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Bihar Election 2025: जीतन राम मांझी ने बहू और समधन पर जताया भरोसा, इस विधानसभा सीट से लड़ेंगी चुनाव

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी हलचल तेज है और NDA के बीच सुबह से कई घटानक्रम देखने को मिला। इन सब के बीच जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने मंगलवार, 14 अक्टूबर को राज्य की छह विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।

HAM की ओर से सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश इमामगंज सीट से दिया गया, जहां से मांझी ने अपनी बहु दीपा कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। माना जा रहा है कि पार्टी ने परिवार और संगठन दोनों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है।

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इमामगंज और बाराचट्टी में HAM के उम्मीदवार

इमामगंज से मांझी की बहु दीपा कुमारी के मैदान में उतरने से इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। दीपा कुमारी के नामांकन से साफ है कि मांझी ने अपने परिवार के साथ-साथ स्थानीय संगठन की पकड़ को मजबूत बनाने का प्रयास किया है। इसके अलावा, बाराचट्टी सीट से ज्योति देवी को HAM ने उम्मीदवार बनाया है। ज्योति देवी ने 2020 में जीत दर्ज की थी और वह मांझी की समधन भी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि HAM इस बार दलित और महादलित वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इमामगंज और सिकंदरा जैसी सीटों पर ऐसे प्रत्याशी उतारे गए हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ है और जो जनता के बीच लोकप्रिय हैं।

NDA में HAM की सीटें

एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत HAM को कुल 6 सीटें मिली हैं। वहीं, बीजेपी और जेडीयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (R) को 29 सीटें मिली हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM को 6 सीटें मिली हैं।

मांझी ने एनडीए से कुल 40 सीटों की डिमांड की थी, लेकिन सीट शेयरिंग में उन्हें केवल 6 सीटें मिलीं। इसके बाद मांझी थोड़े नाराज दिखे, लेकिन उम्मीदवारों की सूची जारी कर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा - "विजयी भव:"।

दिल्ली से लौटने के बाद जीतन राम मांझी ने कहा कि वह गया जिले में भी दो सीटों (बोधगया और मखदुमपुर) पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। ये दोनों सीटें चिराग पासवान के खाते में हैं। मांझी ने स्पष्ट किया कि वह अपने उम्मीदवारों को एलजेपी के खिलाफ भी उतारेंगे, जिससे उनका प्रभाव और वोट बैंक मजबूत हो।

क्या है HAM की चुनावी रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि HAM इस बार बिहार के चुनावी मैदान में स्थानीय नेताओं और परिवार के नामांकन की रणनीति के जरिए वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची में दलित, महादलित और महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। यह रणनीति चुनावी मैदान में HAM की पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

इमामगंज, बाराचट्टी और सिकंदरा जैसी सीटों पर HAM के उम्मीदवारों के उतरने से आगामी विधानसभा चुनाव में स्थानीय राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर असर पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि HAM इस बार एनडीए की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और सीटों के बढ़ते प्रभाव से गठबंधन में संतुलन बनाए रख सकता है।

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