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इंफोसिस ने की कश्मीर में मारे गए 'चाट विक्रेता' के परिवार की मदद, भेजा 2 लाख का चेक

पटना, अक्टूबर 12: जम्मू-कश्मीर में 5 अक्टूबर को आतंकवादियों द्वारा लक्षित हत्याओं में मारे गए 'चाट' विक्रेता वीरेंद्र पासवान के सात सदस्यीय परिवार को कर्नाटक से वित्तीय मदद मिली है। दरअसल इस परिवार को अपना गुजारा चलाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद बेंगलुरु स्थिति देश की जानीमानी टेक कंपनी इंफोसिस उनकी मदद के लिए आगे आई है। कंपनी ने परिवार को 2 लाख रुपए की मदद दी है।

Bihar Chaat Seller Who Died in jammu kashmir Gets Infosys Foundation Aid

बिहार के भागलपुर में जगदीशपुर के पास वडे सैदपुर गांव के रहने वाले वीरेंद्र पासवान कश्मीर में 'चाट' बेचते थे और परिवार में अकेले कमाने वाले थे। न्यूज 18 की खबर के मुताबिक, उनकी मौत के बाद उनका बड़ा परिवार 2 लाख रुपये के कर्ज में डूबा हुआ है। घटना की जानकारी मिलने पर इंफोसिस फाउंडेशन ने परिवार को कर्ज चुकाने में मदद के लिए परिवार को 2 लाख रुपये दिए हैं।

इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति ने बताया, एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझे कश्मीर में मारे गए 'चाट' विक्रेता वीरेंद्र पासवान के बारे में एक क्लिपिंग भेजी थी। मुझे वास्तव में परिवार के लिए खेद हुआ। हमने उनके लिए 2 लाख रुपए का चेक रखा है, जो आज जमा कर दिया जाएगा। हमने इसके लिए पासवान की पत्नी का बैंक विवरण मिल गया है। मूर्ति ने आगे कहा, 'यह बहुत दुख की बात है कि किसी की नफरत ने किसी की जान ले ली। ऐसे में गरीब लोगों को क्या करना चाहिए?

सुधा मूर्ति ने आगे कहा कि, ऐसी स्थिति में मुझे खुशी नहीं होती। मैं परिवार पर से कुछ बोझ कम करने की कोशिश कर रही हूं। यह दुख की बात है जो मुझे इस तरह की घटनाओं से रूबरू कराती है। उस बेचारे ने क्या किया था? वह वहां अपने परिवार को चलाने के लिए काम कर रहा था। उसका परिवार रात का खाना तभी खा सकता था जब वह दिन में पर्याप्त कमाता था। ताकतवर को हर जगह से सहारा मिलता है, गरीब ही हमेशा पीड़ित होता है। एक व्यक्ति एक विशाल परिवार का भरण पोषण कर रहा था और अब उस परिवार ने कमाने वाला खो दिया है, यह बहुत ही खेदजनक स्थिति है।

इंफोसिस फाउंडेशन को धन्यवाद देते हुए पासवान की पत्नी पुतुल देवी ने कहा, पैसा मेरे पति को वापस नहीं ला सकता लेकिन इससे मुझे बच्चों की देखभाल करने में कम से कम मदद मिलेगी। जब मेरे पति ने कश्मीर में काम करने का फैसला किया, तो बहुत से लोगों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी। मेरे पति ने क्या गलत किया? वह केवल ईमानदारी से परिवार का पालन-पोषण करने की कोशिश कर रहे थे। सरकार ने उन अपराधियों को सजा दिलाने के लिए क्या किया है...?"

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