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CM आवास के बाहर स्थापित हुई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, लोकार्पण सम्पन्न, जानिए क्या है इसकी खासियत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना मुख्यमंत्री निवास, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनिर्मित प्रवेश द्वार पर स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का भव्य अनावरण किया। यह घड़ी न केवल भारत की प्राचीन समय गणना पद्धति 'काल गणना' का प्रतीक है, बल्कि यह देश की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुड़े मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया, जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और 7,000 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक और धार्मिक डेटा प्रदान करता है।

Vikramaditya Vedic clock installed outside CM residence inauguration completed know its specialty

सूर्योदय से समय गणना: प्राचीन भारतीय पद्धति का पुनर्जनन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति में समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक की जाती है, न कि रात 12 बजे से, जैसा कि पश्चिमी कैलेंडर में प्रचलित है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हमारे सभी त्योहार अंग्रेजी तिथियों पर आधारित नहीं होते। हमारी गणना छह ऋतुओं और तिथियों के आधार पर होती है। रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी प्राचीन पद्धति में दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है, जिसमें प्रत्येक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। यह कोई बंधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की धरोहर है।"

उन्होंने खगोल विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्राचीन भारत में समय की गणना सूर्य की छाया के आधार पर की जाती थी। मध्य प्रदेश का उज्जैन, जो कभी विश्व समय गणना का केंद्र था, इस घड़ी के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जनन कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के समीप नारायणा गांव में समय गणना का केंद्र खोजने का प्रयास किया था।

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की खासियतें

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी विश्व की पहली ऐसी घड़ी है, जो भारतीय 'काल गणना' पद्धति पर आधारित है। यह घड़ी निम्नलिखित विशेषताओं के लिए जानी जाती है:

30 मुहूर्त प्रणाली: यह घड़ी दिन को 24 घंटों के बजाय 30 बराबर हिस्सों (मुहूर्त) में बांटती है, जहां प्रत्येक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। यह गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की जाती है।

पंचांग की जानकारी: घड़ी नक्षत्र, तिथि, योग, करण, और भारतीय त्योहारों की जानकारी प्रदान करती है। यह भारतीय पंचांग के अनुसार ग्रहों की स्थिति, सूर्योदय-सूर्यास्त के समय, और दैनिक मुहूर्त की गणना भी करती है।

मोबाइल ऐप: घड़ी के साथ लॉन्च किया गया ऐप 7,000 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक डेटा प्रदान करता है, जो महाभारत काल से शुरू होता है। यह ऐप 189 भाषाओं में उपलब्ध है और मौसम, तापमान, हवा की गति, और आर्द्रता जैसी जानकारी भी देता है।

आधुनिकता और परंपरा का संगम: यह घड़ी प्राचीन भारतीय समय गणना को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ती है, जिसमें भारतीय मानक समय (IST) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) भी प्रदर्शित होता है।

Vikramaditya Vedic clock installed outside CM residence inauguration completed know its specialty

भव्य लोकार्पण समारोह

मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित प्रवेश द्वार पर आयोजित इस समारोह में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, मंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, और विष्णु खत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान के सामूहिक गायन से हुई, जिसने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।

मंत्री विश्वास सारंग ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "अगर प्रत्येक मंत्री को एक-एक वैदिक घड़ी भेंट कर दी जाए, तो हम इसे अपने घरों में भी स्थापित कर सकेंगे।" इस टिप्पणी ने उपस्थित लोगों के बीच हंसी का माहौल पैदा कर दिया।

उज्जैन से भोपाल तक: वैदिक घड़ी की यात्रा

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की शुरुआत सबसे पहले उज्जैन में हुई थी, जहां 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 85 फीट ऊंचे टावर पर स्थापित इस घड़ी का उद्घाटन किया था। उज्जैन को प्राचीन काल में समय गणना का केंद्र माना जाता था, क्योंकि कर्क रेखा (Tropic of Cancer) यहाँ से होकर गुजरती है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा, "भारतीय पंचांग हमेशा से खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से विश्व को आकर्षित करता रहा है। यह वैदिक घड़ी आधुनिक ज्ञान और प्राचीन विज्ञान का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण है।" उन्होंने यह भी बताया कि यह घड़ी न केवल समय बताएगी, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों, मुहूर्त, और तिथियों की जानकारी भी देगी।

सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक धरोहर को पुनर्जनन करने का एक प्रयास है। यह न केवल समय गणना की प्राचीन पद्धति को पुनर्जनन करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत का खगोल विज्ञान कितना उन्नत और सटीक था। इस घड़ी को राम मंदिर, 12 ज्योतिर्लिंगों, और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय समय गणना की परंपरा को विश्व स्तर पर प्रचारित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की, जिन्होंने 2014 में सत्ता में आने के बाद योग को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जनन कर रहे हैं। यह घड़ी उसी दिशा में एक कदम है।"

युवाओं के साथ संवाद और बाइक रैली

लोकार्पण समारोह के साथ-साथ, मुख्यमंत्री ने 'भारत का समय - पृथ्वी का समय' थीम पर एक बाइक रैली का भी शुभारंभ किया, जो शौर्य स्मारक से शुरू होकर मुख्यमंत्री निवास पर समाप्त हुई। इस रैली में कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें भारतीय संस्कृति और समय गणना के महत्व पर चर्चा हुई।

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