MP : गृहमंत्री के निर्देश के बाद भी अधिकारी कर रहे मनमानी, जानिए पूरा मामला ?
मध्य प्रदेश के ट्रेड पुलिस जवान संविलियन को लेकर लगातार परेशान है। जवानों का कहना है कि गृहमंत्री को आवेदन देने के बाद भी इस संबंध में कोई भी ठोस कदम मंत्रालय और पीएचक्यू ने नहीं उठा रहा है।
भोपाल,24 जून। मध्य प्रदेश पुलिस में लगभग 4076 ट्रेड आरक्षक, जो कि मध्य प्रदेश पुलिस की जिओपी 57/93 दोबारा प्रारंभ करने के लिए गृहमंत्री को चार बार ज्ञापन सौंप जीओपी पुनः प्रारंभ करवाने हेतु प्रयासरत हैं क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन डीजीपी नंदन दुबे ने 2013 में इस जिओपी को बंद कर दिया था और 2016 में स्पेशल डीजी केएन तिवारी द्वारा इसे प्रारंभ करने के लिए मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिख दोबारा प्रारंभ करने का प्रयास किया गया। उस प्रयास के बाद से आज दिनांक तक कई बार मंत्रालय और पीएचयू के बीच पत्राचार होता रहा है पर आज दिनांक तक इस संबंध में कोई भी ठोस कदम मंत्रालय और पीएचक्यू ने नहीं उठाया है।

मध्य प्रदेश पुलिस के 4076 ट्रेड आरक्षक अपने जीवन को दर-दर भटक कर नोकरी कर रहे है एवम अधिकारियों के बंगलो पर नौकरी करने को मजबूर हैं, जबकि 1993 से 2013, 20 वर्षों तक यह नियम चलन में था जिसे 2013 में बिना किसी कारण बताए बंद कर दिया गया ट्रेड आरक्षक 5 साल की सेवा के उपरांत आरक्षक जीडी की सेवाएं देने के लिए योग्य हो जाता है और फील्ड जीडी ड्यूटी करता है चूंकि आईपीएस लॉबी ये नहीं चाहते कि ट्रेड का जीडी में संविलियन हो ट्रेड आरक्षक जैसे नाई,धोबी, वाटर केरियर, मोची, कुक, टेंट खलासी,सफाईवाला, इत्यादि आरक्षक जिनका वेतन जीडी आरक्षक के सामान(5200-2020 ग्रेड पे 1900) एवं भर्ती प्रक्रिया और भर्ती योग्यता भी आरक्षक आरक्षक जीडी की योग्यता के समान ही होती है। इस नियम के तहत मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती प्रक्रिया थी जो 2013 में एक तुगलकी फरमान जारी कर डीजीपी नंदन दुबे ने बंद कर दी।
वर्तमान में यह मामला पीएसक्यू में लंबित है और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा जो मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता और सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले उनके द्वारा 23/3/2022 को एक पत्र जारी कर यह प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु गृह विभाग को निर्देश जारी किए गए परंतु आज दिनांक तक किसी भी प्रकार का कोई भी संज्ञान पुलिस विभाग द्वारा उस पत्र में नहीं लिया गया है, जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने स्वयं संविलियन प्रारंभ करने की इच्छा जाहिर की थी।
पुलिस मुख्यालय के पत्र 2019 में भी इस प्रक्रिया में कोई वित्तीय भार नहीं होने का हवाला दिया गया है इस नियम के अंतर्गत आने वाले समस्त कर्मचारी अभी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं जो कि फील्ड में नौकरी करने के योग्य एवं फिट हैं और कोई भी वित्तीय भार विभाग पर नहीं पड़ रहा है, तो इनकी संख्या का उपयोग पुलिस विभाग चाह कर भी फील्ड में नहीं कर पा रहा है क्योंकि विभाग के ही कुछ आकाओं द्वारा ट्रेड आरक्षकों को बंगले में चाकरी करवाई जा रही है जबकि इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में संविलियन प्रक्रिया चालू है। विगत वर्ष में 314 लोगों का संविलियन आदेश भी जारी किया गया है। मध्य प्रदेश शासन के विरुद्ध कई आरक्षक ट्रेड कोर्ट की शरण में गए जिससे उनका संविलियन हो गया है।












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