Bihar Assembly Election 2025: बिहार चुनाव की नई पटकथा, PK की रणनीति क्या, NDA-महागठबंधन के बीच फंसेगा जनादेश?

Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत एक बार फिर करवट ले रही है और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) इसकी धुरी बनते दिख रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में माहौल गरम है, और ऐसे में पीके की जनसभाएं, पदयात्राएं और हालिया बयान साफ संकेत दे रहे हैं कि उनकी सियासी रणनीति अब पूरी तरह हमलावर मोड में आ चुकी है।

मोदी के 'मोतिहारी-मुंबई' बयान पर हमला
पीके ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर चुटकी ली, जिसमें उन्होंने मोतिहारी को मुंबई जैसा बनाने की बात कही थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, मोदी जी यही चाहते हैं कि बुड़बक बनकर लोग मोतिहारी को मुंबई बनने का सपना देखें और उनको वोट देते रहें। यह बयान न सिर्फ बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पीके अब सीधे तौर पर भाजपा के किले में घुसकर सियासी चोट करने की तैयारी में हैं।

Assembly Election 2025 Bihar

संजय जायसवाल पर भी निशाना
भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल को लेकर पीके ने कहा कि वे आजकल अपने बड़े भाई दिलीप जायसवाल के पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं और खुद छुपकर बैठे हैं। यह टिप्पणी पार्टी के अंदरूनी समीकरण और परिवारवाद पर भी प्रहार है, जो पीके के लिए भाजपा विरोध का एक स्थायी एजेंडा बनता जा रहा है।

सुरक्षा और अपराध पर बेबाक पीके
राज्य में बढ़ते अपराध और खुद की सुरक्षा पर पूछे गए सवाल पर पीके ने दो टूक जवाब दिया कि, मुझे कोई डर नहीं है। पिछले 3 साल से बिना किसी सरकारी सुरक्षा के चल रहा हूं, क्योंकि बिहार के युवा हमारे साथ हैं। यह बयान एक तरफ जहां खुद को जनता का नेता साबित करने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह सरकार की कानून व्यवस्था पर सीधा आरोप भी है।

क्या PK की रणनीति जमीन पर असर दिखा रही है?
जन सुराज की रणनीति इस बार अलग दिख रही है। यह महज सड़कों पर पदयात्रा नहीं, बल्कि सधी हुई नेरेटिव पॉलिटिक्स है। पीके अब न सिर्फ मुद्दों पर बात कर रहे हैं, बल्कि सीधे नाम लेकर नेताओं पर हमला कर रहे हैं। पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमला बोल रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय भाजपा नेताओं की कमजोरियों को उजागर करने से भी नहीं चूक रहे।

बिहार की चुनावी बिसात में बड़ा उलटफेर
प्रशांत किशोर युवा वर्ग को एक फ्रंटलाइन वोट बैंक के रूप में संबोधित कर रहे हैं। ये तीनों ही जन सुराज की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जो 2025 में बीजेपी और RJD दोनों को कड़ी चुनौती दे सकती है। अगर पीके 20 से 30 सीटों पर भी दमदार उम्मीदवार खड़ा कर सके, तो बिहार की चुनावी बिसात में बड़ा उलटफेर संभव है।

प्रशांत किशोर राजनीतिक खिलाड़ी!
भाजपा और महागठबंधन, दोनों ही के विशेषकर शहरी मध्यमवर्ग और युवाओं के बीच परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन क्या केवल आलोचना और पदयात्रा से जनाधार बन पाएगा? ये सवाल अभी भी बरकरार है। प्रशांत किशोर ने यह तो साफ कर दिया है कि वे अब राजनीतिक रणनीतिकार नहीं, बल्कि राजनीतिक खिलाड़ी बन चुके हैं।

बिहार चुनाव 2025 में उनकी सक्रियता भाजपा के लिए सीधी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि क्या 'जन सुराज' बिहार की राजनीति में एक तीसरा विकल्प बन पाएगा, या फिर यह भी एक प्रयोग बनकर रह जाएगा? बहरहाल प्रशांत किशोर पूरी तरह से चुनावी मोड में एक्टिव है इसका कितना नफा नुकसान होगा यह तो चुनावी परिणाम के बाद ही पता चलेगा।

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