Bhopal News: MP में पाकिस्तानी इकोनॉमिक टेरर के मंसूबे नाकाम, भोपाल साइबर पुलिस के हत्थे चढ़े 6 आरोपी, 2 बिहारी
पाकिस्तान का इकोनॉमिक टेरर भारत में फ्रॉड के माध्यम से शुरू हो गया है। भोपाल साइबर पुलिस ने बिहार के दो शख्स आलोक राय और शिवम राजपूत को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं।

Bhopal cyber police News: राजधानी भोपाल में साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस ने पाकिस्तान के इकोनॉमिक टेरर का पर्दाफाश किया है। दरअसल साइबर पुलिस ने बिहार से दो शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों शातिर फेसबुक के माध्यम से भोपाल के लोगों से दोस्ती कर उन्हें पैसों का लालच देकर बैंक खाते खुलवाते थे। पुलिस ने इस मामले में भोपाल से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
शुक्रवार को भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके क्रिप्टो करेंसी ऐप के माध्यम से फ्रॉड करने का बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बिहार से दो शख्स आलोक राय और शिवम राजपूत को इस मामले में गिरफ्तार किया है। डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रुत्कीर्ति सोमवंशी में जानकारी देते हुए बताया कि दोनों आरोपी फेसबुक के माध्यम से भोपाल के लोगों को फंसाते थे। पहले फेसबुक पर दोस्ती करते फिर पैसों का लालच देकर उनसे बैंक का खाता खुलवाते थे।
कैसे हुआ खुलासा
डीसीपी क्राइम ब्रांच सोमवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि पठानी बरखेड़ा के रहने वाले हर्ष यादव (21) ने 22 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसको 2 हजार का लोन दिलाने के नाम पर रोहन और अमोल ने एटीएम कार्ड व बैंक खाते की डिटेल ले ली। इसके बाद जब लोन का पैसा खाते में नहीं आया तो हर्ष ने अपने बैंक में जाकर जानकारी ली। जानकारी करने पर उसे पता चला कि पिछले 4 दिनों में खाते से करीब 19 लाख का लेनदेन हो चुका है। जब हर्ष में अपना एटीएम वापस मांगा तो, दोनों आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देने लगे। जिसकी शिकायत पर जांच शुरू की गई।
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इसके बाद पुलिस ने बरखेड़ा पठानी गोविंदपुरा के रहने वाले भगवान सिंह ठाकुर( उम्र 24 वर्ष) कटारा हिल्स के अमोल गोड़गे(24) अरेरा कॉलोनी के अभिषेक परिहार हबीबगंज के अंकित सिंह राजपूत बेतिया बिहार के रहने वाले शिवम राजपूत(19) और आलोक कुमार(21) को गिरफ्तार किया। शिवम बैंक अकाउंट का बैलेंस अकाउंट कावेरी पैकेज वेरीफाई करता और खातों को मैनेज करता, जबकि आलोक बैंक अकाउंट में रुपए लेता है, जिसे बायनेंस ऐप के माध्यम से पाकिस्तान के फैसलाबाद में ट्रांसफर करता। डीसीपी ने बताया कि भोपाल के रहने वाले सभी आरोपी लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध करवाते थे। आरोपियों के मोबाइल में पाकिस्तानी दूरसंचार कंपनी का कंट्री कोड वॉइस नोट मिला है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि गिरोह का सरगना पाकिस्तान का हो सकता है।
10 दिनों में ₹10 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की
जांच में सामने आया कि गिरोह पाकिस्तानी जालसाज के लिए बैंक खाते लोकल नेटवर्क के लिए मोबाइल सिम उपलब्ध कराता था। बैंक खातों में साइबर ठगी का पैसा जमा होता था। जिसे ऐप के जरिए पाकिस्तान में बैठे जालसाज के पास भेजा जाता था। गिरोह के बैंक खातों में 22 मार्च से 11 अप्रैल के बीच एक करोड़ 10 लाख रुपए जमा हुए।
₹10 हजार का देते थे लालच
बिहार से पकड़े गए आरोपी आलोक राय और शिवम राजपूत भोपाल में नौजवान लड़कों से फेसबुक के माध्यम से दोस्ती कर उन्हें ₹10 हजार का लालच देकर बैंक खाता खुलवाते थे। इसके बाद दोनों बिहारी आरोपी उन बैंक खातों में रुपये मंगवाते थे, यह पैसा कहां से आता था पुलिस अभी इसका पता लगा रही है। इसके बाद दोनों आरोपी यह पैसा क्रिप्टो करेंसी ऐप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे आरोपियों को भेज देते थे। इसके एवज में पाकिस्तानी उन्हें दो परसेंट का कमीशन देते थे।
भोपाल से चार आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने 4 नौजवान लड़कों को गिरफ्तार किया है। डीसीपी श्रुत्कीर्ति सोमवंशी ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और भी बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है पूरा नेटवर्क पाकिस्तान के फैसलाबाद से चल रहा था। अब यह देखना होगा कि विदेश मंत्रालय से परमिशन लेकर क्या भोपाल साइबर पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए पाकिस्तान जाती है या फिर किसी और माध्यम से पाकिस्तान में बैठकर फ्रॉड कर रहे आरोपियों को पकड़ा जाता है।












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