Begusarai News: कोर्ट से मिली ज़मानत, फिर भी उठा ले गई ‘सिघौल पुलिस’, पत्नी से कहा- पैसे लाओ, पति को ले जाओ

Begusarai News: बिहार के बेगूसराय जिले से एक बार फिर खाकी के दामन पर दाग़ लगने वाली ख़बर खबर सामने आई है, जहां लोग पुलिस की कार्यशैली सवालिया निशान लगा रहे हैं। वहीं इस मामले में ग्रामीणों में भी काफी रोष है, आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला।

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    कोर्ट से मिली ज़मानत, फिर भी उठा ले गई ‘सिघौल पुलिस’, पत्नी से कहा- पैसे लाओ, पति को ले जाओ

    अमन कुमार 13 दिसंबर 2024 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश- (II) चंचल तिवारी के न्यायालय से जमानत मिली। इसके बाद भी सिंघौल थाना की पुलिस उसे घर से उठा ले गई। परिजनों का आरोप है कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई है। पुलिस हिरासत में ही उसकी तबीयत बिगड़ गई।

    arun Ram Granted Bail Yet Detained by singhaul Police in Controversial Begusarai Incident bihar news

    सिंघौल थाना इलाका के उलाव वार्ड -03 निवासी अरुण राम के 23 वर्षीय पुत्र अमन कुमार को पुलिस सिंघौल स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गई। जहां उसका इलाज कराया गया। परिजनों ने बताया कि सिंघौल थाने की पुलिस ने अमन कुमार को बीते 15 दिसंबर को चार बजे शाम में पुलिस उठाकर ले गई।

    सिंघौल थाना पुलिस ने उसे उलाव स्थित घर से गिरफ्तार किया था। अमन कुमार की पत्नी खुशबू कुमारी ने बताया कि 13 दिसंबर को बेगूसराय न्यायालय से उनके पति जमानत मिल चुकी है। इसके बावजूद सिंघौल पुलिस उसे जबरन उठाकर थाने ले गई, जहां उसके साथ बेरहमी से मारपीट हुई, इससे तबीयत बिगड़ गई।

    अमन की बिगड़ती तबीयत देख पुलिस आनन फानन में सिंघौल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी हालात गंभीर बनी हुई है। जब मैं अपने पति अमन कुमार से मिलने पार्थ हॉस्पिटल गई तो वहां मौजूद ड़ॉक्टर और पुलिस ने मुझसे पचास हजार रूपिये का डिमांड किया। कहा रुपया लाओ पति को घर ले जाओ।

    जब परिजन अमन कुमार से मिलने जाता है तो उसे पुलिस धक्का मार कर भगा देता है और कहता है कि ज्यादा बोलोगे तो तुम्हें भी जेल में बंद कर देंगे। पत्नी खुशबू कुमारी ने अपने पति के साथ किसी बड़ी अनहोनी घटना होने की आशंका जाहिर की है।

    आखिर सवाल ये उठता है कि न्यायालय से जमानत मिलने के बाद भी उस शख्स को पुलिस गिरफ्तार क्यों कर रखी है?आखिर इसके पीछे का कारण क्या है इस मामले में पुलिस कुछ भी बताने से परहेज क्यों कर रही है।

    अगर यह शख्स कोई अपराध किया है तो उसे 24 घंटे के अधिक समय तक थाने में क्यों पुलिस रखी है? अगर हिरासत में व्यक्ति की तबीयत खराब होती है तो उसे संबंधित सरकारी अस्पताल ले जाया जाता है लेकिन पुलिस लीपा- पोती करते हुए उसे एक एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया? ये तमाम सारी सवालें हैं जो पुलिस को कटघरे में खड़ी कर रही है।

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