2024 में क्या नीतीश पंडित नेहरू वाली सीट से चुनाव लड़ेंगे ? इस सवाल पर क्या बोल गए बिहार के मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार को 2024 के आम चुनाव में साझा कैंडिडेट के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। नीतीश ने कहा, "मैं अपने लिए कुछ नहीं कर रहा, ऐसी खबरों से स्तब्ध हूं।" 2024 lok sabha elections bihar cm nitish kumar Phulpur seat
पटना, 20 सितंबर : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2024 में उन्हें विपक्ष का पीएम कैंडिडेट बताने वाली खबरों पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा वे अपने लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। नीतीश ने अपनी कथित महत्वाकांक्षा के बारे में एक और बार खंडन जारी कर कहा, 2024 में नीतीश कुमार फूलपुर से संसदीय चुनाव लड़ेंगे, ऐसी रिपोर्ट पर हैरान हूं। उन्होंने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है।"

नीतीश पंडित नेहरू की सीट से लड़ेंगे ?
नीतीश ने डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं युवा पीढ़ी के लिए काम करना चाहता हूं और उनका भविष्य सुनिश्चित करना चाहता हूं। मैं अपने लिए कुछ नहीं कर रहा हूं।" गौरतलब है कि फूलपुर संसदीय क्षेत्र पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस सीट से एक बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
हरियाणा में विपक्षी एकता दिखेगी !
दिलचस्प है कि जब से जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भाजपा का अलगाव हुआ है, नीतीश कुमार 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपोजिश कैंडिडेट समझे जा रहे हैं। हालांकि, नीतीश अपनी उम्मीदवारी की खबरों को कई बार खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कई मौकों पर ऐसी खबरों को सिरे से खारिज किया है। आने वाले रविवार को नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एक रैली में भाग लेने के लिए हरियाणा की यात्रा करेंगे। इसमें विपक्षी दलों के कई नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
2024 में विपक्ष का पीएम कैंडिडेट
आम चुनाव में नीतीश की उम्मीदवारी से जुड़ी खबरों में उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी की तुलना में उत्तर भारत में नीतीश की स्वीकार्यता के आधार पर उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। यह भी दिलचस्प है कि विपक्षी दलों के बीच किसी भी चेहरे को साझा उम्मीदवार बनाने की सहमति नहीं बनी है। पार्टियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अधिकांश दल फिलहाल ऐसी किसी भी समझ से दूर हैं।
संयोजक की भूमिका में नीतीश
सीपीएम के सीताराम येचुरी से लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जैसे नेताओं को कहते सुना गया है कि चुनाव के बाद और बहुमत मिलने पर सभी की सहमति से प्रधानमंत्री चुना जाएगा। तमाम सियासी हलचल के बीच नीतीश कुमार केवल यह स्वीकार करते हैं कि उनकी राष्ट्रीय भूमिका 2024 में भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्ष को एकजुट करने तक ही सीमित है।
नीतीश बाकी नेताओं से आगे !
हाल ही में दिल्ली दौरे पर पहुंचे नीतीश कुमार ने मंगलवार को एक बार फिर कहा, "मैं कोई दावेदार नहीं हूं और न ही मैं इसकी इच्छा रखता हूं।" नीतीश के खंडन के बावजूद उनकी उम्मीदवारी को लेकर खबरें और धारणा बनी हुई है। विपक्षी नेताओं के साथ चतुराई से निपटने और भाजपा के साथ अपने अनुभव का लाभ उठाने के लिहाज से नीतीश को बाकी नेताओं से आगे माना जा रहा है।
बिना नाम लिए बोले पीएम, राजनीति में "ध्रुवीकरण"
गौरतलब है कि भाजपा से अलग होने के एक दिन बाद, नीतीश ने पीएम मोदी की उस टिप्पणी का विरोध किया था जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सरकार की कार्रवाई के कारण राजनीति में "ध्रुवीकरण" हो रहा है। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों की हालिया हलचल का जिक्र किए बिना कहा था, "इन भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए, कुछ राजनीतिक समूह खुलेआम सामने आ रहे हैं। लोग एक इकाई में संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं।"
नीतीश को याद आए वाजपेयी
प्रधानमंत्री के जवाब में नीतीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा था, "कोई भ्रष्टाचारियों की रक्षा क्यों करेगा? जिस तरह से वे (भाजपा) दलबदल कराते हैं, वे उस बारे में बात क्यों नहीं करते? हमने बिहार में इतने लंबे समय तक भ्रष्टाचारियों को कभी बर्दाश्त नहीं किया।" उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए नीतीश कुमार ने कहा था, "जिस तरह से उन्होंने सबका ख्याल रखा... बिहार में भी मुझे इतने सालों तक काम करने का मौका मिला। केंद्र के लोग बात करते रह सकते हैं, मैं वास्तव में इन बातों से परेशान नहीं।
नीतीश का कई नेताओं से मिलना
बता दें कि दिल्ली दौरे पर नीतीश कुमार ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अधिकांश विपक्षी नेताओं से मुलाकात की। सीपीएम मुख्यालय पहुंचे नीतीश ने कहा था कि यह कभी उनका नियमित अड्डा हुआ करता था।












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