बिहार चुनाव से पहले बड़ा झटका! राघोपुर में प्रशांत किशोर पर FIR, किस मामले में फंसे जनसुराज के नेता

Prashant Kishor FIR: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ता जा रहा है और इसी बीच जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर (PK) पर एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

आरोप है कि प्रशांत किशोर ने आचार संहिता के उल्लंघन के साथ चुनावी नियमों की अनदेखी की। मामला वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र का है-यानी वही इलाका जो तेजस्वी यादव का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। आइए जानें पूरा मामला क्या है और किस बात पर एफआईआर दर्ज हुई है।

Prashant Kishor FIR

किस बात पर दर्ज हुई प्रशांत किशोर पर FIR?

राघोपुर के अंचलाधिकारी दीपक कुमार ने थाने में आवेदन देकर शिकायत की कि प्रशांत किशोर ने शनिवार (11 अक्टूबर) को सैकड़ों समर्थकों के काफिले के साथ राघोपुर में जनसभा की। यह सभा जन सुराज पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद सिंह द्वारा आयोजित की गई थी। चूंकि इस वक्त बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए इतनी बड़ी भीड़ के साथ प्रचार करना चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन माना गया। इस आधार पर FIR राघोपुर थाना में दर्ज की गई है। इस मामले में कार्यक्रम के आयोजक सत्येंद्र सिंह पर भी केस दर्ज हुआ है, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

🔹 तेजस्वी यादव के गढ़ से क्यों शुरू की 'जन सुराज' की जंग?

बिहार की सियासत में यह भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने अपना अभियान सीधे तेजस्वी यादव के राघोपुर से शुरू किया। यहां पहुंचकर उन्होंने न सिर्फ ग्रामीणों से मुलाकात की बल्कि तेजस्वी पर सीधा हमला भी बोला। प्रशांत किशोर ने कहा-"शायद तेजस्वी यादव का हाल भी उनके सहयोगी राहुल गांधी जैसा हो सकता है, जो वायनाड से जीत गए लेकिन अमेठी हार गए।" इस बयान ने माहौल और गर्मा दिया।

🔹 भीड़, ढोल-नगाड़े और PK का 'शो ऑफ स्ट्रेंथ'

राघोपुर में प्रशांत किशोर का जोरदार स्वागत हुआ। समर्थकों ने फूल-मालाओं, बैंड-बाजे और नारों से पूरे इलाके को चुनावी रंग में रंग दिया। बताया जाता है कि किशोर के साथ इतने लोग मौजूद थे कि ट्रैफिक कई जगहों पर ठप पड़ गया। यही वजह रही कि स्थानीय प्रशासन ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए त्वरित कार्रवाई की और FIR दर्ज की।

🔹 ग्रामीणों की समस्याओं पर बोले प्रशांत किशोर

अपने अभियान के दौरान PK ने गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने उनसे सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत की। किशोर ने कहा कि उनका अभियान किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि "बदलाव की राजनीति" के लिए है। उन्होंने दावा किया-"बिहार को अब जात-पात की राजनीति से ऊपर उठाने की जरूरत है, तभी विकास संभव है।"

🔹 FIR के सियासी मायने

चुनाव से ठीक पहले FIR दर्ज होना जन सुराज के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे "सियासी ध्यानाकर्षण" भी कह रहे हैं। प्रशांत किशोर पर आरोप भले गंभीर हों, मगर इससे उन्हें सहानुभूति और पब्लिसिटी दोनों मिल सकती हैं। NDA और महागठबंधन जब सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों की लिस्ट में उलझे हैं, तब PK की पार्टी ने पहले ही मैदान में उतरकर राजनीतिक संतुलन बिगाड़ दिया है।

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