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Bihar Chunav 2025: दूसरे चरण में नीतीश कैबिनेट की साख दांव पर,11 मंत्रियों और 3 महिला चेहरों की सियासी परीक्षा

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान के साथ कई दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला होने जा रहा है। इनमें 11 मंत्री और दो पूर्व उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस चरण में नीतीश सरकार की तीन महिला मंत्रियों (रेणु देवी, शीला मंडल और लेसी सिंह) की सियासी परीक्षा भी होगी।

नीतीश की तीन महिला मंत्रियों की सियासी परीक्षा
महिला वोटरों की सक्रियता और अति पिछड़ा वर्ग की निर्णायक भूमिका इस चरण के नतीजों को गहराई से प्रभावित करेगी। तीनों महिला मंत्री (रेणु देवी, शीला मंडल और लेसी सिंह) अपनी सीटों पर साख बचाने में जुटी हैं। इनमें से दो जदयू से और एक भाजपा से हैं। इन तीनों सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प बन गया है क्योंकि जन सुराज जैसी नई ताकतों ने पारंपरिक समीकरणों में खलल डाल दिया है।

Bihar Chunav 2025

रेणु देवी: बेतिया में कांटे की लड़ाई
पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान पशुपालन मंत्री रेणु देवी बेतिया से मैदान में हैं। भाजपा की कद्दावर नेता मानी जाने वाली रेणु देवी का मुकाबला इस बार कांग्रेस के बसी अहमद, निर्दलीय रोहित शिकारिया और जन सुराज के अनिल कुमार सिंह से है।

रेणु देवी पांच बार विधायक रह चुकी हैं और इस बार छठी बार मैदान में हैं, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर की चर्चा जोरों पर है। प्रशांत किशोर के जन सुराज अभियान ने भी चुनावी समीकरणों को बदलने का काम किया है। हालांकि प्रधानमंत्री की सभा और संगठन की मजबूती उनके लिए सहारा साबित हो सकती है।

शीला मंडल: फुलपरास में त्रिकोणीय संघर्ष
मधुबनी जिले के फुलपरास से परिवहन मंत्री शीला मंडल एक बार फिर चुनाव लड़ रही हैं। 2020 में उन्होंने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को करीब 11 हजार वोटों से हराया था। इस बार कांग्रेस ने सुबोध मंडल को टिकट दिया है जबकि जन सुराज के जलेंद्र मिश्रा मैदान में हैं।

अति पिछड़ा वर्ग की बहुलता इस सीट को खास बनाती है। शीला मंडल का कहना है कि नीतीश कुमार ने महिलाओं और गरीबों के लिए ऐतिहासिक काम किए हैं, जिससे जनता दोबारा एनडीए को मौका देगी। मगर यहां मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता है।

लेसी सिंह: धमदाहा में सीमांचल की जंग
पूर्णिया जिले के धमदाहा से खाद्य आपूर्ति मंत्री लेसी सिंह लगातार पांच बार विधायक रह चुकी हैं। इस बार उनकी चुनौती बढ़ी है क्योंकि पूर्व जदयू सांसद संतोष कुशवाहा अब आरजेडी के टिकट पर मैदान में हैं। जन सुराज ने बंटी यादव को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। सीमांचल में ओवैसी फैक्टर और मुस्लिम-यादव समीकरण इस सीट पर निर्णायक साबित हो सकते हैं। बावजूद इसके, लेसी सिंह की स्थानीय पकड़ और प्रशासनिक छवि उन्हें बढ़त दिला सकती है।

वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव का भरोसा 'काम पर'
सुपौल से लगातार आठ बार विधायक रह चुके ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव इस बार नौवीं बार मैदान में हैं। उनका कहना है कि बिहार में विकास के हर मोर्चे पर काम हुआ है-24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल और सड़क नेटवर्क। लेकिन मतदाता अब इन दावों की सच्चाई परखेंगे।

नीतीश मिश्रा, जमा खान और जयंत राज भी आज़मा रहे दांव
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा झंझारपुर से मैदान में हैं, जबकि जदयू के मुस्लिम मंत्री जमा खान चैनपुर से फिर किस्मत आजमा रहे हैं। भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से जदयू प्रत्याशी हैं और कांग्रेस के जितेंद्र सिंह से भिड़ रहे हैं। इन तीनों के लिए भी मुकाबला आसान नहीं कहा जा सकता।

सुमित कुमार सिंह और नीरज बबलू की मजबूती
चकाई से सुमित कुमार सिंह इस बार जदयू के टिकट पर लड़ रहे हैं, लेकिन निर्दलीय बगावत ने उन्हें परेशान किया है। वहीं, छातापुर से नीरज कुमार बबलू लगातार जीतते आए हैं और क्षेत्र में 'दबंग' छवि बनाए हुए हैं। बाढ़ प्रबंधन और विकास कार्य उनके पक्ष में जा सकते हैं।

महिला प्रतिनिधित्व: अभी लंबा सफर बाकी
पिछले छह विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की जीत का प्रतिशत 10% से आगे नहीं बढ़ पाया है। 2025 में कुल 255 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, कुल उम्मीदवारों का महज 9.75%। जबकि मतदान में महिलाओं ने पुरुषों से 7.5% अधिक भागीदारी दिखाई है। जन सुराज और बसपा ने सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवार उतारे हैं (25 और 26), जबकि भाजपा ने 12, जदयू ने 13, और कांग्रेस ने केवल 5 महिलाओं को टिकट दिया है।

महिला वोटों पर नीतीश का भरोसा
पहले चरण में महिलाओं ने रिकॉर्ड मतदान कर सियासी संदेश दे दिया है। नीतीश कुमार के लिए यह सबसे बड़ा संबल है, क्योंकि उन्होंने महिलाओं को सशक्तिकरण और अति पिछड़ा वर्ग के लिए नीतियों पर सबसे अधिक जोर दिया है। तीनों महिला मंत्रियों का भविष्य इस चरण में तय होगा और इसी से तय होगा कि क्या नीतीश मॉडल अभी भी बिहार की महिलाओं के दिल में असर रखता है या अब बदलाव की बयार तेज हो चुकी है।

बिहार चुनाव के दूसरे चरण की सबसे बड़ी कहानी यही है कि सत्ता में बैठे 11 मंत्रियों और तीन महिला चेहरों का इम्तिहान, महिलाओं का बढ़ता मतदान प्रतिशत जहां उम्मीदें जगाता है। वहीं जन सुराज जैसे नए विकल्प पुराने समीकरणों को हिला रहे हैं। 11 नवंबर को केवल मत नहीं पड़ेंगे, बल्कि नीतीश सरकार के नेतृत्व और जनाधार की परीक्षा भी होगी।

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