बिहार विधानसभा चुनाव 2020: इस बार रैली की भीड़ से वोट का अंदाजा लगाने वाले होंगे निराश
जैसे किसान अपनी लहलहाती फसल को देख कर अघा जाते हैं उसी तरह रैली की भीड़ को देख कर नेता फूले नहीं समाते। चुनावी सभा में जितनी भीड़ उतनी अधिक उम्मीदें। लेकिन Bihar assembly elections 2020 में हालात बिल्कुल जुदा होंगे। इस बार रैली की भीड़ से वोट का अंदाजा लगाने वाले नेताओं को निराश होना पड़ेगा। बिहार विधानसभा का चुनाव चूंकि कई बंदिशों के बीच होगा इसलिए हालत बिल्कुल बदले हुए होंगे। कोरोना गाइडलाइंस के कारण इलेक्शन कैंपेन पर कई रोक लग गयी हैं। अब न पहले की तरह रोड शो होगा न चुनावी सभाएं होंगी। नामांकन दाखिल करने के समय जो नेता लाव-लश्कर लेकर चलते थे, वह भी नहीं दिखेगा। कोराना गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) और जिला पुलिस अधीक्षक पर रहेगी। अगर नियम तोड़े तो दंड का भागी बनना तय।
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अब रोड शो पहले की तरह नहीं
पहले रोड शो में वाहनों का जितना बड़ा काफिला होता था चर्चा उतनी अधिक होती थी। लेकिन Bihar assembly elections 2020 में रोड शो का कारवां बहुत छोटा होगा। सभी गाड़ियां सेनिटाइज होंगी। एक बार में सिर्फ पांच वाहनों को आगे बढ़ने दिया जाएगा। फिर आधा घंटा के बाद अगले पांच वाहनों को गुजरने की इजाजत दी जाएगी। पांच- पांच के सेट में वाहन आधा-आधा घंटा के अंतराल पर गुजरेंगे। यानी रोड शो में पहले की तरह तामझाम नहीं रहेगा। हर गाड़ी में चालक समेत तीन लोगों के बैठने की इजाजत होगी। गाड़ियों में लद कर पहले की तरह जाना संभव नहीं होगा। प्रत्याशी वाहनों की संख्या के आधार पर अब अपना रुतबा नहीं दिखा सकेंगे। कोरोना गाइडलांइस की वजह से अब रोड शो फीका-फीका रहेगा।

मुश्किल से होगी चुनावी सभा
चुनावी सभा या रैली के लिए इतनी शर्तों का पालन करना पड़ेगा कि इसके आयोजन में राजनीति दलों के पसीने छूट जाएंगे। सबसे पहले रैली के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर में आवेदन देना होगा। प्रशासन तय करेगा कि सभा किस मैदान में होगी। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार जितने लोगों की संख्या तय करेगा उतने ही लोग सभा में शामिल होंगे। जिला निर्वाचन अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि मैदान में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए नियत दूरी पर गोल घेरा बना हुआ हो। कोरोना नियंत्रण के नोडल पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मियों की वहां तैनाती रहेगी। जिला पुलिस अधीक्षक सुनिश्चित करेंगे कि तय संख्या से अधिक लोग रैली में शामिल नहीं हों। सभी स्थल पर आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग गेट होंगे। सभी स्थल पर साबुन, सेनिटाइजर और पानी की व्यवस्था रहनी चाहिए। सभा में शामिल होने वाले लोगों के लिए मास्क पहनना अनिनार्य होगा। अब तक रैली में मनमाने तरीके से आने वाले लोगों को इतनी पाबंदियां शायद ही रास आये। इतने झंझट को देख कर रैली में शामिल होने की दिलचस्पी बहुत कम हो जाएगी। जब चुनावी सभा में लोगों की संख्या पहले से तय रहेगी तो नेता क्या खाक रोमांच का अनुभव करेंगे। इतने नियमों का पालन करने के बाद कोई दल कितनी रैलियां कर पाएगा, कहना मुश्किल है।

घर-घर केवल पांच लोग ही करेंगे प्रचार
डोर टू डोर चुनाव प्रचार में प्रत्याशी समेत केवल पांच लोग ही शामिल हो सकेंगे। कोरोना प्रतिबंधों के कारण इस बारह बिहार चुनाव में ऑनलाइन नॉमिनेशन का प्रवाधान है। प्रत्याशी अपना एफिडेविट और जमानत राशि भी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। भरे हुए नामांकन पत्र का प्रिटं आउट निकाल कर उसे रिटर्निंग अधिकारी के पास जमा किया जा सकेगा। नामांकन दाखिल करते समय प्रत्याशी के साथ सिर्फ दो लोगों के कार्यालय में जाने की इजाजत होगी। नामांकन के लिए आते समय प्रत्याशी केवल दो गाड़ियां ही इस्तेमाल कर सकेंगे।

क्या Bihar assembly elections 2020 में कोरोना नियमों का पालन हो पाएगा?
दो दिन पहले लालू यादव के समधी चंद्रिका राय जदयू में शामिल हुए थे। जदयू कार्यालय में उस दिन सत्ता पक्ष के लोगों ने कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कमी नहीं रखी। चंद्रिका राय के समर्थक और जदयू के कार्यकर्ता रगड़ा-रगड़ी करते हुए मिलन समारोह में जोश दिखा रहे थे। एक दूसरे का कंधा पकड़े लोग कुर्सियों पर खड़े हो गये। बड़े नेता वहां मौजूद रहे और सोशल डिस्टेंसिंग की ऐसी की तैसी होती रही। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा था कि हम कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए चुनाव के लिए तैयार हैं। लेकिन हकीकत क्या है ये 20 अगस्त को दिख गया। जब नीतीश कुमार की पार्टी ही नियमों को तोड़ने पर अमादा है तो किसी और के बारे में क्या कहा जा सकता है। बिहार में पिछले कुछ समय से कोरोना के प्रतिबंधों को कठोरता से लागू नहीं किया जा रहा। चर्चा है कि सरकार लोगों के नाराज होने के डर से सख्ती नहीं कर रही है। यहां तक कि कंटेनमेंट जोन और बफर जोन में भी नियमों का पालन नहीं हो पा रहा। सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर अभी भी हाट-बाजार में भीड़ जुट रही है। पुलिस वाले जान कर अंजान बने हुए हैं। क्या चुनाव आयोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन करा पाएगा ? नियम तोड़ने पर अगर चुनाव आयोग कोई एक्शन लेता है तो क्या इससे मतदान भी प्रभावित होगा ? चुनाव प्रक्रिया के सफल संचालन के लिए कई चुनौतियों से जूझना होगा।












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