Bihar News: क्या था भागलपुर अंखफोड़वा कांड, देश के इतिहास के काले पन्ने की दी जाती है संज्ञा, जानिए मामला
Bhagalpur Ankhphodwa Kaand: देश के इतिहास के काले पन्ने में दर्ज अंखफोड़वा कांड एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। वजह है 1979-1980 के दौरान देश में हुए सबसे चर्चित कांड (भागलपुर अंखफोड़वा कांड) के मुख्य पीड़ित की मौत।
शुक्रवार को उमेश प्रसाद यादव की मौत हो गई। इसके बाद ही कानून के स्याह कारनामे का इतिहास फिर से चर्चा का विषय बन गया है। एक सप्ताह से उमेश प्रसाद यादव बीमार चल रहे थे, डॉ. हेमशंकर शर्मा की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।

उमेश यादव की तबीयत में सुधार होने की वजह से उनके परिवार वाले घर ले आये थे। शुक्रवार को अचानक तबीयत ख़राब हुई। मायागंज (बरारी थानाक्षेत्र) अपने आवास पर उन्होंने आखिरी सांस ली। मौत की ख़बर के बाद काफी तादाद में बरारी, मायागंज, जवारीपुर, खंजरपुर आदि जगहों से लोग पहुंचे। बरारी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हुआ।
आइए जानते हैं कि अंखफोड़वा कांड क्या था, जिसे याद करने से आज भी लोगों की रूह कांप जाती है। देश के इतिहास में यह कानून के अध्याय का स्याह पन्ना था। कानून की धज्जियां उड़ाते सज़ा के प्रावधान को किनारे रखते हुए, पुलिस कर्मियों ने आरोपितों के साथ ज्यादती की थी।
आरोपितों को पकड़ कर पहले उनके आंखों को टकुआ से फोड़ा गया और तेज़ाब डालकर हमेशा के लिए अंधा बना दिया गया। पुलिस की अभिरक्षा में हुए खौफ़नाक अंखफोड़वा कांड में 33 लोगों की आंखें फोड़ी गई, तेजाब डाला गया। इस दर्दनाक कहानी पर कई फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी बनी हैं।
गंगाजल फिल्म में भी भागलपुर के अंखफोड़वा कांड का चित्रण किया गया है। पीड़ितों की वकालत करने वाले वकील राम कुमार मिश्रा की मानें तो यह वह लोग थे, जिनपर वारदात करने आरोप लगे थे। एक बार पुलिस आरोपितों को पेशी के लिए कोर्ट ले गई थी। इस दौरान उनकी निगाह आरोपियों की आंख पर पड़ी।
आरोपियों की आंख से खून निकलने के मामले में पहल की गई, पीड़ित से पूछने पर उसने पुलिस की ज्यादती की दर्दनाक कहानी बताई। कुल 33 ओरपितों के साथ पुलिस की बर्बरता की खबर (अंखफोड़वा कांड) सुर्खियां बनने लगी। पुलिस का ये गुप्त ऑपरेशन था। गंगा किनारे बसे भागलपुर 'तेज़ाब कांड' का इसलिए ऑपरेशन 'गंगाजल' नाम रखा गया था। अपने ज़माने के चाकूबाज़ और लुटेरों के साथ अंखफओड़वा कांड हुआ था।
भागलपुर के चर्चित अंखफोड़वा कांड मामला उजागर होने पर एक दर्जन पुलिस पदाधिकारियों को सस्पेंड किया गया था। 15 पुलिस अधिकारियों को आरोपित करार देते हुए न्यायिक कार्रवाई शुरू हुई थी। इसमें 14 पुलिस अफसरों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
इस कांड पर लोग दो गुटों में बंट गए थे, एक जो अंखफोड़वा कांड को सही बता रहा था, वहीं दूसरा गुट पुलिस की बर्बरता के खिलाफ में था। इस कांड को सही मानने वाले गुट ने अंखफोड़वा कांड की शुरुआत करने वाले देवी बाबू धर्मशाल में सम्मानित भी किया। घड़ी और रेशमी वस्त्र तोहफे में दिया गया। वहीं दूसरे गुट ने इस घटना के खिलाफ में प्रदर्शन मार्च भी निकाला था।
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