छिंदवाड़ा में सियासी बवाल: उमंग सिंघार का कलेक्टर पर हमला, कुत्ते को ज्ञापन सौंपने की घटना ने मचाया तूफान
20 अगस्त 2025 को छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं और यूरिया की कमी को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था। इस प्रदर्शन में पूर्व सांसद नकुलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
आंदोलन के बाद कांग्रेस नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां वे कलेक्टर शीलेंद्र सिंह को किसानों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे। लेकिन कलेक्टर के न आने पर नेताओं का गुस्सा भड़क गया। नाराजगी में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी ने प्रतीकात्मक रूप से एक आवारा कुत्ते के गले में ज्ञापन की माला बांध दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया।

गुरुवार को धार में कांग्रेस जिला अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी के पदभार ग्रहण समारोह में उमंग सिंघार ने इस घटना का जिक्र करते हुए कलेक्टर पर तंज कसा। उन्होंने कहा, "छिंदवाड़ा में मैंने कहा था कि अगर कलेक्टर नहीं आएगा, तो देख लेना। जब वह नहीं आया, तो मैंने एक कुत्ते को बुलाया और उसे छिंदवाड़ा का कलेक्टर बना दिया। फिर हमने उस कुत्ते को ज्ञापन सौंप दिया।" सिंघार ने बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा और कहा, "यह बीजेपी की सरकार है, और अधिकारी डर के साये में काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि कांग्रेस की सरकार भी आएगी। जो कलेक्टर और आईएएस पार्टीबाजी करेंगे, उन्हें हम राम नाम सत्य का मतलब समझाएंगे।"
कलेक्टर की चुप्पी, बीजेपी का पलटवार
छिंदवाड़ा के कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है। जब भास्कर ने उनसे इस घटना और कांग्रेस के आरोपों पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं। इस मामले पर कुछ नहीं कहूंगा।" उनकी इस प्रतिक्रिया ने सियासी हलकों में और चर्चा को जन्म दे दिया।
वहीं, बीजेपी ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने इसे प्रशासनिक अधिकारियों का अपमान बताया और कहा कि कांग्रेस अपनी हताशा में इस तरह के हथकंडे अपना रही है। बीजेपी के एक प्रवक्ता ने कहा, "कांग्रेस ने छिंदवाड़ा में जो किया, वह न केवल कलेक्टर का अपमान है, बल्कि यह संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। उमंग सिंघार का यह बयान उनकी हताशा और अराजकता को दर्शाता है।"
क्यों भड़की कांग्रेस?
20 अगस्त को छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने 'किसान बचाओ आंदोलन' के तहत एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। इस आंदोलन में यूरिया की कमी, भू-माफियाओं द्वारा आदिवासियों की जमीन हड़पने और कथित वोट चोरी जैसे मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह के ज्ञापन लेने न आने पर नेताओं का गुस्सा भड़क गया।

उमंग सिंघार ने मंच से कहा कि कलेक्टर बीजेपी के इशारों पर काम कर रहे हैं और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छिंदवाड़ा में आदिवासियों की जमीन को भू-माफियाओं द्वारा हड़पने में प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। इस गुस्से में कांग्रेस नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से एक कुत्ते को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन का मजाक उड़ाया। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया।
सोशल मीडिया पर हंगामा
उमंग सिंघार ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया, जिसमें वे कलेक्टर को 'बीजेपी का गुलाम' कहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं बटोरीं। कुछ यूजर्स ने इसे कांग्रेस की हताशा का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे प्रशासन के खिलाफ जनता की आवाज उठाने का साहसी कदम करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "छिंदवाड़ा में कलेक्टर ने ज्ञापन लेने से इंकार किया, तो कांग्रेस ने कुत्ते को ज्ञापन सौंपा। यह उन अधिकारियों के लिए तमाचा है, जो सत्ता के तलवे चाट रहे हैं।"
वहीं, बीजेपी समर्थकों ने इसे संवैधानिक पदों का अपमान बताया। एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, "कलेक्टर जैसे अधिकारियों का इस तरह अपमान करना शर्मनाक है। यह कांग्रेस की सस्ती राजनीति को दर्शाता है।"

कलेक्टर पर पहले भी विवाद
यह पहली बार नहीं है जब छिंदवाड़ा के कलेक्टर शीलेंद्र सिंह विवादों में आए हैं। कांग्रेस ने उन पर बीजेपी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उमंग सिंघार ने पहले भी दावा किया था कि 2023 के विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सहित कई सीटों पर वोट चोरी हुई, जिसमें प्रशासन की मिलीभगत थी। इस बार कुत्ते को ज्ञापन सौंपने की घटना ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
सियासी नफा-नुकसान
इस घटना ने छिंदवाड़ा को एक बार फिर सियासी केंद्र बना दिया है। छिंदवाड़ा, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ माना जाता है, पहले से ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच तनातनी का केंद्र रहा है। इस घटना ने कांग्रेस को बीजेपी सरकार और प्रशासन पर हमला करने का एक और मौका दिया है, लेकिन बीजेपी इसे कांग्रेस की हताशा और अनुशासनहीनता का प्रतीक बता रही है।
स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना कांग्रेस को अल्पकालिक रूप से सुर्खियां दिला सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यह उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों का इस तरह सार्वजनिक अपमान मतदाताओं में गलत संदेश दे सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे को भुनाकर अपनी लाड़ली बहना योजना और प्रशासन की निष्पक्षता को जनता के बीच प्रचारित कर सकती है।












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