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Bat House: 25 एकड़ ज़मीन में है लाखों चमगादड़ों का घर, परिवार की तरह रखते हैं ग्रामीण

Bat House चमगादड़ को लेकर लहरनियां गाव के लोगों की कई मान्यता भी है, ग्रामीण चमगादड़ों को शुभ मानते हैं। उनका मानना है कि साल 2008 में कोसी में भयानक बाढ़ आने से आस-पास के गांव डूब गए थे, लेकिन यह इलाका चमगादड़ों की...

Bat House : वन्यजीव प्रेमियों की कई कहानियां आपने सुनी और देखी होंगी। आज हम आपको बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले एक परिवार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने चमगादड़ों को सुरक्षित रखने के लिए 25 एकड़ ज़मीन पेड़ पौधे लगाए हैं। उनका परिवार चमगादड़ों का देखभाल भी करता है, इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखता है कि कोई चमगादड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाए। वहीं ग्रामीण भी चमगादड़ों को शुभ मानते हुए उनकी सेवा करते हैं। यह पढ़ने तो लग रहा है कि जैसे किसी फिल्म की कहानी है, लेकिन नहीं यह हकीकत है। आइए जानते हैं चमगादड़ों के प्रति प्रेम के पीछे की पूरी कहानी क्या है ?

लहरनियां गांव में रहते हैं लाखों चमगादड़

लहरनियां गांव में रहते हैं लाखों चमगादड़

कोरोना काल में यह कहा जा रहा था कि चमगादड़ों की वजह से लोग कोविड से संक्रमित हो रहे हैं। चमगादड़ों को देखते ही लोगों में दहशत का माहौल बन जाता था, लेकिन बिहार के इस गांव की तस्वीर देखने के बाद आप भी कहेंगे कि चमगादड़ों से खतरा था तो फिर लोग चमगादड़ की सेवा क्यों कर रहे हैं, उसे तो भगा देना चाहिए। इन सवालों के साथ जब लहरनियां गांव(त्रिवेणीगंज अनुमंडल, सुपौल जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर) जाएंगे तो वहां का नज़ारा देख आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। इस गांव में चमगादड़ को लोग खुशनुमा माहौल का प्रतीक मानते हैं। इसके साथ ही उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाए उसका भी ध्यान रखते हैं।

प्रोफेसर अजय सिंह बनाने चाहते हैं बैट सैंक्चुअरी

प्रोफेसर अजय सिंह बनाने चाहते हैं बैट सैंक्चुअरी

लहरनियां गांव निवासी प्रोफेसर अजय सिंह चमगादड़ों के लिए बैट सैंक्चुअरी (अभयारण्य) बनाने की कोशिश में हैं। ग्रामीणों की मानें तो उनके पूर्वजों ने बगीचे में चमगादड़ों को पनाह दी थी। अपने पूर्वजों के परंपरा को ही प्रोफेसर अजय कायम ने रखा है। चमगादड़ों को सुरक्षित रखने के लिए 25 एकड़ के बगीचे में पेड़ लगाए गए हैं ताकि चमगादड़ को रहने में कोई तकलीफ नहीं हो। इतना ही नहीं, अजय और उनका परिवार लाखों की तादाद में रह रहे चमगादड़ों की देखभाल भी करते हैं। इसके साथ ही कोई चमगादड़ों को नुक्सान नहीं पहुंचाए इस पर भी नज़र रखते हैं।

चमगादड़ को शुभ मानते हैं ग्रामीण

चमगादड़ को शुभ मानते हैं ग्रामीण

चमगादड़ को लेकर लहरनियां गाव के लोगों की कई मान्यता भी है, ग्रामीण चमगादड़ों को शुभ मानते हैं। उनका मानना है कि साल 2008 में कोसी में भयानक बाढ़ आने से आस-पास के गांव डूब गए थे, लेकिन यह इलाका चमगादड़ों की वजह से महफूज़ था। हाल ही आये में भूकंप के संकेत भी चमगादड़ द्वारा ही मिले थे। वहीं ग्रामीणों का मानना है कि चमगादड़ों से महामारी नहीं फैलती है, उनकी वजह से इलाके में खुशहाली रहती है।

'सूरज डूबने के वक्त करते हैं आसमान की सैर'

'सूरज डूबने के वक्त करते हैं आसमान की सैर'

ग्रामीणों की मानें तो लहरनियां गांव में शाकाहारी चमगादड़ रहते हैं। अन्य चमगादड़ों के मुकाबले यह दुर्लभ प्रजाती के चमगादड़ हैं। यह चमगादड़ अंधेरे में ही नहीं बल्कि सूरज डूबने के वक्त भी आसमान में सैर करते हैं, सुबह होते ही बागान में लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चमगादड़ो से कभी भी फसल या फलों को नुकसान नहीं पहुंचा है। चमगादड़ पूरे गांव वालों के लिए शुभ है, इसे देखने के लिए दूसरे गांव और जिलों से लोग आते हैं। अन्य लोगों को भी यहां नज़ारा काफी अच्छा लगता है।

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