाता नाराज - 'हम वोट बैंक हैं, सत्ता में हिस्सा नहीं!'
- मल्लाह वोट भी बंटा- मुकेश सहनी की पार्टी कमजोर।
- ओवैसी को डबल फायदा: मुस्लिम + कुछ नॉन-मुस्लिम वोट।
कारण 3: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद ओवैसी की 'राष्ट्रीय छवि' चमकी
- ऑपरेशन सिंदूर (पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक 7-9 मई) के बाद ओवैसी ने मोदी सरकार की तारीफ की।
- कहा:- 'देशहित में अच्छा कदम, लेकिन मुसलमानों को निशाना न बनाओ।'
प्रभाव:
- हिंदू वोटरों में 'उदारवादी' इमेज।
- सीमांचल के गैर-यादव OBC और दलित भी प्रभावित।
- 2020 vs 2025: इस बार मार्जिन बढ़ा (औसत 29,346 vs 2020 का 22,000)।
कारण 4: उम्मीदवार चयन में 'मास्टरस्ट्रोक' कोई बागी नहीं
ओवैसी ने साफ कहा था- 'बागी, दलबदलू को टिकट नहीं!' ओवैसी ने पार्टी के पुराने, कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता चुने। जमीनी कनेक्शन मजबूत किया, वोटरों का भरोसा जीता।
- उदाहरण: अमौर विधानसभा सीट पर अख्तरुल ईमान (प्रेम) - 38,928 वोटों से जीते। सभी विजेता 2019 से लगातार सक्रिय।
कारण 5: BJP-STYLE माइक्रो मैनेजमेंट हैदराबाद मॉडल बिहार में
- हैदराबाद और बंगाल से छोटे-छोटे कैडर बिहार लाए।
- बूथ लेवल घेराबंदी की।
- व्हाट्सएप ग्रुप, लोकल इन्फ्लुएंसर का इस्तेमाल।
- महिला वोटरों पर फोकस - 'ओवैसी साहब औरतों की इज्जत करते हैं।'
नतीजा: वोट शेयर 2020 के 1.2% से बढ़कर 2.8%।
ओवैसी की 5 सीटें: कौन जीता, कितने वोट, कितना मार्जिन?
| क्रमांक | क्षेत्र | विजेता | कुल वोट | मार्जिन | राउंड |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जोकिहाट (50) | मोहम्मद मुर्शिद आलम | 83,737 | 28,803 | 26/26 |
| 2 | बहादुरगंज (52) | एमडी तौसीफ आलम | 87,315 | 28,726 | 26/26 |
| 3 | कोचाधामन (55) | एमडी सरवर आलम | 81,860 | 23,021 | 22/22 |
| 4 | प्रेम (56) | अख्तरुल ईमान | 1,00,836 | 38,928 | 27/27 |
| 5 | बैसी (57) | गुलाम सरवर | 92,766 | 27,251 | 26/26 |
सोर्स- ECI
रिकॉर्ड: अख्तरुल ईमान का 38,928 वोटों का मार्जिन सीमांचल में सबसे बड़ा।
नतीजा: तेजस्वी का 'खुद का गोल', ओवैसी की 'जीत'
- महागठबंधन को नुकसान: 5 सीटें हारीं - सरकार बनाने में मुश्किल।
- एनडीए को फायदा: मुस्लिम वोट बंटा- यादव-मुस्लिम गठजोड़ टूटा।
- ओवैसी की रणनीति: 2020 की जीत को 2025 में और मजबूत किया।
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