Bihar Political Crisis: पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की बढ़ी बार्गेनिंग पॉवर, विधायक 4 मंत्री पद चाहिए 2

Political Bihar In Bihar: बिहार में रविवार को सत्ता परिवर्तन होने की चर्चा तेज़ हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाजपा के साथ 2020 के फॉर्मूले पर सहमति बन चुकी है। इसी क्रम में बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का भी क़द बढ़ गया। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के 4 विधायक हैं, लेकिन बिहार में सत्ता परिवर्तन के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है।

अब आप सोच रहे होंगे की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक, बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का अचानक क़द कैसे बढ़ गया। तो आइए समझते हैं पूरा मामला। दरअसल सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज़ होते ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पहले तो सीएम नीतीश को साथ लाने की कोशिश की।

4 MLA, want ministerial 2 posts, Jitan Ram Manjhi bargaining power increased Bihar Political Crisis:

लालू प्रसाद यादव ने कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करने की कोशिश की लेकिन कोई बात नहीं हो पाई। इसके बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक यह खबर भिजवाई गई कि वह अपना रुख साफ करें। इस पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

सीएम नीतीश कुमार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने पर लालू प्रसाद यादव समझ गए कि, चुनावी मौसम में नीतीश कुमार सियासी झटका दे सकते हैं। ऐसे लालू यादव भी आसानी से सत्ता गंवाने के मूड में नहीं हैं, इसलिए उन्होंने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी को अपने साथ लाने की कोशिश की।

लालू प्रसाद यादव ने चार विधायकों की पार्टी (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के संरक्षक जीतन राम मांझी को सीएम पद का ऑफर तक दे दिया। इसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी ने कॉल कर इंडिया गठबंधन में शामिल होने का भी न्योता दे दिया। इस तरह जीतन राम मांझी का क़द और बढ़ गया।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का कद बढ़ने के साथ ही बार्गेनिंग पॉवर भी बढ़ गया। इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के विधायक सिर्फ चार हैं, और उन्होंने नई सरकार बनने पर अपनी पार्टी के कोटे से 2 मंत्री की मांग पहले ही कर दी।

बिहार में बहार है, सिर्फ नीतीशे कुमार है, यह पोस्टर पहले जदयू द्वारा लगाया जाता था, लेकिन अब बिहार में बहार है, मांझी बिना सब बेकार है के पोस्टर लगाए गए हैं। इससे ही साफ हो गया है कि जीतन राम मांझी की बार्गेनिंग पॉवर बढ़ चुकी है। अगर एनडीए में उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह राजद के साथ भी जा सकते हैं।

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