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Bihar Election 2025: 'बिना शर्त माफी मांगिए', आखिर प्रशांत किशोर को किसने भेजा 100 करोड़ की मानहानि नोटिस

Bihar Election 2025 (Prashant Kishor): बिहार की सियासत में इन दिनों बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। चुनावी मौसम करीब आते ही नेताओं के बीच जुबानी जंग चरम पर है। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी और जन सुराज आंदोलन के नेता प्रशांत किशोर आमने-सामने आ गए हैं।

मामला इतना गरमाया कि चौधरी ने प्रशांत किशोर को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस थमा दिया। बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर झूठ फैला रहे हैं।

Bihar Election 2025 Prashant Kishor

मंत्री ने कहा कि प्रशांत किशोर की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस घबराहट का नतीजा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी -"अगर बिना शर्त माफी नहीं मांगी गई तो कानूनी अंजाम भुगतने को तैयार रहिए।"

मामला कहां से शुरू हुआ?

19 सितंबर को प्रशांत किशोर ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि अशोक चौधरी और उनके परिवार ने 200 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का खेल किया है। उन्होंने इसे "बेनामी सौदा" बताते हुए कई बड़े नामों को इस प्रकरण से जोड़ा। यही आरोप अब बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा विवाद बन गया है।

प्रशांत किशोर के आरोप: "2 साल में 200 करोड़ की जमीन"

प्रशांत किशोर ने कहा कि चौधरी परिवार की बेटी और किशनगंज से सांसद शांभवी चौधरी की सगाई से लेकर शादी तक महज दो साल में 200 करोड़ की जमीन खरीदी गई।

उनका दावा था कि -38.44 करोड़ की पांच जमीनें खरीदी गईं। लेन-देन में किशोर कुणाल की पत्नी अनीता, पूर्व आईएएस जियालाल आर्या और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की मां के नाम भी सामने आए।

चौधरी दंपति के अकाउंट में ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खातों से पैसा गया। पीके ने अशोक चौधरी को "बिहार का सबसे भ्रष्ट नेता" बताते हुए कहा कि ये सौदे सिर्फ कागज पर छोटे दिखाए गए, जबकि असली भुगतान हवाला या दूसरे चैनलों से किया गया।

'बेटी के नाम जमीन ट्रांसफर, पैसों का खेल'

प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि 2019 में मंत्री के निजी सचिव योगेंद्र दत्त के नाम पटना के बिक्रम में 23 कट्ठा जमीन खरीदी गई। फिर 2021 में वही जमीन मात्र 34 लाख रुपये में शांभवी चौधरी (अशोक चौधरी की बेटी) के नाम कर दी गई।

प्रशांत किशोर का कहना है कि असल भुगतान कहीं और से हुआ और इनकम टैक्स नोटिस आने के बाद इस सौदे को छुपाने के लिए 25 लाख रुपये का एक और ट्रांसफर किया गया।

अशोक चौधरी की सफाई: "झूठ और भ्रम फैलाया जा रहा है"

अशोक चौधरी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर पब्लिसिटी पाने के लिए झूठ गढ़ रहे हैं।
अशोक चौधरी ने कहा, वे जानबूझकर समाज में गलत संदेश फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इससे पहले भी मैंने उनके खिलाफ मानहानि का केस किया था, और अब फिर अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।" मंत्री का आरोप है कि कोर्ट से नोटिस आने के बाद पीके डर गए और घबराकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेबुनियाद बातें करने लगे।

चुनावी मौसम में गरमा गई जंग

बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है और जन सुराज आंदोलन के नेता प्रशांत किशोर इस बार पूरी ताकत के साथ सियासी मैदान में उतरे हैं। वहीं, जेडीयू नेताओं का मानना है कि पीके बेवजह विवाद खड़ा कर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच ₹100 करोड़ के मानहानि नोटिस ने राजनीतिक पारा और चढ़ा दिया है। अब सबकी नजरें अदालत पर हैं कि वहां से अगला कदम क्या निकलता है।

साफ है कि बिहार की राजनीति में "PK बनाम अशोक चौधरी" का यह टकराव अभी और तूल पकड़ेगा। चुनावी सीज़न में ऐसे विवाद ही बहस और सुर्खियों का ईंधन बनते हैं।

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