2020 में इन्हीं 10 सीटों ने तोड़ा था तेजस्वी का CM बनने का सपना, कहीं 12 तो कहीं 113 वोटों से मिली थी हार
Bihar Election Low Margin Seats: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। चुनावी रणभेरी बज चुकी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने तो अपनी सीट शेयरिंग का फार्मूला फाइनल कर उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाला महागठबंधन (Mahagathbandhan) अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने से हिचक रहा है।
इस हिचकिचाहट के पीछे 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम एक बड़ी वजह हैं। उस चुनाव में कई सीटें इतनी कम वोटों के अंतर से जीती या हारी गई थीं कि उनका परिणाम चौंकाने वाला था। पार्टियों को यह डर सता रहा है कि उम्मीदवार के चयन में जरा सी भी चूक पिछली बार की तरह इस बार भी सत्ता की चाबी छीन सकती है। यही कारण है कि इस बार दोनों प्रमुख गठबंधन उन निर्णायक 'करीबी' सीटों पर विशेष रणनीतिक फोकस कर रहे हैं। आज की इस खास रिपोर्ट में हम उन 10 सीटों का गहराई से विश्लेषण करेंगे, जिन्होंने 2020 में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने से रोक दिया था।

हिलसा (जदयू vs राजद)
अंतर: मात्र 12 वोट।
विश्लेषण: यह पूरे बिहार चुनाव का सबसे करीबी मुकाबला था। राजद प्रत्याशी महज 12 वोटों से हारे, जो पुनर्मतगणना के बाद भी नहीं बदला।
बरबीघा (जदयू vs कांग्रेस)
अंतर: 113 वोट।
विश्लेषण: जदयू की जीत का मार्जिन केवल 113 वोट रहा, जो बिहार के चुनावी इतिहास में सबसे छोटे अंतरों में से एक था।
भोरे (जदयू vs माले)
अंतर: 462 वोट।
विश्लेषण: वामदल (भाकपा माले) के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, जीत 462 वोटों के इस संकीर्ण अंतर से जदयू के खाते में गई।
बछवाड़ा (भाजपा vs भाकपा)
अंतर: 484 वोट।
विश्लेषण: भाजपा ने 500 से भी कम वोटों के अंतर से जीत हासिल की। भाकपा प्रत्याशी की यह करीबी हार महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका थी।
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चकाई (निर्दलीय vs राजद)
अंतर: 581 वोट।
विश्लेषण: राजद प्रत्याशी 581 वोटों से निर्दलीय उम्मीदवार से हारे। अगर यह सीट जीती जाती तो सत्ता के गणित में महागठबंधन को निर्णायक फायदा होता।
बखरी (भाकपा vs भाजपा)
अंतर: 777 वोट।
विश्लेषण: यह सीट भले ही महागठबंधन के खाते में आई, लेकिन भाजपा प्रत्याशी सिर्फ 777 वोटों से पीछे रह गए, जो मुकाबला कितना कड़ा था, यह दर्शाता है।
परबत्ता (जदयू vs राजद)
अंतर: 951 वोट।
विश्लेषण: 1000 से कम के अंतर वाली यह हार जदयू की सत्ता वापसी में सहायक बनी।
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मुंगेर (भाजपा vs राजद)
अंतर: 1,244 वोट।
विश्लेषण: राजद उम्मीदवार 1244 वोटों से हारे। यहाँ 3063 लोगों ने नोटा (NOTA) को वोट दिया था, जो हार के अंतर से दोगुना था, जिसने परिणाम पलट दिया।
महिषी (जदयू vs राजद)
अंतर: 1,630 वोट।
विश्लेषण: राजद के गौतम कृष्णा 1630 वोटों से हारे, जबकि इस सीट पर 3005 नोटा वोट पड़े थे, जो हार-जीत के बीच सबसे बड़ा कारक बना।
परिहार (भाजपा vs राजद)
अंतर: 1,729 वोट।
विश्लेषण: राजद की रितु जायसवाल की यह हार 3589 नोटा वोटों की उपस्थिति में हुई। नोटा के वोट हार के अंतर से कहीं अधिक थे, जिसने भाजपा की जीत सुनिश्चित की।












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