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Bihar Chunav: NDA या महागठबंधन—बिहार में किस पार्टी में ज्यादा ‘परिवारवाद’? किन-किन घरानों को मिला चुनावी टिकट

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का शोर अब चरम पर है। हर पार्टी जनता से "नई राजनीति" का वादा कर रही है, लेकिन टिकट बंटवारे की लिस्ट कुछ और ही कहानी कहती है। एनडीए हो या महागठबंधन - हर जगह 'परिवारवाद' का तड़का साफ नजर आ रहा है। 243 सीटों के मुकाबले करीब 42 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके परिवार पहले से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। यानी एक तरह से बिहार की राजनीति फिर उन्हीं पुराने घरानों की ओर लौट आई है।

बिहार की सियासत में नारे बदलते हैं, चेहरे बदलते हैं, लेकिन 'परिवार' वही रहता है। चाहे एनडीए हो या महागठबंधन, सबका दावा है कि वे "नए बिहार" की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन टिकट बंटवारे की हकीकत बताती है -पुराना राजवंश अब भी कायम है। जनता के लिए चुनाव भले ही 2025 का हो पर उम्मीदवार अब भी 1990 के ही घरानों से हैं। आइए जानते हैं कि बिहार में किस दल ने कितने टिकट परिवारवाद के नाम पर बांटे।

Bihar Election 2025

🔵बीजेपी का 'परिवारवाद मीटर'-11% टिकट रिश्तेदारों को

भाजपा हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाती आई है, लेकिन जब बात अपने उम्मीदवारों की आती है तो आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। पार्टी की सूची के मुताबिक, 101 में से 11 उम्मीदवार (लगभग 11%) किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं।

इनमें प्रमुख नाम हैं

1. राघवेंद्र प्रताप सिंह (बरहरा) - पिता अंबिका शरण सिंह बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

2. नीतीश मिश्रा (झंझारपुर) - पूर्व CM डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के बेटे।

3. अरुण कुमार सिंह (बरुराज) - तीसरी पीढ़ी की राजनीति।

4. नितिन नवीन (बांकीपुर) - पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा विधायक रहे।

5. संजीव चौरसिया (दीघा) - पिता गंगा प्रसाद चौरसिया राज्यपाल रह चुके।

6. श्रेयसी सिंह (जमुई) - पिता दिग्विजय सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री, मां पुतुल कुमारी पूर्व सांसद।

7. सुजीत कुमार सिंह (गौड़ा-बौराम): पूर्व आयकर आयुक्त सुजीत कुमार सिंह की पत्नी स्वर्णा सिंह गौड़ा-बौराम से विधायक हैं। इस बार उनकी जगह सुजीत कुमार सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।

8. निशा सिंह (प्राणपुर): प्राणपुर की मौजूदा विधायक निशा सिंह को इस बार भी टिकट मिला है। उनके पति विनोद कुमार सिंह बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

9.गायत्री देवी (परिहार): गायत्री देवी के ससुर राम नरेश प्रसाद यादव 2010 में इसी क्षेत्र से बीजेपी विधायक रहे थे। इस बार गायत्री देवी फिर से चुनाव लड़ रही हैं।

10. देवेश कांत सिंह (गोरियाकोठी): गोरियाकोठी के विधायक देवेश कांत सिंह तीसरी पीढ़ी के नेता हैं, उनके पिता और दादा दोनों इस सीट से विधायक रह चुके हैं।

11.राणा रणधीर (मधुबन): मधुबन MLA राणा रणधीर राजनीतिक परिवार से हैं, उनके पिता सीताराम सिंह विधायक, मंत्री और शिवहर से सांसद रह चुके हैं।

इन आंकड़ों को देखकर स्पष्ट है कि बीजेपी में भी 'परिवारवाद' की जड़ें कमजोर नहीं हैं।

🔵मांझी परिवार का 'मिनी किंगडम' - 6 में से 5 सीटों पर रिश्तेदार

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने परिवार के कई सदस्यों को मैदान में उतार दिया है।

1. दीपा कुमारी (सीट इमामगंज): जीतन राम मांझी की बहू

2. ज्योति देवी (सीट बाराचट्टी) : जीतन राम मांझी कीसमधन

3. प्रफुल्ल मांझी (सीट सिकंदरा): जीतन राम मांझी के दामाद

4. रोमित कुमार (सीट अतरी): MLA अनिल कुमार के भतीजे

5. अनिल कुमार (टिकारी सीट) : पूर्व MP अरुण कुमार के रिश्तेदार

छोटी सी पार्टी में इतनी बड़ी पारिवारिक मौजूदगी देखकर विरोधियों ने तंज कसना शुरू कर दिया है कि "मांझी पार्टी को पारिवारिक ट्रस्ट बना बैठे हैं"।

🔵जेडीयू, लोजपा (रामविलास) और कुशवाहा भी पीछे नहीं

🔹जेडीयू ने 101 सीटों में से 5 पर परिवारवादी उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद (नबीनगर) और पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के बेटे अभिषेक कुमार (चेरिया बरियारपुर) शामिल हैं।

🔹चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी 29 में से 8 टिकट अपने परिवार या करीबी रिश्तों वालों को दिए हैं। चिराग ने अपने भांजे सिमंत मृणाल को पहली बार चुनावी मैदान में उतारा है।

🔹वहीं उपेंद्र कुशवाहा जो अक्सर परिवारवाद पर बयान देते हैं, उन्होंने भी अपनी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को सासाराम से टिकट दे दिया।

🔹राजनीति में रिश्तों की बाजीगरी भी खूब देखने को मिल रही है। आरजेडी विधायक नीलम देवी के पति अनंत सिंह ने इस बार खुद मैदान संभाल लिया है। उन्होंने जेडीयू से टिकट लेकर कहा - "पत्नी क्षेत्र में नहीं जाती, इसलिए अब मैं खुद लड़ूंगा।"

🔹इसी तरह बीजेपी विधायक स्वर्णा सिंह की जगह उनके पति सुजीत सिंह को टिकट मिला। सुजीत रिटायर्ड IRS अधिकारी हैं और पार्टी जॉइन करने के अगले ही दिन उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।

🔵राजद का पारिवारिक विस्तार - 'लालू यादव एंड फैमिली' की विरासत जारी

महागठबंधन में सबसे ज्यादा परिवारवाद का असर राजद में नजर आ रहा है। लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव तो पहले से सक्रिय हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने करीब 10 ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो किसी न किसी राजनीतिक परिवार से आते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • ओसामा शहाब (रघुनाथपुर) - शहाबुद्दीन के बेटे
  • राहुल तिवारी (शाहपुर) - शिवानंद तिवारी के बेटे
  • करिश्मा राय (परसा) - दरोगा प्रसाद राय की पोती और तेज प्रताप की साली

यानी राजद में पारिवारिक विरासत का विस्तार लगातार बढ़ रहा है।

🔵जन सुराज भी 'परिवारवाद मुक्त' नहीं रह सका

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 'नई राजनीति' और 'परिवारवाद मुक्त बिहार' का नारा दिया था। लेकिन टिकट बंटवारे में यह दावा फीका पड़ गया।

लता सिंह (अस्थावां) - पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी

जागृति ठाकुर (मोरवा) - समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर की पोती

इन दो नामों ने जन सुराज की उस "नई सोच" को झटका दे दिया, जिसके लिए पार्टी चर्चा में आई थी।

🔵ADR रिपोर्ट का खुलासा - बिहार में 27% विधायक परिवारवादी

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में कुल 27% मौजूदा सांसद-विधायक वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं। यानी लगभग हर चौथा जनप्रतिनिधि किसी राजनीतिक घराने से है। देशभर के 5,203 सांसदों और विधायकों में 1,106 (21%) परिवारवाद से जुड़े हैं। इस सूची में बिहार तीसरे स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश पहले और हरियाणा दूसरे स्थान पर है।

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