Bihar By Election:क्या बिना JDU के भी तेजस्वी बन सकते हैं मुख्यमंत्री ? ऐसे बदल सकता है समीकरण
Bihar By Election 2022: बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव के प्रचार का काम आज खत्म हो गया है। मोकामा और गोपालगंज में 3 नवंबर को वोटिंग होनी है। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल दोनों सीटों पर जीत के दावे कर रही है। लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस तरह से चुनाव प्रचार से दूरी बनाई है, उसको लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, आधिकारिक स्थिति ये है कि नीतीश एक चोट की वजह से प्रचार करने नहीं गए हैं। दरअसल, चर्चा ये है कि अगर आरजेडी दोनों सीटें जीत गई तो वह बिना जदयू के सहयोग के भी राज्य में सत्ता परिवर्तन करने के निकट पहुंच सकती है, जिससे तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री के पद पर प्रमोट हो सकते हैं।

3 नवंबर के उपचुनावों से बदलेगा समीकरण ?
बिहार में दो सीटों पर हो रहे उपचुनावों ने राजनीतिक समीकरण को अलग चश्में से भी देखने को मजबूर कर दिया है। 3 नवंबर को मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाले महागठबंधन के लिए भी कड़ी परीक्षा की तरह है तो इससे बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के भी संकेत मिल सकते हैं। महागठबंधन की ओर से दोनों सीटों पर नीतीश सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी आरजेडी मैदान में है। लेकिन, जिस तरह से चोट के कारणों से खुद नीतीश ने इससे दूरी बनाई है, उसको लेकर जितने मुंह उतनी बातें सुनने को मिल रही हैं। उसमें से एक यह है कि कहीं ना कहीं नीतीश के मन में '81 विधायकों की ताकत' का डर है!

राजद के '81 विधायकों' का मतलब ?
'81 विधायकों की ताकत' का मतलब ये है कि जिस दिन बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव की आरजेडी के विधायकों की संख्या 81 पहुंच जाएगी, उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने से नीतीश भी नहीं रोक सकेंगे। क्योंकि, इतनी संख्या होते ही 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में लालू यादव की पार्टी 122 के जादुई आंकड़े को छू लेगी। यह गणित तेजस्वी के हक में इस तरह से फिट बैठ सकता है- आरजेडी-81+काग्रेस-19+लेफ्ट-16+हम-4+एआईएमआईएम-1+निर्दलीय-1= 122. मोकामा और गोपालगंज की दोनों सीटों पर राजद ने यदि जीत दर्ज कर ली तो उसके पास 80 विधायक हो जाएंगे।

कुढ़नी के राजद विधायक हुए हैं अयोग्य करार
दअरसल, राजद की एक और सीट खाली हुई है, जिसपर अभी उपचुनाव होना बाकी है। पार्टी के विधायक अनिल कुमार सहनी को धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद हाल ही में उन्हें अयोग्य करार दिया गया है। यानि आने वाले दिनों में कुढ़नी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है, जो कि राष्ट्रीय जनता दल का रास्ता बहुत ज्यादा आसान कर सकता है। बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के 45 एमएलए हैं और बीजेपी 77 विधायकों के साथ एकमात्र विपक्षी दल की भूमिका में है।

तेजस्वी यादव अटकलों को कर रहे हैं खारिज
हालांकि, राजद नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन अटकलों को साफ खारिज कर चुके हैं। उनका दावा है कि नीतीश चोट की वजह से प्रचार से गायब रहे और जेडीयू दोनों सीटों पर राजद प्रत्याशी की मदद कर रही है। उन्होंने सोमवार को कहा था, 'नीतीश कुमार जी महागठबंधन के नेता हैं और आरजेडी के दोनों उम्मीदवार गठबंधन की तरफ से चुनाव मैदान में हैं। वह शारीरिक रूप से भले ही उनके संपर्क में नहीं हैं, लेकिन उनका संदेश उन तक पहुंच रहा है।'

अनंत सिंह की सदस्यता रद्द हो चुकी है
मंगलावर को दोनों सीटों पर प्रचार का अंतिम दिन था। मोकामा में बाहुबली और अपराधी छवि के नेता अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी आरजेडी की उम्मीदवार हैं, जिनके मुकाबले बीजेपी की सोनम देवी चुनाव लड़ रही हैं। वह भी एक और बाहुबली ललन सिंह की पत्नी हैं। मोकामा सीट से आरजेडी विधायक अनंत सिंह को एके-47 और ग्रेनेड रखने के जुर्म में 10 साल की सजा सुनाई गई है। इसी के बाद उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया था। वहीं गोपालगंज में भाजपा की कुसुम देवी के मुकाबले राजद की ओर से मोहन गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर कुसुम देवी के पति और सीटिंग विधायक सुभाष सिंह के निधन की वजह से चुनाव करवाया जा रहा है।












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