CM मोहन यादव के सचिवालय में फेरबदल, विकास मिश्रा और आलोक सिंह को नई जिम्मेदारी, जानिए क्यों हुई नियुक्तियां
CM Mohan Yadav News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सचिवालय में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल हुआ है, जिसने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। नीरज मंडलोई को मुख्यमंत्री का अपर मुख्य सचिव (एसीएस) बनाए जाने के बाद उनकी नई टीम को मजबूत करने के लिए दो वरिष्ठ अफसरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विकास मिश्रा को मुख्यमंत्री का उपसचिव नियुक्त किया गया है, जबकि आलोक कुमार सिंह को उनके मौजूदा कर्तव्यों के साथ मुख्यमंत्री के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
यह फेरबदल सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 11 जुलाई 2025 को जारी आदेश के तहत किया गया है। यह कदम न केवल सचिवालय की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में है, बल्कि मुख्यमंत्री की आगामी योजनाओं, विशेष रूप से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 और प्रदेश की औद्योगिक नीतियों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानिए, वन इंडिया हिंदी की यह विशेष रिपोर्ट..

नीरज मंडलोई का नया रोल और सचिवालय में बदलाव की शुरुआत
नीरज मंडलोई, 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी, को 6 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। इससे पहले मंडलोई प्रमुख सचिव, गृह विभाग और प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी नियुक्ति के बाद उन्होंने 8 जुलाई 2025 को सचिवालय के अफसरों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें मुख्यमंत्री के कार्यों को गति देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
मंडलोई ने पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा की टीम में कुछ बदलाव करने का संकेत दिया है। सूत्रों के अनुसार, मंडलोई अपनी कार्यशैली को और अधिक प्रोजेक्ट-केंद्रित और परिणामोन्मुखी बनाना चाहते हैं, जिसके लिए वे अपनी विश्वसनीय और कुशल अफसरों की टीम तैयार कर रहे हैं। डॉ. राजेश राजौरा, जो करीब एक साल तक मुख्यमंत्री के एसीएस रहे, को 6 जुलाई 2025 को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग नियुक्त किया गया है। इस बदलाव ने सचिवालय में नई नियुक्तियों का रास्ता साफ किया।
विकास मिश्रा और आलोक सिंह को क्यों चुना गया?
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विकास मिश्रा, जो पहले योजना, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग में उपसचिव के रूप में कार्यरत थे, को मुख्यमंत्री का उपसचिव नियुक्त किया गया है। मिश्रा को उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और नीति निर्माण में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। उनकी नियुक्ति का उद्देश्य मुख्यमंत्री के आर्थिक और औद्योगिक एजेंडे, विशेष रूप से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 और निवेश प्रोत्साहन नीतियों को लागू करने में सहायता प्रदान करना है।
आलोक कुमार सिंह, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल के प्रबंध संचालक हैं, को उनके मौजूदा कर्तव्यों के साथ मुख्यमंत्री के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सिंह को उनकी प्रशासनिक कुशलता और सहकारी क्षेत्र में अनुभव के लिए चुना गया है। यह अतिरिक्त प्रभार इसलिए दिया गया, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय को मल्टी-टास्किंग और रणनीतिक समन्वय में सक्षम अफसरों की जरूरत है।
प्रशासनिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, "विकास मिश्रा और आलोक सिंह की नियुक्ति से यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री अपनी टीम में युवा, ऊर्जावान, और नीति-केंद्रित अफसरों को लाना चाहते हैं। मिश्रा का आर्थिक और सांख्यिकी बैकग्राउंड निवेश और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद करेगा, जबकि सिंह का सहकारी क्षेत्र का अनुभव ग्रामीण और कृषि-आधारित योजनाओं को गति देगा।"
सचिवालय की मौजूदा संरचना और बदलाव
वर्तमान में मुख्यमंत्री के सचिव की जिम्मेदारी सिबी चक्रवर्ती और टी. इलैया राजा संभाल रहे हैं। चक्रवर्ती को भरत यादव को हटाने के बाद यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि इलैया राजा, जो पहले अपर सचिव थे, को हाल ही में सचिव के रूप में प्रोमोट किया गया है। आलोक सिंह को इन दोनों के साथ समन्वय में काम करना होगा, जिससे सचिवालय की कार्यक्षमता और बढ़े।
सूत्रों के अनुसार, नीरज मंडलोई आने वाले दिनों में सचिवालय में और बदलाव कर सकते हैं। इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं, जैसे औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण, जल संरक्षण, और कानून-व्यवस्था को लागू करने के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार करना है।
फेरबदल के पीछे की रणनीति
- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 की तैयारी: मुख्यमंत्री 13 जुलाई 2025 से दुबई और स्पेन की 6 दिवसीय विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, जहां वे निवेश आकर्षित करने के लिए उद्योगपतियों और व्यापार संगठनों से मिलेंगे। विकास मिश्रा का आर्थिक और सांख्यिकी बैकग्राउंड इस समिट के लिए डेटा-आधारित प्रस्तुतियों और नीतिगत समन्वय में महत्वपूर्ण होगा।
- सहकारी और ग्रामीण विकास पर जोर: आलोक सिंह का सहकारी क्षेत्र में अनुभव उन्हें कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेगा। मध्य प्रदेश में सहकारी विपणन और किसान कल्याण योजनाएं सरकार की प्राथमिकता में हैं।
- प्रशासनिक चुस्ती: नीरज मंडलोई की नियुक्ति और नई टीम का गठन यह सुनिश्चित करेगा कि मुख्यमंत्री के कार्यों में तेजी आए। मंडलोई की सख्त और परिणामोन्मुख कार्यशैली के लिए उनकी सराहना होती रही है।
- डॉ. राजेश राजौरा की नई भूमिका: राजौरा को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और जल संसाधन विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जो सरकार की जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं को गति देगा।
- वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा ने कहा, "यह फेरबदल मुख्यमंत्री मोहन यादव की दूरदर्शिता को दर्शाता है। वे एक ऐसी टीम चाहते हैं, जो उनकी औद्योगिक और विकास योजनाओं को तेजी से लागू कर सके। मंडलोई, मिश्रा, और सिंह की तिकड़ी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।"
विपक्ष का हमला
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस फेरबदल पर सवाल उठाए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "मुख्यमंत्री सचिवालय में बार-बार फेरबदल से क्या हासिल होगा? पहले शहडोल में ड्राई फ्रूट घोटाला, फिर अशोकनगर में गजराज लोधी की गुमशुदगी। क्या यह नई नियुक्तियां इन घोटालों और लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए हैं?"
कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने टिप्पणी की, "नीरज मंडलोई को एसीएस बनाना ठीक है, लेकिन क्या वे मध्य प्रदेश की भयावह कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पाएंगे? जनता को जवाब चाहिए।"
सरकार का जवाब
सामान्य प्रशासन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई दी, "यह फेरबदल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए है। विकास मिश्रा और आलोक सिंह की नियुक्ति से सचिवालय की कार्यक्षमता में और सुधार होगा।"
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य मध्य प्रदेश को विकसित भारत का एक मजबूत स्तंभ बनाना है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर चुस्ती और पारदर्शिता जरूरी है। यह फेरबदल उसी दिशा में एक कदम है।"
सूत्रों के अनुसार, नीरज मंडलोई जल्द ही सचिवालय में और बदलाव कर सकते हैं। इसमें कुछ और अफसरों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, ताकि जल गंगा संवर्धन अभियान, निवेश प्रोत्साहन नीतियां, और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो सके।
प्रशासनिक विशेषज्ञ प्रो. संजय शर्मा ने कहा, "यह फेरबदल मध्य प्रदेश सरकार की रणनीति को दर्शाता है। मंडलोई जैसे अनुभवी अफसर और मिश्रा-सिंह जैसे कुशल अधिकारियों की नियुक्ति से यह स्पष्ट है कि सरकार निवेश, विकास, और प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान दे रही है।"
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