Bhopal News: अयोध्या बायपास एयरपोर्ट रोड पर रोजाना ट्रैफिक जाम क्यों? करोंद चौराहे पर जनता की बढ़ती बेचैनी
Bhopal Traffic News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, जो कभी झीलों का शहर के नाम से जाना जाता था, आजकल ट्रैफिक जाम की भेंट चढ़ गया है। खासकर एयरपोर्ट रोड और करोंद चौराहे पर रोज़ाना लगने वाले भीषण जाम ने लाखों वाहन चालकों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। सुबह के व्यस्त समय में एक किलोमीटर लंबा सफर तय करने में घंटों लग जाते हैं, जिससे लोग न सिर्फ समय खोते हैं बल्कि तनाव और ईंधन की बर्बादी का शिकार भी हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की लापरवाही से यह समस्या बढ़ती जा रही है, जबकि मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते अयोध्या बायपास पर भी लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि वे सुधार के लिए प्रयासरत हैं।

करोंद चौराहे का हाल: सिग्नल और कैमरे फेल, जाम का पर्याय बन गया चौराहा
भोपाल का करोंद चौराहा, जो एयरपोर्ट रोड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, आजकल ट्रैफिक का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां सिग्नल सिस्टम की खराबी और ट्रैफिक कैमरों के नाकाम होने से स्थिति और बिगड़ गई है। अप्रैल 2025 में 'द हितावाड़ा' अखबार ने एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि करोंद चौराहे सहित पॉलिटेक्निक स्क्वायर, सासाराम चौराहा और अल्पना तिराहा जैसे प्रमुख चौराहों पर कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। इन कैमरों का मकसद उल्लंघनों पर निगरानी रखना और ट्रैफिक को सुचारू बनाना था, लेकिन उनकी खराबी से चालक बिना किसी डर के नियम तोड़ते हैं, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय निवासी रवि शर्मा (नाम बदला गया) बताते हैं, "हर सुबह 8 बजे एयरपोर्ट रोड पर करोंद चौराहे से गुजरना एक युद्ध जैसा लगता है। सिग्नल बिना किसी चेतावनी के बंद हो जाते हैं, और चालक आपस में भिड़ जाते हैं। कल तो 1 किमी का रास्ता 45 मिनट में तय हुआ।" रेडिट पर भोपाल सबरेडिट में भी इसी तरह की शिकायतें उमड़ी हैं, जहां यूजर्स ने इसे "एडवेंचर स्पोर्ट्स" जैसा बताया है। एक पोस्ट में लिखा था, "ट्रैफिक जाम दिख रहा है फिर भी लोग लाइन तोड़कर आगे निकल जाते हैं, जैसे उड़कर चले जाएंगे।"
ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि करोंद चौराहे पर सड़क की संकरी चौड़ाई और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों से निकलने वाले वाहनों की संख्या समस्या को बढ़ा रही है। 99एकर्स की एक रिव्यू में भी करोंद क्षेत्र को "ट्रैफिक जाम का प्रमुख नेगेटिव पॉइंट" बताया गया है, जहां सड़कें छोटी होने से पूरे दिन जाम लगा रहता है। हालांकि, कुछ रिव्यू में इसे "ट्रैफिक जाम न होने" का इलाका बताया गया है, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
एयरपोर्ट रोड पर बढ़ती मुश्किलें: लाखों यात्रियों का सफर दुश्वार
एयरपोर्ट रोड भोपाल का एक व्यस्त मार्ग है, जो राजा भोज एयरपोर्ट को शहर से जोड़ता है। यहां रोज़ाना हजारों यात्री, टैक्सी चालक और लोकल वाहन गुजरते हैं, लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी से जाम आम हो गया है। अगस्त 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट में वाहनों की भीड़ को कम करने के लिए अलग-अलग फ्लोर पर अराइवल और डिपार्चर टर्मिनल बनाए जा रहे हैं, लेकिन रोड पर अभी भी समस्या बरकरार है।
सितंबर 2025 में एक घटना ने हालात की पोल खोल दी, जब पॉलिटेक्निक स्क्वायर से वीआईपी रोड तक 2-3 किमी लंबा जाम लग गया। कारण? एक जुलूस और बारिश का असर। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि वाहन दो घंटे से ज्यादा फंसे रहे, और सभी कनेक्टिंग रोड ब्लॉक हो गए। इसी तरह, जून 2025 में राहुल गांधी के दौरे के दौरान वीआईपी रोड पर डायवर्जन से जाम बढ़ गया। एयरपोर्ट जाने वाले रास्ते पर लाखों वाहन प्रभावित होते हैं, खासकर पीक आवर्स में।
लोगों का कहना है कि पुलिस की व्यवस्था बनाने में नाकामी है। एक टैक्सी चालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "एयरपोर्ट रोड पर पार्किंग की कमी और अनधिकृत वाहन खड़े होने से जाम लगता है। पुलिस सिर्फ चालान काटती है, समाधान नहीं देती।" फरवरी 2025 में एक वीआईपी शादी के दौरान भी इसी रोड पर डायवर्जन से यात्री परेशान हुए।
मेट्रो प्रोजेक्ट: सुधार का वादा या नई मुसीबत?
भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट, जो शहर की ट्रैफिक समस्या का हल बताए जा रहा है, फिलहाल उल्टा जाम बढ़ा रहा है। खासकर अयोध्या बायपास पर मेट्रो के निर्माण कार्य से सड़कें संकरी हो गई हैं, और ट्रैफिक डायवर्जन आम हो गए हैं। मई 2025 में एक रिपोर्ट में बताया गया कि अयोध्या बायपास को 10-लेन हाईवे बनाने के लिए 12,000 से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय चिंता बढ़ गई है। लेकिन ट्रैफिक के लिहाज से, चौड़ीकरण से पहले सर्विस रोड बनाई जा रही है ताकि जाम न बढ़े।
अप्रैल 2025 में एक प्रोटेस्ट के दौरान अयोध्या बायपास पर डायवर्जन से रूट बदलना पड़ा, और बसेस को रत्नागिरी, भानपुर ब्रिज होते हुए भेजा गया। मेट्रो की ब्लू लाइन (भदभदा स्क्वायर से रत्नागिरी तिराहा) का निर्माण चल रहा है, जो 14.16 किमी लंबी है और 14 स्टेशन होंगे। लेकिन निर्माण के कारण अस्थायी जाम बढ़ गए हैं। जुलाई 2025 में मुहर्रम जुलूस के दौरान भी एयरपोर्ट रूट पर दो वैकल्पिक मार्ग सुझाए गए: एक भदभदा स्क्वायर से मुंगालिया छाप होकर, दूसरा खजुरी रोड से।
मेट्रो के पूरा होने पर (अक्टूबर 2025 तक चरण-1) ट्रैफिक में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल यह "समस्या का समाधान" कम और "नई समस्या" ज्यादा साबित हो रहा है।
ट्रैफिक पुलिस के उपाय, मेहनत जारी, लेकिन नतीजे कब?
ट्रैफिक पुलिस सुधार के लिए कोशिशें कर रही है। निशातपुरा थाना प्रभारी मनोज पटवा ने हाल ही में एक स्थानीय चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम सिग्नल सिस्टम को अपग्रेड कर रहे हैं और कैमरों की मरम्मत पर काम चल रहा है। अयोध्या बायपास पर सर्विस रोड बनने से जाम कम होगा। इसके अलावा, पीक आवर्स में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।" अप्रैल 2025 में रोड सेफ्टी कमिटी की बैठक में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई।
पुलिस ने डायवर्जन प्लान भी जारी किए हैं, जैसे अप्रैल 2025 के प्रोटेस्ट के दौरान करोंद वेजिटेबल मार्केट से जेपी ब्रिज होकर रूट। लेकिन लोगों का कहना है कि ये उपाय अस्थायी हैं। एक सर्वे में 70% लोगों ने बताया कि ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार की ज़रूरत है।
सुधार की उम्मीद, लेकिन तत्काल कार्रवाई जरूरी
भोपाल की ट्रैफिक समस्या एक बड़ी चुनौती है, जो विकास के साथ-साथ बढ़ रही है। मेट्रो और रोड एक्सपैंशन से लंबे समय में राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल प्रशासन को सिग्नल, कैमरे और डायवर्जन पर फोकस करना होगा। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो शहर की छवि और नागरिकों का धैर्य दोनों खतरे में पड़ सकता है। क्या भोपाल जल्द ही "ट्रैफिक-फ्री" शहर बनेगा? यह सवाल अभी अनुत्तरित है।












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