Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बंजर जमीन भी अब उगलेगी सोना, जानिए किस खेती पर जोर दे रहे हैं बिहार के किसान ?

बिहार में किसान पारंपरिक खेती की तकनीक के जरिए औषधीय पौधों की खेती पर ज़ोर दे रहे हैं।

पटना, 10 अप्रैल 2022। बिहार में किसान पारंपरिक खेती की तकनीक के जरिए औषधीय पौधों की खेती पर ज़ोर दे रहे हैं। पहले किसान उर्वरा खेत से लाखों की कमाई कर ही रहे थे, अब औषधीय पौधों की खेती से बंजर ज़मीन भी सोना उगलेगी। किसान जिस औषधीय पौधे की खेती कर रहे हैं मार्केट में इसकी डिमांड काफ़ी ज़्यादा है। इसी को देखते हुए अब किसान औषधीय खेती की तरफ़ रुख कर रहे हैं। अश्वगंधा और सतावर बेचकर किसानों को अच्छा मुनाफ़ा भी हो रहा है।

अश्वगंधा और सतावर की बढ़ी डिमांड

अश्वगंधा और सतावर की बढ़ी डिमांड

कोरोना काल में पूरा देश महामारी से जूझ रहा था, उस समय जिस भी इंसान को कोरोना के इलाज के नाम पर कोई भी दवाई दे दो वह उसका इस्तेमाल करने लगे थे। क्योंकि लोगों को सटिक इलाज नहीं मिल पा रहा था। इसी कड़ी में लोगों ने कोरोना काल में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए अश्वगंधा और सतवार का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। यही वजह है कि अब कोरोना के मामले में कमी आने के बाद भी बाज़ार में लिए अश्वगंधा और सतवार की डिमांड बरक़रार है। कृषि विश्वविद्यालय किसानों को समृद्ध बनाने के लिए औषधीय गुण वाले पौधों कि खेती करने पर जोर दे रहा है।

मोटी कमाई का जरिया बनेगी औषधीय खेती

मोटी कमाई का जरिया बनेगी औषधीय खेती

प्रयोगिक तौर पर 2 एकड़ बंजर और गैर उपयोगी जमीन पर नगरा प्रखंड (सारण जिला) में औषधीय खेती की जा रही है। औषधीय खेती की वजह से किसान भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। बिहार के सारण जिला के नागरा प्रखंड (रसूलपुर अरवा) एससीएसपी के तहत औषधीय खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस्लामपुर के अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि बंजर जमीन पर औषधीय खेती करना मुमकिन है। किसान 1 एकड़ जमीन पर औषधीय खेती कर पचास हजार से पांच लाख रुपये तक आसानी से कमा सकते हैं।

किसान ने बताए औषधीय खेती के फ़ायदे

किसान ने बताए औषधीय खेती के फ़ायदे

औषधीय खेती विकास संस्थान ने औषधीय खेती के फायदे बताये। उन्होंने बताया कि 2 एकड़ खेत में एक साथ सतवार और अश्वगंधा की खेती की गई। अब अश्वगंधा हार्वेस्टिंग के लिए तैयार है। अश्वगंधा की खेती से उच्च कोटि का बिना किसी ब्रांच के पेंसिलनुमा जड़ निकला है जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद होगा। 1 एकड़ खेत में अश्वगंधा का 1 लाख तक का उत्पादन किया जा सकता है। 18 महीने बाद सतावर की हार्वेस्टिंग की जाएगी। किसान को सतावर से लगभग 5 से 7 लाख रुपये तक कमाई हो सकती है। ग़ौरतलब है कि इस फसल के उत्पादन के बाद औषधीय खेती विकास संस्थान बायबैक की गारण्टी दिलवाएगी। जिससे किसानों का फ़सल तैयार होने के साथ ही खरीद लिया जाएगा। औषधीय खेती करने के लिए सारण की मिट्टी अति उत्तम है। किसान इसकी खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।

ये भी पढ़ें: बिहार: स्टेट हाईवे के निर्माण से बदल जायेगा 13 ज़िलों का नक्शा, क्या शामिल है आपके ज़िले का नाम ?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+